पटाखें फोड़ते वक्त आंखो का रखे ख्याल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 11 नवंबर 2012

पटाखें फोड़ते वक्त आंखो का रखे ख्याल


दीपावली पर्व में फोड़े जाने वाले पटाखे हर साल कई लोगों की आंखों की रोशनी छीन लेते हैं। इनमें से अधिकतर मरीज ऐसे होते हैं जोकि अक्सर शेखी के चक्कर में हाथ में ही अनार पकड़ कर चलाने का प्रयास करते हैं तथा बाद में इसी अनार से निकलने वाली रोशनी उनकी आंखों की रोशनी छीन लेती है।  चिकित्सकों की माने तो दीपावली पर हर साल करीब एक दर्जन ऐसे लोग इलाज के लिए आते है जोकि छोटी-छोटी गलतियों के कारण अपनी आंखों की रोशनी गवां लेते हैं। ऐसे लोगों की आंखों की पुतलियां तथा पर्दा आंख के निकट ही पटाखा फूट जाने तथा अनार से निकलने वाले जहर के आंख में पडऩे के कारण होते हैं।  ऐसे में उनकी प्राथमिकता रहती है कि पटाखे के कारण सबसे पहले आंखों को वाश किया जाता है। यदि यह तकनीक असर कर जाए तो ठीक अन्यथा मरीज के लिए आंख की रोशनी जाने की संभावना पूरी तरह से बनी रहती है। नेत्र विशेषज्ञों की भी यही राय है कि  दीपों का त्योहार दीपावली पर्व सबसे के लिए सुखमय हो, ऐसे में जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति पटाखों से गुरेज करें। यदि पटाखा फोडऩा भी हो तो छोटे बच्चे अपने साथ अपने अभिभावकों को रखें, पटाखे सावधानी से चलाएं तथा पास ही साफ पानी रखें।

नेत्र विशेषज्ञ डा बीएस रमोला ने बताया कि दीपावली पर्व  13 नवंबर को मंगलवार को है। इसकी हर घरों में तैयारी शुरू हो गई है। घरों में जहां रंग-रोगन का काम चल रहा है। वहीं दीपावली पर्व पर गली-मोहल्लों में पटाखा बेचने वाले दुकानदार भी  विभिन्न तरह के पटाखा लाकर स्टाक किये हुए हैं। पटाखों की बिक्री भी शुरू हो चुकी है। हालांकि पटाखे फोडऩे से पर्यावरण का सीना छलनी होगा। वहीं इनकी तेज आवाज से कान के पर्दे फट सकते हैं। साथ ही उनसे उठने वाला धुंआ आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकता है। उनके मुताबिक पटाखों से लोगों को दूर रहना चाहिए। पटाखों की आवाज होने से जहां कान के परदे फटने की संभावना होती है, वहीं पटाखों की आवाज से आंखों की रोशनी को नुकसान होता है। इसलिए पटाखे नहीं फोडऩे चाहिए।

वही डा राहुल जोशी ने आरएनएस को बताया कि दीपावली का पर्व धूमधाम से लोगों को मनाना चाहिए, लेकिन पटाखों से दूर रहना चाहिए। यह हर तरह से शरीर को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि पटाखे की आवाज से अस्पताल में भर्ती नवजात शिशु को सबसे अधिक नुकसान होता है। अस्पताल में दाखिल महिलाओं को भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु के कान के पर्दे इतने नाजुक होते हैं यदि अस्पताल में सावधानी और वार्ड के दरवाजों को दीपावली के दिन बंद न रखा जाए तो निश्चित तौर पर नवजात शिशुओं और डिलीवरी होने वाली महिलाओं को परेशानी होती है। इसके अलावा पटाखों के धुंए से पर्यावरण की प्रदूषित होता है।  


(राजेन्द्र जोशी)

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