भारत की सीमाएं असुरक्षित है। : भागवत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 7 जनवरी 2013

भारत की सीमाएं असुरक्षित है। : भागवत


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघ चालक मोहन भागवत ने सीमा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताते हुए रविवार को कहा कि भारत की सीमाएं असुरक्षित व असंरक्षित हैं। उनके मुताबिक अपना देश शत्रुता नहीं करता मगर शत्रुता करने वाले देशों ने जाल बिछा रखा है और चीन ने तो नाकेबंदी कर रखी है। इंदौर में मालवा प्रांत के संघ स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण समारोह में रविवार को भागवत ने कहा कि भारत से द्वेष के कारण ही पाकिस्तान बना और आज भी उसके रुख में बदलाव नहीं आया है। पाक के मंत्री हमारे देश में मैत्री के लिए आते हैं मगर क्या-क्या बातें करके जाते हैं किसी से छुपा नहीं है। 

राजनीतिक दलों और सरकारों के रवैए की आलोचना करते हुए भागवत ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा की बात तो सब करते हैं, मगर ऐसा होता नहीं हैं। देश में घुसपैठ बढ़ती जा रही है, राजनीतिक स्वार्थ के चलते कोई इस पर अंकुश लगाने पर ध्यान नहीं देता। आरएसएस के बारे लोगों द्वारा अलग-अलग जाहिर की जाने वाली राय पर भी भागवत ने सवाल किए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघ के आयोजनों में स्वयंसेवकों के जुड़ने को जमावड़ा कहते हैं, जबकि जमावड़ा तो राजनीतिक दलों में होता है, मगर संघ राजनीतिक दल नहीं है। कोई संघ को व्यायाम शाला कहता है मगर ऐसा है नहीं। संघ को समझने के लिए गहराई में जाना होगा। 

भागवत ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दुनिया में राम-रावण जैसा युद्घ दूसरा नहीं हुआ, उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। ठीक इसी तरह संघ की तुलना दुनिया के किसी अन्य संगठन से संभव नहीं है। सीता हरण की घटना का भागवत यहां भी जिक्र करने से नहीं चूके। उनका कहना था कि सीता का अपहरण किसी एक महिला का अपहरण नहीं था बल्कि यह संस्कृति व दानव से जुड़ा सवाल था। 

उन्होंने आगे कहा कि देश और भीतर अनेक समस्याएं हैं, जिनके चलते जीवन मुश्किल हो गया है। सभी को लगता है कि वर्तमान परिवेश में बदलाव होना चाहिए, मगर करता कोई नहीं। भागवत ने कहा कि यह बदलाव किसी और के करने से नहीं होगा बल्कि इसके लिए सब को आगे आना होगा। भगवान भी भक्त का साथ तब देते हैं जब वह आगे आता है। राजनीतिक दलों के नेताओं की बयानबाजी पर भी भागवत ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज गाली गलौच का दौर चल रहा है, यह रंग बढ़ता ही जा रहा है, इसका रस लेने वाले रस ले रहे हैं और इसमें बदलाव भी नहीं आ रहा है। आम आदमी को ऐसे लोगों को सबक सिखाना चाहिए। 

मालवा प्रांत के एकत्रीकरण समारोह में 14 जिलों के स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर मौजूद पदाधिकारियों ने हिंदू संस्कृति पर हावी होती पाश्चात्य संस्कृति पर चिंता जताई।

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