व्यवहार में प्रेम-माधुर्य लाएं !!!!!!!!!!
हम जिस संसार में रहते हैं उनमें किसम-किसम के लोगों का डेरा हमेशा बना रहता है। इनमें कई वास्तविक आदमी होते हैं, कई में आधे गुण आदमियों के और आधे गुण जानवरों के होते हैं। कई सारे ऎसे भी होते हैं जिनका शरीर ही आदमी का होता है, बाकी सब कुछ जानवरों से मिलता-जुलता है। इसी प्रकार की दूसरी किस्म के लोग भी हैं जिन्हें मनुष्य शरीर तो प्राप्त हो जाता है लेकिन इनका स्वभाव, व्यवहार और काम करने की शैली असुरों और नरपिशाचों से मेल खाती है। इस किस्म के लोग सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि ये जहां पाए जाते हैं वहां परिवेश में प्रदूषण होने के साथ ही इनकी पाशविक वृत्तियों की वजह से लोग इनसे हमेशा दुःखी रहते हैं और तब तक ऎसे लोगों से परेशान रहते हैं जब तक कि इनका धरा से वापस लौटना न हो जाए। यही कारण है कि आम लोग ऎसे आसुरी आदमियों के जल्द से जल्द निष्प्राण होने के लिए भगवान से निरन्तर दुआएं करते रहते हैं।
सामान्य तौर पर आदमियों के नाक-नक्श और चाल-चलन तथा व्यवहार से यह पता चल ही जाता है कि वह किस किस्म का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन आजकल लोग वैसे नहीं रहते जैसे हैं। आजकल आदमियों का ज्यादा प्रतिशत ऎसा हो गया है जो डुप्लीकेट है और इनके कामों, व्यवहार तथा स्वभाव से इनके भीतर विद्यमान आसुरी वृत्तियों को जानना थोड़ा टेढ़ा जरूर है, मुश्किल नहीं। हमारे अपने इलाके की बात हो या कहीं दूर की, हर जगह इन तमाम किस्मों के आदमी पाए जाते हैं। कइयों के बारे में लोगों को पता होता है, और कई लोग भ्रम के मारे इनके बारे में जान नहीं पाते। कई दोहरे-तिहरे चरित्र वाले होते हैं और इस वजह से इन्हें समझ पाना आम लोगों के लिए मुश्किल सा होता है। फिर भी सच्चे मन और शुद्ध तन वाले लोगों को ईश्वर की ओर से अतिरिक्त क्षमताएं दी हुई होती हैं जिसके माध्यम से ये औरोें के बारे में सोचने-समझने और मूल्यांकन करने का सामथ्र्य पा जाते हैं।
आदमियों की इन तमाम किस्मोंं के बीच आसुरी वृत्तियों का दिग्दर्शन करना हो तो आदमियों के स्वभाव को देखें-परखें। हमारे आस-पास और अपने क्षेत्र में भी इस किस्म के खूब लोग हैं जिन्हें सामने वाले पर गिद्ध की तरह झपटने की आदत हुआ करती है। इनके लिए किसी आदमी का कोई मूल्य नहीं हुआ करता। अहंकार और अपने आपको सर्वस्व मान लेने के दंभ में चूर इन लोेगों के लिए न मानवता का कोई मतलब है, न संवेदनशीलता और न परोपकार का। सामने वाले के कद या पद का भी ये लोग कोई ख्याल नहीं रखते। अनुशासन, गांभीर्य और शालीनता के बीज इनके रक्त से गायब होते हैं। इस किस्म के लोगों का जीवन स्वच्छन्द, उन्मुक्त और व्यभिचारी मन-मस्तिष्क से इतना भरा हुआ होता है कि ये स्वेच्छाचारी होकर जीवन जीते हैं और आवाराओं की तरह कहीं भी घुसपैठ कर लेते हैं।
इस किस्म के लोगों के दिमाग पर हमेशा यही भूत सवार रहता है कि ये ही संप्रभुता सम्पन्न वे लोग हैं जिन्हें जमाने भर को चलाने के लिए भेजा हुआ है तथा अपने इलाके से लेकर दुनिया भर में वही होना चाहिए जो ये चाहते हैं। और यही कारण है कि इस किस्म के लोग समाज और क्षेत्र के ‘ए’ क्लास कॉन्ट्रेक्टरों की तरह रहते और रुतबा दिखाते रहते हैं। इतने सारे अवगुणों और भ्रमों का यह घालमेल ही ऎसे लोगों को इतना दंभी बना डालता है कि इनके लिए दूसरे सारे लोग अपने नौकर-चाकर या गुलाम ही नज़र आते हैं।
ऎसे झपट्टामार लोग जहाँ कहीं जाते हैं वहाँ अपनी झपट्टामार कल्चर का खुल कर प्रदर्शन करते रहते हैं और हमेशा दूसरों पर हावी होने की कोशिश करते रहते हैं। झपट्टामार लोगों का स्वभाव और व्यवहार दोनों आक्रामक रहते हैं तथा इस कारण से ये लोग सदैव उद्विग्न और श्वानों की तरह कुछ न कुछ पा जाने के फेर में निरन्तर भ्रमण करते रहते हैं। हमारे अपने रोजमर्रा के जीवन में ऎसे कई लोगों से पाला पड़ता है अथवा हम अक्सर कहीं न कहीं इन झपट्टामार लोगों को देखते हैं। इनके परिधान, आभूषण और सुनहरी फ्रेम वाले चश्मों से लेकर फैशनपरस्ती ऎसी कि जैसे कोई बहुत बड़े आदमी हों लेकिन जब इनके मुँह से शब्दों का निकलना शुरू होने लगता है, हर कोई अंदाज लगा ही लेता है कि ये लोग कितने गिरे हुए होते हैं। इनकी वाणी से माधुर्य गायब होता है और उसका स्थान ले लेती है कर्कशता और अश्लीलता। कटु वचनों की ऎसी बरसात करते हैं कि सामने वाला भीतर ही भीतर यह सोचने को विवश हो ही जाता है कि मनुष्य के वेश में भी असुरों का अस्तित्व संभव है।
वार्तालाप के दौरान सामने वाला कितनी ही शिष्टता और शालीनता से बर्ताव करें, मगर इस किस्म के लोग हावी होने के लिए ऎसे शब्द और वाक्य उगल ही देते हैं जिससे कि सारा मामला कड़वाहट मेंं बदल जाता है। इस आदत को पाले रखने वाले लोगों से सामान्य लोग या तो सायास दूरी बनाए रखने लग जाते हैं अथवा इनके भीतर के असुरत्व को भाँप कर ‘दुर्जनम् प्रथमम् वंदे’ के मूलमंत्र को अंगीकार कर लेते हैं। इसे इनके भीतर का असुरत्व, क्रॉस ब्रीडिंग या इनके बीज तत्व में मिलावट, कुछ भी कह लें, मगर इतना तो सत्य है ही कि झपट्टामार लोग गिद्ध की तरह टूट पड़ने के आदी होते हैं और ऎसे लोगों से कभी भी प्रेमपूर्वक बर्ताव की कल्पना नहीं की जा सकती। इस किस्म के लोग हर पेशे में, हर वर्ग में और हर जगह पाए जाते हैं। कई बड़े-बड़े और प्रभावशाली कहे जाने वाले लोग भी इस महामारी से भरे हुए हैं।
अपने यहाँ भी ऎसे लोगों का खुब बाहुल्य है, थोड़ा सा इस दिशा में सोचने भर की जरूरत है। फिर अपने आप हम जान जाएंगे कि इस सूची में अपने इलाके के कितने महारथी हो सकते हैं। झपट्टामार स्वभाव के लोग अपने आपको भले ही सफल मानने के भ्रम पाले रहें, आम जन के हृदयों में इनके लिए कोई स्थान नहीं होता। लोग तो इनकी तेरहवीं और बरसी की प्रतीक्षा ही करते रहते हैं। इसलिए जिन लोगों को जीवन में सफलता पानी हो उन्हें यह स्वभाव पूरी तरह छोड़ कर सभी के प्रति प्रेम और माधुर्य को अपनाना चाहिए।
---डॉ. दीपक आचार्य---
9413306077
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