विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने मंगलवार को कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर को यूनेस्को की विश्व विरासत की सूचि में शामिल किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के खंडहर को देखने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में खुर्शीद ने कहा, "ऐसे धरोहरों को विश्व विरासत की सूचि में शामिल किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के सलाहकार समिति की बैठक में विश्व में सांस्कृतिक कूटनीति पर चर्चा होगी।
उल्लेखनीय है कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने भी पिछले सप्ताह नालंदा को विश्व विरासत की सूची में शामिल करने की मांग करते हुए अब तक इसे विरासत में शामिल नहीं करने को अपमानजनक बताया था। गौरतलब है कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व के 10,000 विद्यार्थी अध्ययन करते थे और उनके लिए 2,000 से ज्यादा शिक्षक थे।
वर्ष 1197 तक अस्तित्व में रहे इस विश्वविद्यालय में दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस और तुर्की तक के विद्यार्थी आते थे। वर्ष 1193 में गुलाम वंश के शासक कुतब-उद-दीन ऐबक के सिपहसालार बख्तियार खिलजी ने इसे तबाह कर दिया था।
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