मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में आठ कुलपतियों के मनोनयन पर सवाल उठाया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कुलपतियों की नियुक्ति में न तो राज्य सरकार से परामर्श किया गया और न ही विश्वविद्यालय अधिनियम का पालन.
जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुलपतियों के मनोनयन में राज्य सरकार की राय नहीं लेना एक विकट समस्या है, जबकि विश्वविद्यालय को सारा अनुदान राज्य सरकार देती है. उन्होंने कहा कि यह तय हो जाना चाहिये कि कुलपतियों की नियुक्ति से राज्य सरकार को कोई लेना-देना नहीं है. यह सिस्टम ही समाप्त हो जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिर्फ पैसे देंगे. इन पैसे का चाहे जिस तरीके से इस्तेमाल हो. इसके बाद हमारी जवाबदेही तो नहीं रहेगी. कानून की व्याख्या का अधिकार तो उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय को दिया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कुलपतियों की नियुक्ति न्यायिक फैसले के तहत नहीं किया गया. इस प्रक्रिया में जिस तरीके से राज्य सरकार से परामर्श होना चाहिए था, वह नहीं हुआ.
उन्होंने कहा कि हमारे कार्यालय में एक पत्र आया था. उसमें कुलपतियों के नाम भेजे गये थे और इस पर सरकार से राय मांगी गयी थी. दो-दो बार पत्र आया. शिक्षा विभाग से सलाह लेकर पहले पत्र का जवाब भी दिया गया. उसमें कहा गया कि कौन कुलपति किस विश्वविद्यालय का है यह लिस्ट में नहीं है. इसके बाद लिस्ट में नामों को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गयी. राज्य सरकार ने विस्तृत जानकारी लेकर भेजा. इसके बाद कुलपतियों का मनोनयन कर दिया गया.
उन्होंने कहा कि परामर्श किसे कहते हैं, यह भी पता नहीं है. कुलपतियों एवं प्रति कुलपतियों की नियुक्ति विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार होनी चाहिए. सभी विश्वविद्यालयों के नियम एक समान नहीं है. अलग-अलग विश्वविद्यालय के लिए अलग-अलग कंसल्टेशन होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तय हो जाना चाहिए कि राज्य सरकार विश्वविद्यालयों को सिर्फ पैसे देगी. उसके बाद किसी भी मामले में हमारी जवाबदेही नहीं होगी. विश्वविद्यालय के पैसों का सदुपयोग हो या दुरुपयोग, सीएजी की आपत्ति पर विचार हो या नहीं, इस पर भी मंथन होना चाहिए.
स्वीकृत पद के अनुसार नियुक्तियां हो रही हैं, उसे भी देखना चाहिए. सिर्फ ग्रांट देने की व्याख्या हो जाये, तो हमलोग कुछ नहीं कहेंगे. ज्ञात हो कि पिछले दिनों राज्य सरकार के परामर्श को दरकिनार करते हुए राज्यपाल देबानंद कुंवर ने राज्य के आठ विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियमित रूप से नियुक्ति कर दी थी. नियुक्ति में छह पुराने नाम शामिल हैं. पिछले वर्ष पटना उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए इन छह कुलपतियों की नियुक्ति को खारिज कर दिया था कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया नियमानुसार नहीं की गई है.
राजभवन से जारी अधिसूचना में इन आठ विश्वविद्यालयों में पटना विश्वविद्यालय में डॉ. शंभूनाथ सिंह, मगध विश्वविद्यालय में डा अरुण कुमार, भीम राव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) में डॉ. कुमारेश प्रसाद सिंह और कामेर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय (दरभंगा) में डॉ. अरविंद कुमार पांडेय को कुलपति नियुक्त किया गया है.
वहीं मधेपुरा स्थित बीएन मंडल विश्वविद्यालय में डॉ. रामविनोद सिन्हा, आरा स्थित वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में डॉ. शिवशंकर सिंह, पटना स्थित मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी विद्यालय में मोहम्मद शम्सु जोहा और छपरा स्थित जेपी विश्वविद्यालय में डॉ. विमल कुमार की कुलपति के पद पर नियुक्त की गई है. आठ कुलपतियों में छह नाम ऐसे हैं, जिनकी नियुक्तियां पटना उच्च न्यायालय ने दिसंबर में रद्द कर दी थी.
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