संसद पर हमले में दोषी अफजल गुरु को फांसी देने पर दारुल उलूम देवबंद ने कहा है कि इस फैसले को मजहबी और सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। देश के कानून ने अपना काम किया है और इस पर कोई दूसरा नजरिया रखना सही नहीं है।
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी इन दिनों देश से बाहर हैं। संस्था के जनसंपर्क अधिकारी अशरफ उस्मानी ने मोहतमिम कासमी की ओर से शनिवार को बयान जारी किया। इसमें कहा है कि आतंक को किसी मजहबी चश्मे से नहीं देखना चाहिए। भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है और अफजल गुरु को फांसी उसके जुर्म के हिसाब से कानून ने दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय गृहमंत्री मंत्री ने हाल ही में जिन दहशतगर्दो की ओर देश का ध्यान दिलाया था, उन्हें भी जल्द कानूनी दायरे में लाया जाएगा।
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