भोपाल में भेल के कस्तूरबा अस्पताल में आज एक बड़े हादसे की वजह से 3 मरीजों की जान चली गई और दर्जन भर ज्यादा घायलों का इलाज चल रहा है। आज शाम इस अस्पताल के महिला वॉर्ड की छत और दीवार भरभरा कर गिर गई। इमारत 47 साल पुरानी है और पास में हो रहे मरम्मत के काम को बिल्डिंग ढहने की वजह बताया जा रहा है।
मरीजों की जान की गारंटी देने का दावा करने वाले भोपाल के इस कस्तूरबा अस्पताल में शुक्रवार की शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब इसका महिला वॉर्ड ढह कर नीचे गिर पड़ा। 26 विस्तर वाले इस वॉर्ड में हादसे के वक्त करीब 20 मरीज और उनके रिश्तेदार मौजूद थे। हादसे के बाद प्रशासन की भी नींद खुली और आनन-फानन में मलबे में दबे लोगों को किसी तरह बचा कर बाहर निकाला गया। इस हादसे में जख्मी 7 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।
कस्तूरबा अस्पताल की देखरेख का जिम्मा BHEL पर है। लेकिन इतने बड़े हादसे के बाद भी BHEL के अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं दिख रहे। फिलहाल महिला वॉर्ड में फंसे सभी मरीजों को निकाल लिया गया है। लेकिन इस हादसे ने अस्पताल प्रशासन के कामकाज के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए गए हैं। आखिर किसकी लापरवाही से इमारत हिस्सा गिरा और मरीजों की जान सांसत में डालने का जिम्मेदार कौन होगा।
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