दिल्ली के विज्ञान भवन सोमवार को मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने की. प्रशासनिक सुधार आयोग की लोक व्यवस्था पर रिपोर्ट पर चर्चा के लिए बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की इस बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्री ग़ैर-हाज़िर रहे. एक जानकारी में कहा गया कि सम्मलेन में सिर्फ सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया.
सम्मेलन में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, असम के तरूण गोगोई, उत्तराखंड के विजय बहुगुणा, त्रिपुरा के माणिक सरकार, अरूणाचल प्रदेश के नबम तूकी, मेघालय के मुकुल संगमा और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो शामिल हुए. गैर कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मसलन पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी, तमिलनाडु की जे जयललिता, उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव, गुजरात के नरेन्द्र मोदी, बिहार के नीतीश कुमार, मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ के रमण सिंह सम्मेलन में शामिल नहीं हुए. और तो और कांग्रेस शासित कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री भी सम्मेलन में नहीं आये. इनमें महाराष्ट्र के पृथ्वीराज चव्हाण, आंध्र प्रदेश के किरन कुमार रेडडी, राजस्थान के अशोक गहलौत, केरल के ओमान चांडी, हरियाणा के भूपिन्दर सिंह हूडडा, मणिपुर के ओ इबोबी सिंह और हिमाचल प्रदेश के वीरभद्र सिंह शामिल हैं. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले पहले तो सम्मेलन में शिरकत की रजामंदी दी थी लेकिन वह नहीं आये.
आम तौर पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होते आये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस बार सम्मेलन में शामिल नहीं हुए. प्रशासनिक सुधारों पर बने मंत्रीसमूह का सदस्य होने के नाते कुछ केन्द्रीय मंत्री अवश्य सम्मेलन में शामिल हुए. बैठक में दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की लोक व्यवस्था पर पांचवी रपट पर चर्चा की गयी.
सम्मेलन में शामिल होने वाले केन्द्रीय मंत्रियों में केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली, दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, भूतल परिवहन मंत्री सी पी जोशी, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश, कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणसामी तथा राज्य मंत्रियों में गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह और मुल्लापल्ली रामचंद्रन शामिल हुए.
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए शिन्दे ने पुलिस सुधार की आवश्यकता जताई. उन्होंने कहा कि पुलिस को कामकाज का बेहतर माहौल प्रदान करने ज़रूरी है. शिन्दे ने कहा कि भारत में लोक व्यवस्था और पुलिस आज चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र (एनसीटीसी) बनाने के मुद्दे पर सम्मेलन में कोई चर्चा नहीं की गयी और न ही आंतरिक सुरक्षा के मसले पर कोई बातचीत हुई. गैर कांग्रेस शासित कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री एनसीटीसी के गठन का कड़ा विरोध कर रहे हैं.
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