विशेष टाडा अदालत ने सोमवार को बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अदालत की बजाय जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने की अनुमति मांगी थी।
दत्त को 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले में अवैध तरीके से हथियार रखने के लिए दोषी ठहराया गया था। दत्त को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 18 अप्रैल को टाडा अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में शस्त्र अधिनियम के तहत उनकी सजा को छह साल से घटाकर पांच साल के कारावास में तब्दील कर दिया था।
अभिनेता पहले ही 18 महीने जेल में बिता चुके हैं और उन्हें साढ़े तीन साल की सजा और काटनी है। दत्त के वकील ने अदालत से जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने की उन्हें स्वतंत्रता देने का मौखिक अनुरोध किया। हालांकि, विशेष टाडा न्यायाधीश जीए सनाप ने प्रार्थना को खारिज करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण में आरोपी की जांच और पहचान जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। अदालत ने तीन अन्य दोषियों मोहम्मद कासम लाजपुरिया, दादा शरीफ पारकर और इसाक हजवानी की प्रार्थना भी खारिज कर दी। इन लोगों ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए आत्मसमर्पण करने के लिए और समय मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने फैसले में पारकर को सुनाई गई 14 साल के कारावास की सजा को बढ़ाकर जीवन पर्यंत कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं, उसने हजवानी (85) की सजा भी बढ़ाकर आजीवन कारावास में तब्दील कर दी थी। पारकर पहले ही 14 साल जेल में बिता चुका है। लाजपुरिया को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। उसे अब भी अपनी सजा पूरी करनी है क्योंकि ज्यादातर समय वह जमानत पर रहा।
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