वर्ष 2010 में हुए जर्मन बेकरी बम विस्फोट मामले में एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मिर्जा हिमायत बेग को आज पुणे की एक अदालत ने हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराया। जर्मन बेकरी में बम विस्फोट की घटना में 17 लोगों की जान गई थी और 60 से अधिक घायल हो गए थे।
सत्र अदालत के न्यायाधीश एन पी धोटे ने बेग को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 435, 474 (जालसाजी), 153 (ए) (धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, भाषा के आधार पर विभिन्न वर्गों में वैमनस्य फैलाना और सांप्रदायिक सदभाव को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अंजाम देना) तथा 120 (बी) (आपराधिक षडयंत्र) के तहत दोषी ठहराया।
बेग महाराष्ट्र के बीड़ जिले का रहने वाला है। उसे गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून और विस्फोटक पदार्थ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया गया है। उसे 18 अप्रैल को सजा सुनाई जाएगी। पुणे स्थित जर्मन बेकरी में 13 फरवरी 2010 को एक शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ] जिसमें 17 लोग मारे गए थे। इनमें पांच विदेशी भी थे। लोकप्रिय रेस्तरां जर्मन बेकरी में अक्सर विदेशी आते थे।
13 फरवरी 2010 का यह हमला पुणे में पहला आतंकी हमला था। साथ ही यह, 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों के बाद पहला बड़ा आतंकी हमला भी था। महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने सितंबर 2010 को पुणे में एक बस स्टैंड से बेग को गिरफ्तार किया था।
एटीएस ने चार दिसंबर 2010 को इस मामले में बेग तथा छह अन्य लोगों जैबुद्दीन अंसारी उर्फ अबू जंदल, फैयाज कागजी, यासिन भत्कल, इकबाल भत्कल, रियाज भत्कल और मोहसिन चौधरी के खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल किया।
अबू जंदल 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों की साजिश रचने और उसे अंजाम देने वाले आकाओं में से एक है। उसे हालांकि इस मामले में गिरफ्तार के तौर पर नहीं दिखाया गया। अन्य आरोपी फरार हैं। लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य डेविड हेडली ने अपने सहयोगी तहव्वुर राणा के खिलाफ अमेरिकी अदालत में सुनवाई के दौरान अपनी गवाही में माना था कि उसने पुणे की लोकप्रिय जर्मन बेकरी की टोह और तस्वीरें ली थीं।
बेग के वकील अब्दुल रहमान ने कहा कि वह फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। फैसले के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा निश्चित रूप से, मैं उच्च न्यायालय में अपील करने जा रहा हूं। मुझै पूरा भरोसा है कि उच्च न्यायालय से मुझे न्याय मिलेगा। रहमान ने कहा कि बेग के साथ न्याय नहीं किया गया है, क्योंकि विस्फोट के समय न तो वह पुणे में था और न ही वह बम रखने के लिए जर्मन बेकरी गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले के मुख्य षडयंत्रकारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और अबू जंदल को भी अदालत नहीं लाया गया जिसका नाम आरोप पत्र में है। रहमान ने कहा पुलिस ने जंदल को मामले में एक षडयंत्रकारी बताया लेकिन उसे अदालत नहीं लाया गया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। षडयंत्र रचने के लिए एक से अधिक लोगों की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा पुलिस का यह आरोप है कि फैयाज कागजी और मोहसिन चौधरी ने श्रीलंका में साजिश रची थी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी पुलिस अधिकारी या जांच अधिकारी यह पता लगाने के लिए श्रीलंका नहीं गया, कि साजिश किस जगह पर रची गई थी।
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