गैर कांग्रेसी सदस्यों का जेपीसी के नए अध्यक्ष के नियुक्ति की मांग. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

गैर कांग्रेसी सदस्यों का जेपीसी के नए अध्यक्ष के नियुक्ति की मांग.




टूजी मामले की जांच कर रही जेपीसी के गैर कांग्रेसी सदस्यों ने पीसी चाको को हटाकर नए अध्यक्ष के नियुक्ति की मांग की. टूजी मामलों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के भाजपा सहित अनेक विपक्षी दलों के 15 सदस्यों ने गुरुवार को समिति के अध्यक्ष पीसी चाको पर अविश्वास जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से उन्हें हटाने और उनकी जगह किसी अन्य सदस्य को नया अध्यक्ष बनाने की मांग की.


समिति में भाजपा, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, जदयू, वाम दलों, तृणमूल कांग्रेस और बीजद के 15 सदस्यों ने मीरा कुमार से मुलाकात कर उनसे चाको को हटाने का आग्रह करते हुए आरोप लगाया कि वह समिति में शुरू से ही अत्यधिक पक्षपातपूर्ण, अनुचित और पूर्वाग्रह वाला रवैया अपना रहे हैं और इसलिए वह इस पद पर बने रहने के काबिल नहीं हैं.

दूसरी तरफ 30 सदस्यीय जेपीसी में कांग्रेस, राकांपा, सपा और बसपा के सदस्य चाको का समर्थन कर रहे हैं. इन 30 सदस्यों में चाको भी शामिल हैं. हालांकि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि टूजी मामले के मुख्य आरोपी ए राजा को जेपीसी के समक्ष बयान देने के लिए बुलाया जाना चाहिए था.

राज्यसभा में भाजपा के उपनेता रविशंकर प्रसाद ने आज संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि जेपीसी के उक्त सभी 15 सदस्यों ने स्पीकर से मिलकर चाको के खिलाफ लिखित में अपना अविश्वास मत जताया है. जेपीसी की मसौदा रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीनचिट दिये जाने के मामले में विपक्ष द्वारा चाको को घेरने की रणनीति के बीच आज समिति की बैठक लोकसभा के एक सदस्य के निधन के कारण स्थगित हो गयी.

चाको ने कहा कि बैठक की नयी तारीख बाद में घोषित की जाएगी. संभावना है कि बैठक अगले सप्ताह ही होगी क्योंकि कुछ सदस्यों ने कल बैठक होने पर इसमें शामिल होने में असुविधा जताई है. चाको के खिलाफ समिति के 15 सदस्यों में से राजग सदस्यों ने और अन्य दलों के सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष को दिये अलग अलग पत्रों में अविश्वास जताया है.

प्रसाद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 100 के तहत दोनों सदनों में मत-विभाजन की स्थिति में समान वोट पड़ने पर लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को वोट डालने का अधिकार होता है लेकिन अनुच्छेद 91 और 96 के अनुसार जब स्पीकर या सभापति के खिलाफ कोई अविास प्रस्ताव हो तो वह कार्यवाही की अध्यक्षता भी नहीं कर सकते और मतदान का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते. उक्त नियमों का हवाला देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि जेपीसी के अध्यक्ष की नियुक्ति चूंकि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा होती है इसलिए निष्पक्षता के मूलभूत सिद्धांत के तहत चाको के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की स्थिति में जेपीसी में मतदान के समय उन्हें वोट डालने का या कार्यवाही की अध्यक्षता का अधिकार नहीं होना चाहिए.

चाको के प्रति अविश्वास जताने वाले सदस्यों का आरोप है कि सच्चाई सामने लाने में वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे. इसके बजाय उन्होंने तथ्यों को छिपाने में समिति का इस्तेमाल किया. प्रसाद ने आरोप लगाया कि समिति के सदस्यों को मसौदा रिपोर्ट वितरित करने से पहले इसे मीडिया को लीक कर दिया गया.

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