शिशु दूध पूरक अधिनियम (आई.एम.एस. एक्ट) संवेदीकरण कार्यशाला में भाग लिया
दतिया। शिशुओं के कुपोषण के नाम पर हो रहे काले कारोबार को रोकने हेतु प्रयासों की श्रंखला में दो वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए किसी भी प्रकार के आहार के प्रयोग को बढावा देने व इसके लिए किसी भी प्रकार के प्रलोभन देने, प्रचार प्रसार करने पर अंकुश लगाने हेतु शिशु पूरक अधिनियम 1992 पर संवेदनशीलता बढ़ाने के साथ ही प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में क्षेत्रीय संस्थान बैंगलुरू में आयोजित संवेदीकरण कार्यशाला में मध्यप्रदेश के 5 सदस्यीय दल एवं दिल्ली, हरियाणा, पांडुचेरी, आन्ध्रा, कर्नाटका, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र राज्यों आदि के सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को आई.एम.एस. एक्ट 1992 (शिशु पूरक अधिनियम 1992) के बारे में विस्तृत जानकारी देने के साथ ही अन्य हस्तक्षेप योग्य जानकारी प्रदान की गई। साथ ही कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, कम्पनियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज कराने एवं जनहित याचिका के पहलुओं पर प्रभावी जानकारी प्रदान की गई। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कोई भी उत्पादक डाक्टरों, नर्सों, संस्थाओं को लाभ देता है। उदाहरण के लिए, सेमिनार, मीटिंग, सम्मेलन, प्रतियोगिता आदि को आयोजित करने के लिए फंड, एजुकेशनल कोर्स की फीस, प्रोजेक्ट, अन्वेशण कार्य को स्पांेंसर, यात्रा और डाक्टरों की मीटिंग को स्पोंसर करता है। ऐसी स्थिति में अधिनियम का उल्लंघन होता है और उस पर वैधानिक कार्यवाही की जा सकती है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के दलप्रमुख वाॅलेन्ट्री एक्शन फाॅर सोशल मोवीलाइजेशन एवं स्वदेश ग्रामोत्थान समिति के संचालक रामजीशरण राय रहे। दल में आर.एस. गौर भिण्ड, कौशल्या गौर शिवपुरी, अजय कुमार राय एवं अशोक शाक्य सम्मिलित थे। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन कराने हेतु मीडिया एवं प्रशासन का सहयोग अपेक्षित है। उक्त जानकारी प्रेस को रामजीशरण राय ने दी।
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