एंप्लॉयमेंट ग्रोथ रेट में कमी. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 21 जून 2013

एंप्लॉयमेंट ग्रोथ रेट में कमी.

यूपीए सरकार के लिए एक और बुरी खबर है।  एम्प्लोयमेंट सर्वे 2009-10 में जॉब क्रिएशन में भारी गिरावट के बाद सरकार ने अपने हाई ग्रोथ रिकॉर्ड को मजबूती देने के लिए 2011-12 में स्पेशल अनएम्प्लोयमेंट सर्वे किया था। हालांकि, इसके डाटा भी निराश करने वाले हैं। इस दौरान इकनॉमिक ग्रोथ में गिरावट के साथ-साथ एम्प्लोयमेंट ग्रोथ रेट में भी कमी आई है। 2009-10 में जहां एंप्लॉयमेंट ग्रोथ रेट 9.3 फीसदी था, वहीं 2011-13 में यह घटकर 6.2 फीसदी हो गया। इतना ही नहीं, इन दोनों सर्वे के दौरान दो साल में देश में बेरोजगारों की संख्या में 10.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे हाल के साल में जॉबलेस ग्रोथ के दावों में ई नजर आती है।

सीएसओ के हालिया डाटा के मुताबिक, 2009-10 में एंप्लॉयमेंट रेट 39.2 फीसदी था। 2011-12 में यह 38.6 फीसदी रह गया। जब यूपीए सरकार ने 2004-05 में पहली बार सत्ता संभाली थी, तब एंप्लॉमेंट रेट 42 फीसदी था। जनवरी 2010 में बेरोजगारों की संख्या 98 लाख थी, वहीं जनवरी 2012 में यह 1 करोड़ 8 लाख हो गई।

इस सर्वे में सिर्फ दो ही पॉजिटिव बातें नजर आती हैं। साल 2009-10 से 2011-12 के दौरान तकरीबन 1.4 करोड़ जॉब बढ़े हैं, जो पिछले 5 साल में मिले जॉब का 5 गुना है। साथ ही, पहली बार कुल वर्कर्स में खेती से जुड़े मजदूरों की संख्या 50 फीसदी से कम हो गई। सर्वे के मुताबिक, कुल वर्कर्स में फार्म सेक्टर की हिस्सेदारी 49 फीसदी है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टरों में क्रमश: 24 और 27 फीसदी वर्कर्स काम करते हैं।

हालांकि, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) में लगातार गिरावट भी चिंता का विषय है। यह वर्किंग एज ग्रुप में रोजगार ढूंढ रहे लोगों की संख्या बताता है। एलएफपीआर 2009-10 में 40 फीसदी था, वहीं 2011-12 में यह घटकर 39.5 फीसदी तक पहुंच गया। इससे साफ संकेत है कि रोजगार के अवसरों में कमी के कारण लोग या तो लंब समय तक पढ़ाई कर रहे हैं या जॉब मार्केट से निकल जाते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में चीफ इकनॉमिक अडवाइजर सौम्या कांति घोष ने बताया, 'जॉब मार्केट को लेकर चिंता है। स्लोडाउन ने एंप्लॉयमेंट पर असर डाला है। हालिया आंकड़ों से यह ट्रेंड और साफ होता है।'

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