अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के लागू होने से सबसे अधिक फायदा बिहार और झारखंड को होगा। यहां की जनता सबसे अधिक पिछड़ी और गरीब है। लिहाजा खाद्य सामग्री भी सबसे अधिक इन्हीं दोनों राज्यों को मिलेगा। अध्यादेश की विशेषता बताई:राष्ट्रीय प्रवक्ता मंगलवार को रांची में प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे। इस मौके पर मंत्री राजेंद्र सिंह, प्रदेश के मीडिया विभाग के शैलेश सिन्हा, लाल किशोर नाथ शाहदेव, अजय राय व महानगर अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मौजूद थे।
67 फीसदी लोगों को फायदा:राय ने कहा कि इस विधेयक से देश के 67 फीसदी आबादी को लाभ होगा। इसमें 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी क्षेत्र के लोग हैं। उन्हें सब्सिडी पर गेहूं, चावल और मोटा अनाज मिलेगा। 180 दिनों में लोगों की पहचान:इस योजना के तहत आने वाले लोगों की पहचान की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, इसमें केंद्र का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। राज्य सरकार 180 दिनों में पहचान करना है। ऐसे परिवारों को हर माह प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज मिलेगा।
अध्यादेश में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्हें कम से कम 6 हजार रुपये मातृत्व लाभ मिलेगा। खाद्य सुरक्षा भत्ता:इस विधेयक का विरोध करने वाले या तो विधेयक को समझ नहीं पाए हैं, या फिर राजनीतिक तौर पर विरोध कर रहे हैं। इसमें राज्य सरकार को कोई खर्च वहन नहीं करना होगा। अगर अनाज की आपूर्ति नहीं हो सकेगी तो खाद्य सुरक्षा भत्ता दिया जाएगा। माल ढुलाई और रखरखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी।
2013-14 में 612.32 टन आनाज खर्च होंगे। इस मद में केंद्र सरकार1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। बाक्स के लिएपहली कैबिनेट में लाया जाएगा मामला: राजेंद्र सिंहराज्य सरकार के मंत्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि सदन में बहुमत हासिल करने के बाद जो पहली कैबिनेट की बैठक होगी उसमें खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को लागू करने संबधित प्रस्ताव को लाया जाएगा। झामुमो, कांग्रेस व राजद ने मिलकर सरकार बनाया है। गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए सरकार कटबिद्ध है।
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