चुनावों में जनता अपराधियों व जातिवादियों को दे शिकस्त : भाकपा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 13 जुलाई 2013

चुनावों में जनता अपराधियों व जातिवादियों को दे शिकस्त : भाकपा

सर्वोच्च न्यायालय ने दो साल तक की सजा पाए सांसदों और विधायकों की सदस्यता समाप्त करने का फैसला बुधवार को सुनाया और गुरुवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने जातिगत रैलियां आयोजित करने पर रोक लगा दी। इन दोनों फैसलों का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने स्वागत किया है। भाकपा का राज्य सचिव मंडल ने दोनों फैसलों को राजनीति के अपराधीकरण और जातिवादी राजनीति पर रोक लगाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया और उन लोगों को बधाई दी जिन्होंने इस संबंध में न्यायालयों में याचिकाएं दाखिल कीं। 


भाकपा के पदाधिकारियों का कहना है कि अब जनता को अपराधियों और जातिवादी तत्वों को चुनावों में शिकस्त देनी चाहिए, वरना ये फैसले भी बेकार ही साबित होंगे। पार्टी के राज्य सचिव मंडल डा. गिरीश कुमार ने कहा, "ये फैसले इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि पिछले कई दशकों से कई राजनीतिक दल अपराधियों और माफियायों को चुनावों में उतार रहे थे और ये अपराधी तत्व अपने धनबल और बाहुबल के बल पर चुनाव जीतने में कामयाब हो जाते थे।"  उन्होंने कहा कि इन फैसलों ने साबित कर दिया है कि राजनीति में अपराधियों और जातिवाद का घालमेल न केवल अनैतिक है, बल्कि असंवैधानिक भी है। 

कोई टिप्पणी नहीं: