मायावती देश की ऐसी पहली नेता बन गई हैं जिन्होंने खुले मंच से देश का प्रधानमंत्री बनने की प्रकट महत्वकांक्षा की है। रविवार को ब्राह्मण सम्मेलन में जुटी भारी भीड़ से उत्साहित बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मंत्रोच्चार, शंख, घंटे, घड़ियाल और नारों के बीच मायावती ने हुंकार भरी।
यूपी में कई महीने से चल रहे ब्राह्मण सम्मेलनों के दौर के समापन मौके पर राजधानी में हुए इस बड़े सम्मेलन में मायावती के भाषण से साफ था कि वे कमजोर पड़ चुके दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को फिर से जिन्दा करके अगला लोकसभा चुनाव में दांव लगाना चाहती हैं, लेकिन उनकी नजर अब अन्य अगड़ी जातियों के वोटों पर भी है।
पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए मायावती ने कहा कि आप सब कोशिश करो तो हम केंद्र की सत्ता का पांच वर्ष में कायापलट कर देंगे। मायावती ने कहा कि सर्वसमाज के निर्माण का मार्ग बनाकर हम जल्द ही दिल्ली की कुर्सी पर काबिज होंगे। हम पांच वर्ष में ही वो काम कर लेंगे जो कांग्रेस तथा बीजेपी बीस-बीस साल में भी नहीं कर सकीं।
इस दौरान मायावती ने बीजेपी नेता एंव गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड में आई त्रासदी में देश के सभी प्रांत के लोग प्रभावित हुए। ऐसे में नरेंद्र मोदी सिर्फ गुजरात के लोगों की राहत में लगे रहे। अपने इस काम से उन्होंने दिखा दिया कि वह गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर ही ठीक हैं बेकार में प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।
वसूली करने वालों की सरकार सपा के नेता पिछली सरकार के कामों की जांच की आड़ में ब्लैकमेलिंग कर बड़े पैमाने पर वसूली कर रहे हैं। विकास के काम ठप हो चुके हैं, गुंडों का राज आ गया है, घर से बहन बेटियों का निकलना मुश्किल है। इस सरकार के ज्यादातर मंत्री विरोधियों की जांच और बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं।
गैरमौजूदगी के लिए सफाई पिछले एसेम्बली चुनाव के बाद से यूपी में लंबी अनुपस्थिति के लिए सफाई देते हुए मायावती ने कहा, मुझे सारे देश में पार्टी का काम देखना है सो दिल्ली में वक्त देना पड़ता है। इसके अलावा बसपा के मूवमेन्ट को गति देने के लिए मुझे हर साल एक किताब लिखनी पड़ती है जिसे मेरे बर्थ डे पर रिलीज किया जाता है।
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