बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए राजधानी में रविवार को होने वाला पार्टी का ब्राह्मण महासम्मेलन कई मायनों में खासा अहम होगा. सूबे के 38 जनपदों में ब्राह्मण सम्मेलनों के आयोजन के बाद प्रदेश स्तर पर होने वाला यह महासम्मेलन बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले की आगे की दिशा तय करेगा. ब्राह्मण वोटों पर टकटकी लगाये बैठे विरोधी पार्टियों को अपनी ताकत दिखाने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने महासम्मेलन की तैयारियों की कमान स्वयं अपने हाथों में ले ली है.
महासम्मलेन से तीन दिन पहले शुक्रवार को राजधानी पहुंची बसपा सुप्रीमो मायावती पूरे दिन 13 माल एवेन्यू स्थित अपने सरकारी आवास में रहीं और पार्टी के जिम्मेदार नेताओं के साथ महासम्मलेन की तैयारियों पर चर्चा की. ब्राह्मणों को फिर से जोड़ने के लिए महासम्मेलन में किन बिन्दुओं को उठाया जाना है, इस पर भी बसपा सुप्रीमो ने पार्टी के तजुर्बेकार नेताओं के साथ मंथन किया. भाजपा की तरफ से नरेन्द्र मोदी को आगे लाने से लोकसभा चुनाव में वोटों के धुव्रीकरण की संभावना और बसपा पर पड़ने वाले असर के बारे में भी पार्टी सुप्रीमो ने विस्तार से मंत्रणा की. ब्राह्मणों को आकर्षित करने के लिए उन बिन्दुओं पर भी चर्चा की, जिन्हे महासम्मेलन में रखा जाना है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक महासम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती इस बात का सीधा संदेश देने का प्रयास करेंगी कि ब्राह्मणों की सुरक्षा और सम्मान बसपा में ही सुरक्षित हैं. इसके लिए बसपा सरकार के उन फैसलों की लम्बी फेहरिस्त तैयार की गयी है, जो ब्राह्मणों के हित में लिये गये. पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बसपा फिर से सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर लौटी है. अपने पिछले राजधानी प्रवास के दौरान सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को आगे बढ़ाने के लिए मायावती ने जहां आपसी भाई-चारा कमेटियों को फिर से अस्तित्व में लाने के निर्देश दिये थे, वहीं जनपद स्तर पर ब्राह्मण सम्मेलनों का लम्बा कार्यक्रम तय किया था. इसके पीछे बसपा सुप्रीमो मायावती प्रदेश की सियासत में सोशल इंजीनियरिंग के उस फार्मूले को फिर से धार देना चाहती थी, जिसके दम पर बसपा ने राज्य में बहुमत की सरकार बनायी थी.

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