चुनाव के दौरान कानूनी हिरासत में रहने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था वाले सर्वोच्च न्यायालय के 10 जुलाई के फैसले ने बिहार के कई नेताओं की नींद हराम कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद सहित कई वरिष्ठ नेता अपने पार्टी नेताओं, परिवार, मित्रों और कानूनी विशेषज्ञों से मशविरा कर इस फैसले का तोड़ निकालने का प्रयास कर रहे हैं। लालू प्रसाद चारा घोटाला मामले में आरोपी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का कहना है कि इस घोटाले से राज्य सरकार के खजाने को 900 करोड़ रुपये का चूना लगा। एक वरिष्ठ राजद नेता ने बताया, "लालू प्रसाद परेशान और घबराए हुए हैं। उन्होंने निजी तौर पर अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं से कहा है कि वे अयोग्य ठहराए जाने के खतरों का सामना कर रहे हैं।"
लालू आज नहीं तो कल झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के चाइबासा कोसागार से फर्जी निकासी से संबंधित आरसी-20 ए/96 में दोषी ठहराए जा सकते हैं। उनके लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अर्जी पर नौ जुलाई को निचली अदालत की प्रक्रिया निलंबित कर दी और उनके आरोप पर सीबीआई से जवाब मांगा है। लालू ने आरोप लगाया है कि उन्हें रांची स्थिति सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश से निष्पक्ष फैसले की उम्मीद नहीं है, सूचना का अधिकार कार्यकर्ता महेंद्र यादव ने कहा, "इस महीने या अगले महीने यदि लालू दोषी करार दिए जाते हैं तो वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का शिकार होने वाले पहले नेता होंगे।"
बिहार में सत्ताधारी जनता दल (युनाइटेड) के सांसद जगदीश शर्मा को सर्वोच्च न्यायाल के फैसले से डर बना हुआ है। शर्मा भी चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद के साथ आरोपी हैं। राजद के नव निर्वाचित सांसद प्रभुनाथ सिंह एक विधायक की हत्या के मामले का सामना कर रहे हैं। बिहार विधानसभा के 243 विधायकों में से 141 विभिन्न आपराधिक मामलों में अदालती सुनवाई का सामना कर रहे हैं।
वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में विधायकों द्वारा दिए गए शपथ पत्र के मुताबिक नेशनल इलेक्शन वाच का कहना है कि 85 विधायक हत्या, हत्या के प्रयास और फिरौती जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। सत्ताधारी जद (यू) के 118 में से कम से कम 43 विधायक गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। गोह के जद (यू) विधायक रणविजय कुमार जेल से चुनाव लड़े और हत्या के आरोप में अभी भी जेल में बंद हैं। वे पांच वर्ष से ज्यादा समय जेल में गुजार चुके हैं। भाजपा के 91 में से 29 विधायक विभिन्न आरोपों में अदालती सुनवाई का सामना कर रहे हैं।

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