उत्तराखंड हादसे के मद्देनजर एक बात खास तौर पर यह सामने आई है कि अगर बचाव के काम में अहम भूमिका निभाने वाली भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के पास अपने हेलिकॉप्टर होते तो जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सकता था। आईटीबीपी ही वह केंद्रीय बल है जो हादसे के बाद लोगों की मदद के लिए सबसे पहले पहुंची थी।
आईटीबीपी के सूत्रों के मुताबिक, उसकी तरफ से पिछले डेढ़ दशक से गृह मंत्रालय से हेलिकॉप्टर दिए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक यह प्रस्ताव फाइलों में ही लटका हुआ है। इतना जरूर है कि पिछले साल गृह मंत्रालय ने जरूरत के हिसाब से हेलिकॉप्टर किराए पर लेने की अनुमति दी थी। लेकिन निजी क्षेत्र में उस तरह के हेलिकॉप्टर किराए पर उपलब्ध नहीं हैं जिस तरह के हेलिकॉप्टरों की जरूरत बल को है।
सूत्रों का कहना है कि आईटीबीपी को सेना जैसे ही बड़े हेलिकॉप्टर चाहिए क्योंकि उसकी चौकियां 18 हजार फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर स्थित हैं। प्राइवेट कंपनियों के पास जो हेलिकॉप्टर किराए के लिए उपलब्ध हैं, उनकी क्षमता इतनी ऊंचाई तक उड़ान भरने की नहीं है। गौरतलब है कि भारत-चीन की 3488 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा का जिम्मा इसी बल पर है। यह सीमा देश की अन्य सीमाओं से सबसे ज्यादा दुर्गम और चुनौतीपूर्ण है।
आईटीबीपी के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, बल को हेलिकॉप्टर नहीं होने का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उसकी चौकियां दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ऊंची चोटियों पर स्थित हैं। एक-चौथाई चौकियों पर तो राशन आदि हवाई जहाज के जरिए ही पहुंचाया जाता है। लेकिन बाकी चौकियों पर जवान या तो खुद अपनी पीठ पर लादकर ले जाते हैं या फिर खच्चरों का सहारा लिया जाता है। इन चौकियां पर पहुंचने के लिए जवानों को कई-कई दिनों तक पहाड़ों पर चढ़ना होता है। अधिकारी ने कहा कि फिलहाल सिर्फ जवानों की बीमारी की स्थिति में ही हेलिकॉप्टर की सुविधा मुहैया कराई जाती है। इसके लिए भी दिल्ली से मंजूरी लेनी पड़ती है। कई बार तो इस सुविधा का फायदा मिलने में इतनी देर हो जाती है कि जवान बिना इलाज दम तोड़ देते हैं।
इस वक्त सिर्फ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पास ही अपने विमान हैं। गृह मंत्रालय भी इन्हीं का इस्तेमाल करता है। जब पी. चिदंबरम गृहमंत्री थे तो उन्होंने कहा था कि गृह मंत्रालय अपनी अलग एयर विंग बनाएगा। इसके लिए उन्होंने नए हेलिकॉप्टर और विमान खरीदने की भी बात कही थी, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई फैसला नहीं हो पाया है।
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