भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज की कड़ी निन्दा की - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज की कड़ी निन्दा की

आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि आज अपनी  मांगों को लेकर राजधानी पटना में छात्र आन्दोलन कर रहे थे। छात्रों की मांग थी कि छात्र-प्रतिनिधि मंडल को राज्यपाल या मुख्यमंत्री से मिलवाया जाय ताकि छात्रांे की मांगों पर राज्यपाल या मुख्यमंत्री से बातचीत हो सके।  लेकिन अधिकारियों ने छात्रों की इस मांग को ठुकरा दिया तब लगभग दो हजार छात्र एआईएसएफ के बैनर तले डाकबंगला चैराहे पर बैठ गये। अचानक डाकबंगला चैराहे पर सीटी एसपी के नेतृत्व में लगभग दौ सौ  लाठीधारी पुलिस वाले पहुँच गये और छात्रांे पर लाठी वरसाने लगे। पुलिस की अंधाधुंध लाठीचार्ज में एक सौ से ज्यादा छात्र-छात्राओं को चोटें आयीं। इसमें कुछ गंभीर रूप से धालय हो गये। इन धायलों में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ महासचिव अंशु कुमारी, प्रिंस कुमार, निखिल कुमार झा, अभिषेक आनंद, आकाश गौरव, पीयूष रंजन झा, उज्जवल कुमार आदि शामिल हैं।

राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि बिना किसी उसकावे के पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज की। यह निन्दनीय है। बिहार की पुलिस बेलगाम हो गई है। समाज का कोई भी हिस्सा जब अपनी मांगों को लेकर अपनी आवाज उठाता है तो राज्य सरकार पुलिस बल से उस आवाज को दबाना चाहती है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यन्त खतरनाक सरकारी नीति है।

छात्रों की मुख्य मांगे थी कि आईबीपीएस परीक्षा में स्नातक के सभी खंड़ो में 60 प्रतिशत अंक लाने की अहर्ता खत्म की जाय, अधिकतम उम्रसीमा पूर्व की भांति 30 वर्ष की जाय और आवेदन शुल्क में की गयी वृद्धि वापस ली जाय। ये ऐसी मांगें है जिनको लेकर सरकार को दमनात्क कार्रवई करने की आवश्यकता नहीं थी।             

कोई टिप्पणी नहीं: