घरेलू प्रोद्यौगिकी बाजार के विकास को बढ़ावा देने के लिए अगले साल त्रिपुरा में 128 करोड़ रुपये की लागत से भारतीय सूचना प्रोद्यौगिकी संस्थान (आईआईआईटी) की स्थापना की जाएगी। एक अधिकारी ने यह जानकारी शुक्रवार को दी। अगरतला से 25 किलोमीटर उत्तर बोधजंगनगर में आईआईआईटी बनाया जाएगा। बोधजंगनगर पूर्वोत्तर क्षेत्र के बड़े उद्योग केंद्रों में से एक है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र का पहला प्रौद्योगिकी संस्थान होगा और शैक्षणिक वर्ष 2014-15 से इसका कार्य आरंभ हो जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव किशोर अंबुली ने संवाददाताओं को बताया, "ओएनजीसी (ऑइल एंड नैचुरल गैस कारपोरेशन) और एनईईपीसीओ (नॉदर्न ईस्ट इलेक्ट्रिक पॉवर कारपोरेशन) तथा पश्चिम बंगाल के एक निजी औद्योगिक घराने ने त्रिपुरा आईआईआईटी में साझेदारी करने की इच्छा व्यक्त की है।" किशोर ने बताया, "128 करोड़ रुपये में से मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी)119 करोड़ रुपये देगा और बाकी की राशि ओएनजीसी तथा एनईईपीसीओ और निजी संगठन द्वारा दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संस्थान के लिए 50 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले साल त्रिपुरा के अलावा असम और राजस्थान में आईआईआईटी खोलने की स्वीकृति दी थी। अधिकारी ने बताया, "मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश में ऐसी 20 आईआईआईटी बनाने की योजना बनाई थी जिनमें निजी साझेदारी हो और जिनका उद्देश्य लाभ प्राप्त करना न हो।" अब तक 11 राज्य सरकारें आईआईटी के लिए भूमि निर्धारित कर चुकी हैं और औद्योगिक साझेदार निर्धारित करने की प्रक्रिया में हैं।
इस समय देश में इलाहाबाद, ग्वालियर, जबलपुर और कांचीपुरम में चार आईआईआईटी हैं। ये सभी संस्थान तकनीकी शिक्षा में स्नातक और परास्नातक करवाते हैं। प्रोद्यौगिकी संस्थान स्थापित करने का प्रमुख उद्देश्य शिक्षा का एक प्रारूप तैयार करना है जो सूचना प्रोद्यौगिकी में उच्च श्रेणी के मानव संसाधन बना सके और अनेक कार्यक्षेत्रों में सूचना प्रोद्यौगिकी के बहुआयामी पहलुओं का उपयोग हो सके।

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