कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लोगों को हिंदुत्व के नाम पर ठगने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह भी हिंदू हैं और 'सभी धर्मो का आदर करते हैं।' अपने ब्लॉग में सिंह ने कहा है कि 'सोशल मीडिया पर संघियों और मोदी के पैसे पर मणिपुर के संस्कार धाम से अहमदाबाद के समीप साणंद तक सक्रिय पेशेवरों की गाली खाने वाले वे संभवत: सबसे दुर्लभ व्यक्ति हैं।'
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले कांग्रेस नेता ने कहा, "मुझे 'डॉग्विजय सिंह और कभी-कभी पिग्विजय सिंह' कहा जाता है। यह काम संभवत: उस गिरोह के द्वारा किया जाता है जिसमें शायद मेरे पोते से भी कम उम्र के लोग होंगे।" दिग्विजय सिंह ने कहा कि 'संघी' उनके लिए कहा जाता है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित होते हैं। ऐसे लोग उनके बारे में इस्लाम और ईसाई धर्म अपना लेने का 'दुष्प्रचार' करते रहते हैं और इसके लिए वे उन लोगों के उस 'संस्कार को दोषी ठहराते हैं जो उन्होंने संस्कार धाम या संघ की शाखाओं में ग्रहण किया है।'
दिग्विजय ने लिखा है, "मैं हिंदू हूं।" इसके आगे उन्होंने बताया है कि उन्होंने द्वारका के जगदगुरु शंकराचार्य और जोशी मठ से 1983 में दीक्षा ली थी। उन्होंने लिखा है कि वे नियमित रूप से रोज आधा घंटा पूजा-प्रार्थना करते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्य प्रदेश के गुना जिले के राघोगढ़ स्थित उनके घर पर नौ मंदिर हैं जहां रोज पूजा होती है। उन्होंने आगे कहा कि वे उस न्यास के अध्यक्ष हैं जो 'वेद पाठशाला' संचालित करता है जहां 80 से अधिक छात्र नि:शुल्क वेद अध्ययन करते हैं।
दिग्विजय ने कहा कि वे हिंदू मास के अनुसार हर एकादशी को उपवास रखने के अलावा अन्य परंपराओं का भी पालन करते हैं। उन्होंने कहा, "फिर भी संघ और भाजपा और उनका ब्रिगेड मुझे हिंदू विरोधी कहता है!" कांग्रेस नेता ने कहा, "संघ ब्रिगेड के विपरीत एक अच्छा हिंदू हमेशा सभी धर्मो का पालन करने वाला होता है।"
दिग्विजय सिंह ने कहा, "द्वारका के शंकराचार्य हिंदुत्व के अर्थ की व्याख्या करने में असमर्थ रहे। मेरा मानना है कि इसका सबसे पहले वीर सावरकर जो धुर आर्य समाजी और सनातन धर्म के प्रबल विरोधी थे, ने किया था।" उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनकी कही बातों के संदर्भ में तथ्यों की जांच करनी हो वह उनके घर पर आ सकता है।

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