देश में कई पीढ़ियों तक दूरदराज से अच्छे बुरे संदेश को शीघ्रातिशीघ्र भेजने का मुख्य माध्यम रही 163 साल पुरानी तार सेवा ने अब इतिहास के पन्नों में सिमट गई है। राजधानी में तार सेवा आखिरी क्षणों को यादगार बनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने रविवार को कतारों में खड़े होकर अपने प्रियजनों को तार भेजे।
एक समय लाखों लोगों के लिए संदेश पहुंचाने का सबसे तीव्र जरिया तार को अंतिम विदाई देने के साथ अंतिम टेलीग्राम को संग्राहल में रखे जाने का भी वादा किया गया। हाल के वर्षों में इस सेवा को लगभग भुला दिया गया था, पर इसके आखिरी दिन राजधानी में टेलीग्राफ सेंटर पर बड़ी संख्या में लोग अपने प्रियजनों को तार के जरिये संदेश देने के इरादे से एकत्रित हुए। इनमें खासकर एंड्रायड फोन पर मल्टी मीडिया संदेश भेजन की शौकीन युवा पीढी के प्रतिनिधि भी थे।
खास बात ये रही कि इस सेवा के बंद होने से ठीक पहले अंतिम तार कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के नाम भेजा गया। रविवार आधी रात से ठीक 15 मिनट पहले आखिरी तार के जरिये कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को संदेश भेजा गया। टेलीग्राम का काउंटर रात 11:45 बजे बंद हुआ और 68,837 रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। इस तार में राहुल गांधी से इस सेवा को बंद ना करने की अपील की गई। राहुल के अलावा तार सेवा बंद होने से पहले संचार मंत्री कपिल सिब्बल, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी तार भेजकर सेवा बंद न करने की गुहार लगाई गई।
पेशे से वकील आनंद साथियासीलन ने कहा कि यह पहला मौका है, जब मैं टेलीग्राम भेज रहा हूं, यह संदेश मैंने अपने 96 साल के दादा जी को भेजा है, जो त्रिची के समीप एक गांव में रहते हैं। रीयल एस्टेट कंपनी में प्रबंधक विकास अरविंद ने कहा कि वह बेरली में रह रहे अपने माता-पिता को बाधाई संदेश भेज रहे हैं। अरविंद ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वे इसे एक खूबसूरत याद के रूप में संजो कर रखेंगे। भारत में तार सेवा सबसे पहले प्रायोगिक तौर पर 1850 में कोलकाता तथा डायमंड हार्बर के बीच शुरू की गई थी। शुरू में इसका उपयोग ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने किया। 1854 में सेवा लोगों के लिए उपलब्ध हुई। उन दिनों यह सूचनाएं भेजने का सबसे अहम जरिया था।
देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकूमत की संचार सेवा को बाधित करने के लिए तार लाइन को काटने का तरीका अपना था। फोन, मोबाइल, एसएमएस और इंटरनेट क्रांति के साथ इस तार सेवा का महत्व खत्म हो गया।सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने आय में भारी गिरावट और नुकसान के कारण तार सेवा को बंद करने का निर्णय किया है। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंद निदेशक आरके उपाध्याय ने कहा कि तार सेवा के लिए रविवार अंतिम दिन था।
तार सेवा के ऑपरेटरों के लिए आज का दिन पुरानी यादों के अचनक हरा होने का दिन था। चार दशकों तक सरकारी सेवा में रहने वाले वरिष्ठ तार परिचालक और 1997 में सेवानिवृत्त हो चुके गुलशन राय विज तार के सुनहरे युग के दौरान अपने अनुभव को याद करते हैं। विज ने कहा कि तार लड़ाई और दुर्घटना में मौतों की बुरी खबर लाने के लिए कुख्यात था। आज इस खुद इस सेवा की समाप्ति खबर बन रही है। हमने उस दौरान काम किया, जब इसकी काफी मांग थी। नई प्रौद्योगिकी ने पुरानी प्रौद्योगिकी का स्थान लिया, लेकिन तार ने हमें दो वक्त की रोटी दी, हमें पहचान दी। इसीलिए अब इस सेवा के खत्म होने की खबर से हम उदास हैं।
वर्ष 1959 में सरकारी सेवा में आए 73 वर्षीय विज कहते हैं, 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध तथा 1975-77 में आपातकाल के दौरान संदेश भेजने के लिए उनका काम हमेशा जारी रहता था। वह अपने काम में कभी भी भावनाओं को हावी नहीं होने दिया।
विज ने कहा कि 1971 में जब भारत-पाकिस्तान का युद्ध शुरू हुआ, वह रोहतक में तैनात थे। बिना खाना-पानी के चिंता के वह 24 घंटे काम करते रहे। रक्षा मुख्यालय से युद्ध में मरने वालों के बारे में संदेश आते थे और हम जितनी जल्दी हो सके उस खबर को गंतव्य तक भेजने में लगे रहते थे।

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