सीएजी शशिकांत शर्मा की नियुक्ति के खिलाफ दायर की गई अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. दो महीने पहले, विनोद राय के रिटायर होने के बाद पूर्व रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा को सीएजी बनाया गया था.
कुछ रिटायर्ड अधिकारियों ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एन गोपालस्वामी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल आर एच ताहिलियानी और एडमिरल एल रामदास के अलावा पूर्व डिप्टी सीएजी बी पी माथुर ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए अर्जी लगाई थी कि शर्मा की नियुक्ति पक्षपात के साथ की गई और उसमें पारदर्शिता की कमी रही.
अर्जी खारिज होने से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है. दो साल पहले पीजे थॉमस को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) बनाए जाने को लेकर सरकार को बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी. उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पद से हटाना पड़ा था. अर्जी देने वाले अधिकारियों का कहना था कि शशिकांत शर्मा के सीएजी रहेंगे तो हितों का टकराव पैदा हो सकता है. क्योंकि अगर वह उन रक्षा सौदों की जांच करेंगे जो उनके महानिदेशक (अधिग्रहण) या रक्षा सचिव रहने के दौरान हुए थे, तो उनका रवैया कैसा होगा? रक्षा मंत्रालय में शर्मा के कार्यकाल के दौरान कई बड़े सौदे हुए थे, जिनमें इटैलियन कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर जैसे सौदे भी शामिल हैं, जिसके घूसकांड को लेकर खूब हंगामा मचा.
अर्जी देने वाले अधिकारियों का कहना था कि सरकार को सीएजी की नियुक्ति के लिए एक उचित और पारदर्शी प्रक्रिया बनाने की जरूरत है. ऐसी बड़ी नियुक्तियों के लिए किसी तरह के कॉलेजियम का इंतजाम नहीं है जैसा सीवीसी के मामले में होता है, जिसका चुनाव प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री मिलकर करते हैं.
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें