टीएचआर का वितरण सम्पन्न, जन प्रतिनिधि करते हैं भयादोहन
नरकटियागंज, प्रखण्ड स्थित आईसीडीएस कार्यालय में स्थायी सीडीपीओ की नियुक्ति नहीं होने के कारण समेकित बाल विकास परियोजना कार्य प्रभावित होता दिख रहा है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न केन्द्रों केा समय पर पोषाहार नहीं मिलने के कारण नरकटियागंज में 15 जुलाई के बदले 30 जुलाई 13 को टीएचआर सम्पन्न हुआ। महिला पर्यवेक्षिकाएँ बताती है कि बैंक की उदासीनता के कारण ऐसा हुआ। विगत दिनो अनुमण्डल पदाधिकारी विजय कुमार पाण्डेय और प्रभारी सीडीपीओ सह प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बासुदेव बैठा निराला के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ की एक बैठक सम्पन्न हुई। उक्त बैठक में अनुमण्डल पदाधिकारी ने कहा कि सभी सेविका नियमानुसार कार्य सम्पादन करे। उन्हें किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। उधर सेविकाओ का कहना है, पोषाहार का वितरण पंचायत के हवाले कर दिया जाए। क्यांेकि जनप्रतिनिधि और अधिकारी सिर्फ पोषाहार को लेकर आंगनबाड़ी सेविकाओं का भयादोहन करते हैं। सेविकाओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रभारी अधिकारी पहले अपने कार्य का निपटारा करते है, उसके बाद प्रभार वाले विभाग का कार्य सम्पादित करते हैं। जिसको लेकर सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ पिछड़ जा रहीं हैं। नगर परिषद की महिला पर्यवेक्षिका गीता कुमारी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में आज हुए टीएचआर के संबंध में कही से कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि फिलहाल नयी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है, बावजूद इसके सरकार की योजनाओं पर सख्ती से अमल किया जा रहा है।
मिल प्रबंधन की हिटलरशाही से मंदिर निर्माण कार्य ठप्प
नरकटियागंज, स्थानीय शहर स्थित न्युुु स्वदेशी सुगर मिल्स के प्रबंधन की बेरूखी से नरकटियागंज की आम जनता काफी क्षुब्ध है। उल्लेखनीय है कि चीनी मिल प्रबंधन की हिटलरशाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भागवत चैबे की जमीन पर अंचल अधिकारी के आदेश के बावजूद मिल प्रबंधन अपना दावा छोड़ता नहीं दिख रहा है। गौरतलब है कि भागवत चैबे की जमीन खतियानी है, उक्त जमीन पर चीनी मिल अपना दावा कर रहा है। इतना ही नहीं अयोध्या में मंदिर निर्माण की बात करने वाली एक पार्टी के लोग भागवत चैबे के द्वारा निर्माण कराये जा रहे मंदिर के कार्य को रोके जाने के बाद एक बार भी मिल प्रबंधन के विरूद्ध आन्दोलन नहीं किया! शिकारपुर थानाध्यक्ष रामनरेश पासवान और अंचलाधिकारी अवध किशोर ठाकुर के स्थल निरिक्षण के उपरान्त भागवत चैबे को आश्वासन मिला कि अब उनकी जमीन खाली करा दी जाएगी अलबत्ता प्रशासन के चले जाने के बाद फिर वही कहानी दुहराई जा रही है। गरीब ब्राह्मण दर दर की ठोकरे खाने को विवश है।
(अवधेश कुमार शर्मा)

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