नेशनल कान्फ्रेंस नहीं बनेगी राजग का हिस्सा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 8 जुलाई 2013

नेशनल कान्फ्रेंस नहीं बनेगी राजग का हिस्सा.

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी कभी भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी. लोकसभा में तीन और राज्यसभा में दो सांसदों वाली नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर को ऐसी कोई स्थिति दिखाई नहीं देती जिसमें भविष्य में उनकी पार्टी भाजपा के साथ ‘किसी तरह का गठजोड़’ करेगी . 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी के पास केवल दो विकल्प हैं. संप्रग और ‘पूर्व में हम संयुक्त मोर्चा का हिस्सा रहे हैं जो क्षेत्रीय दलों का गठबंधन था.’ उन्होंने कहा कि राजग कोई विकल्प नहीं है. यह पूछे जाने पर कि क्या नेशनल कान्फ्रेंस भविष्य में राजग का हिस्सा बनेगी, वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री रहे उमर ने कहा, उत्तर है कभी नहीं.

राजग में भाजपा के साथ नेशनल कान्फ्रेंस के पूर्व के गठबंधन के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा कि नेशनल कान्फ्रेंस के संबंध भाजपा और नेशनल कान्फ्रेंस के बीच के नहीं थे.यह मुख्य रूप से नेशनल कान्फ्रेंस और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच थे. क्योंकि उन्हें एक करने वाली शक्ति के रूप में देखा गया जो लोगों को साथ लेकर आए, जिन्होंने राष्ट्र हित में क्षेत्रीय मुद्दों को दरकिनार रखा, जिन्होंने असल में राज्य की समस्याओं को देखा और उनका समाधान करना चाहा.

उन्होंने उल्लेख किया कि कश्मीर को शेष देश से जोड़ने वाली रेल लाइन परियोजना इंदिरा गांधी का सपना थी. जिसे वाजपेयी ने पूरा किया जब उन्होंने रेलवे परियोजना को अत्यंत महत्व की राष्ट्रीय परियोजना के रूप में घोषित किया .

उमर ने कहा, मुझे ऐसी स्थिति दिखाई नहीं देती, खासकर भाजपा के वर्तमान नेतृत्व में और भाजपा के भविष्य के नेतृत्व को देखकर भी नेशनल कान्फ्रेंस के उनके साथ किसी तरह के गठबंधन में प्रवेश करने की कोई स्थिति नहीं दिखायी देती. यह पूछे जाने पर कि क्या नेशनल कान्फ्रेंस तीसरे मोर्चे का हिस्सा बनेगी, उन्होंने कहा, नहीं, हम संप्रग का हिस्सा हैं और हम संप्रग के अनिश्चित सहयोगियों की तरह नहीं हैं. हम समाजवादी पार्टी या बसपा की तरह नहीं हैं जो संप्रग का हिस्सा होकर भी हिस्सा नहीं हैं. जो एक वर्षगांठ के रात्रिभोज पर आते हैं और दूसरी वर्षगांठ के रात्रिभोज के लिए नहीं आते.

गठबंधन राजनीति के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उमर ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और कहा, ‘कल्पना कीजिए, गुजरात के मुख्यमंत्री दिल्ली में खुद को एक गठबंधन का नेतृत्व करने वाले के रूप में पाएं, आप सोचते हैं कि वह आसानी से प्रबंधन कर लेंगे.’

उमर ने मुस्कुराते हुए कहा, मुझे लगता है कि उन्हें बहुत जूझना पड़ेगा और बहुत अधिक जूझना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने गुजरात में जिस तरह कानून का उपयोग किया, ऐसा वह केंद्र में पहुंचने पर नहीं कर पाएंगे. हालांकि, मुझे नहीं लगता कि वह वहां पहुंचेंगे और मैं आपके लिए केवल काल्पनिक तस्वीर पेश कर रहा हूं.

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने से संबंधित बयान के लिए भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी पर हमला बोलते हुए उमर ने कहा कि वे केवल किसी लोकसभा चुनाव से पहले ही इस मुद्दे को उठाते हैं .

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 चुनावों से पहले उनके लिए मुद्दा हो जाता है और जब गठबंधन बनाए रखने की बात आती है तो वे इसे आसानी से भूल जाते हैं. मामले में तथ्य यह है कि भाजपा ने अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए उस समय कोई प्रयास नहीं किया जब वह 1998 से 2004 तक सत्ता में थी . उमर ने कहा कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो भाजपा तीन मुद्दों को उछालने लगती है..समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 370 और अंतत: राम मंदिर का मुद्दा. उन्होंने कहा, मैं आपको गारंटी दे सकता हूं, 2014 के संसदीय चुनावों के बाद जब भाजपा सहयोगियों को बनाए रखने की कोशिश करेगी तो वे सत्ता की खातिर एक बार फिर इन मुद्दों को आसानी से भूल जाएंगे.

संप्रग की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, ‘‘इस समय मैं सोचता हूं कि हमारी सभी कठिनाइयों के बावजूद चीजें संप्रग के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अब भी मानना है कि हालात संप्रग के पक्ष में हैं . हम एक बात पर सहमत हैं कि यह राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि गठबंधनों की लड़ाई है. संप्रग पहले ही गठबंधन की लड़ाई जीत चुका है क्योंकि राजग के पास ऐसा कोई सहयोगी नहीं है.’’

उमर ने कहा कि राजग तीन पार्टियों के समूह तक सिमट गया है . इस समय कोई भी उनके साथ नहीं जाना चाहता. मनोवैज्ञानिक लड़ाई संप्रग ने जीत ली है और अब हमें चुनावी लड़ाई जीतनी है.

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