सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अब कोई भी नेता जेल से चुनाव नहीं लड़ सकेगा। किसी कोर्ट में दोषी करार दिए जाने वाले जनप्रतिनिधियों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी सदस्यता उसी क्षण से खत्म मानी जाएगी जिस क्षण कोई अदालत उन्हें किसी मामले में दोषी करार देगी।
किसी आपराधिक मामले में दोषी करार दिए जाने की स्थिति में सांसदों और विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के खिलाफ उन्हें मिली सुरक्षा के बारे में कानूनी प्रावधान को स्पष्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश नए मामलों पर ही लागू होगा। यानी अब ट्रायल कोर्ट में भी दोषी करार दिए जाने पर सांसदों या विधायकों को सदस्यता छोड़नी पड़ेगी और कोई नेता जेल से चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर कई नेताओं पर हो सकता है। पूर्व रेल मंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव इसके पहले शिकार हो सकते हैं। चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में लालू के खिलाफ अदालत का फैसला जल्द ही आने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव के भी आसार बन गए हैं। नेता एक मत से संसद के जरिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निरस्त कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि न्यायपालिका को यह कदम आजादी मिलने के बाद ही उठा लेना चाहिए था।
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