दिल्ली की एक अदालत ने 10 करोड़ रुपये के रेल घूस कांड मामले में शुक्रवार को पूर्व रेलमंत्री पवन कुमार बंसल के भांजे विजय सिंगला, निलंबित रेलवे बोर्ड सदस्य महेश कुमार और पांच अन्य की जमानत याचिका खारिज कर दी।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने सात आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्हें मई में गिरफ्तार किया गया था। इन सभी को 19 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
सिंगला के अतिरिक्त अदालत ने तत्कालीन रेलवे बोर्ड के सदस्य, स्टाफ, महेश कुमार, बेंगलूर स्थित जी जी ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नारायण राव मंजूनाथ, कथित बिचौलिया संदीप गोयल, राहुल यादव, समीर संधीर और सुशील डागा की जमानत याचिका खारिज की।
दिन में अदालत ने आरोपी एम वी मुरली कृष्ण और सी वी वेणुगोपाल की जमानत याचिका पर दलीलें सुनने कहा कि इन पर 15 जुलाई को आदेश सुनाया जायेगा। इन दोनों के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया था लेकिन जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था। उन्हें दो जुलाई को दायर आरोप पत्र में आरोपी बनाया गया था। कथित बिचौलिया अजय गर्ग को 8 जुलाई को अदालत ने जमानत दी थी। गर्ग ने कुमार के लिए अनुकूल पद हासिल करने के लिए रिश्वत की रकम निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सभी 10 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी के तहत आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है।
अदालत ने चार जुलाई को सीबीआई के आरोप पत्र का संज्ञान लिया था। इसमें एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सिंगला ने रेलवे बोर्ड में सदस्य, इलेक्ट्रिकल, नियुक्त करवाने के लिए कुमार से 10 करोड़ रुपये के रिश्वत की मांग की और आरोपियों के बीच यह तय हुआ था कि नियुक्ति से पहले पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा और शेष रकम का भुगतान काम हो जाने के बाद किया जाएगा। सिंगला को पहले हिस्से के रूप में 89.68 लाख रुपये दिए गए थे। धन स्वीकार करने के दौरान चंडीगढ़ में सिंगला को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद पवन कुमार बंसल को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा था।

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