सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से राजनीतिक पार्टियां घबराईं - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 13 जुलाई 2013

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से राजनीतिक पार्टियां घबराईं

दोषी ठहराए गए या जेल में बंद नेताओं के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के प्रभावशाली फैसलों से जहां राजनीति को अपराधियों के चंगुल से मुक्ति के लिए संघर्ष करने वाले खुशी मना रहे हैं, वहीं राजनीतिक दलों के लिए ये फैसले दिल बैठाने वाले साबित हो रहे हैं। हालांकि पार्टियां खुले रूप में इसका इजहार नहीं कर रहीं।  पार्टियों ने हालांकि इसके कुछ कानूनी प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका जाहिर की है, लेकिन देश की जनता का रुख भांपते हुए अदात के फैसलों की सराहना की है।

चुनावी प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के बुधवार के फैसले से प्रत्याशियों के चयन में राजनीतिक दलों की सतर्कता बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा इन फैसलों से चुनावी पद्धति में सुधार की दरकार पर पुरानी बहस को भी बल मिला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार को शीर्ष अदालत के आदेशों को ध्यान में रखते हुए चुनाव सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

नकवी ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और विभिन्न आयोग की रपटों की रोशनी में चुनाव सुधार की दिशा में कदम बढ़ाना ही सरकार के लिए सबसे बेहतर रहेगा।" उन्होंने कहा कि चुनावी पद्धति को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में उठाए गए किसी भी कदम का भाजपा स्वागत करेगी, लेकिन न्यायालय के फैसले के कुछ हिस्से से व्यावहारिक कठिनाइयां भी पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के दुरुपयोग की आशंका है, जिसमें कहा गया है कि जेल में बंद या पुलिस हिरासत में रहने वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। नकवी ने दलील दी, "भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इस तरह के प्रावधान का दुरुपयोग हो सकता है। यह प्रावधान आम आदमी के हित में समय-समय पर राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शनों में रुकावट पैदा कर सकती है।" 

कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले का लक्ष्य राजनीतिक कार्यक्षेत्र को साफ करना है। उन्होंने कहा, "लेकिन सरकार और अदालत यह सुनिश्चित करे कि इसका दुरुपयोग नहीं होगा।" मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने जेल से या पुलिस हिरासत से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध को सही नहीं माना है और कहा है कि पुनर्विचार के जरिए फैसले की व्याख्या की जरूरत है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मोहन सिंह ने कहा कि दोषी व्यक्ति के निर्वाचित प्रतिनिधि बनने पर प्रतिबंध जायज है, लेकिन न्यायालय के उस फैसले पर और स्पष्टीकरण की जरूरत है, जिसमें जेल में बंद और पुलिस हिरासत से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि अदालत के फैसले सराहनीय हैं, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इस बात की आशंका है कि निहित स्वार्थो के तहत इनका दुरुपयोग हो सकता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रह चुके अश्विनी के. राय ने कहा कि दोनों फैसले "अत्यंत प्रभावशाली और अत्यंत वांछनीय हैं। निश्चित तौर पर इससे राजनीति के अपराधीकरण पर लगाम लगेगा।"

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