उत्तराखंड की विस्तृत खबर (10 जुलाई ) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 10 जुलाई 2013

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (10 जुलाई )

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में 26 दिन बाद भी नहीं हो सका यातायात शुरू

देहरादून, 10 जुलाई। 16-17 जून को केदारनाथ में आई विनाशकारी आपदा ने जहां हजारों लोगों के जीवन को लील लिया, वहीं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस राज्य की तमाम राजनैतिक और प्रशासनिक अक्षमताओं की पोल खोलकर रख दी है। तिब्बत, चीन और नेपाल की सीमा से लगे इस राज्य का अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र होने के चलते और भी महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में 26 दिन तक राज्य से भारत-चीन की सीमाओं तक जोड़ने वाले मार्गों का बंद रहना अपने आप में प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार की क्षमताओं पर सवालिया निशान लगाता है। उल्लेखनीय है कि बीते दिन ही चीन ने लद्दाख क्षेत्र के चुमार इलाके में भारतीय पोस्ट पर घुसकर वहां लगे सिक्योरिटी कैमरों को तोड़ा ही नहीं बल्कि भारतीय सेना द्वारा बनाए गए, कुछ अस्थाई ढांचों को भी गिरा दिया। इतना ही नहीं चीनी फौज वहां लगे कैमरों के तार और कुछ कैमरे भी साथ ले गई। भारत के विरोध के बाद चीन ने कैमरे लौटा दिए। राज्य की वर्तमान परिस्थिति पर यदि नजर दौड़ाई जाए तो प्रदेश के ऋषिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश-बद्रीनाथ और ऋषिकेश-केदारनाथ मार्ग सहित देहरादून से हिमाचल को जोड़ने वाले पर्वतीय मार्ग व हल्द्वानी-धारचूला मोटर मार्ग पिछले 26 दिनों से बंद हैं। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस राज्य की सीमा क्षेत्र में यदि चीन द्वारा लद्दाख की तरह घुसपैठ की जाती है और मौसम की स्थिति हवाई यातायात के लिए अनुकूल नहीं होती है, तो ऐसे में घुसपैठियों के खिलाफ कैसे कार्यवाही होगी यह सवाल उठ खड़ा हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि बीते 26 दिनों में राज्य की महत्वपूर्ण मुख्य मार्गों से लगभग 200 से ज्यादा पुल बल गए और कई किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग भी बाढ़ की विभिशिका की भेंट चढ़ गया, लेकिन इन 26 दिनों में न तो भारत सरकार और न ही प्रदेश सरकार भारत-तिब्बत सीमा को जोड़ने के लिए न तो अस्थाई पुल ही बना सकी और न ही वैकल्पिक मार्ग। सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में लगी फौज को कैसे रसद सामग्री पहुंचाई जा रही होगी, यह तो रक्षा मंत्रालय ही बता सकता है, लेकिन मौसम की खराबी के चलते सैन्य बेस कैंपों तक हैलीकाप्टर की आवाजाही भी नहीं हो पा रही है। मामले में रक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार को मिलकर सबसे पहले सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत और पुलों के निर्माण पर ध्यान देना होगा, ताकि सीमा क्षेत्र तक बिना रूके हुए यातायात चल सके। जिससे रसद सामग्री सहित आपदा प्रभावितों तक डाक्टर और अन्य सुविधाएं पहुंच सके। इससे जहां सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य की सीमाओं तक पहुंचा जा सकेगा, वहीं आपदा पीड़ितों की मदद भी हो सकी। 

धारचूला और मुनस्यारी नहीं पहुंच पाये सरकारी दावे

देहरादून,10 जुलाई । उत्तराखंड में आपदा की त्रासदी को 26 दिन बीत गये, अभी तक राहत एवं बचाव की तस्वीर साफ नहीं हो पायी है। धारचूला और मुनस्यारी के इन दुर्गम इलाकों तक देहरादून में किये गये दावे अभी तक नहीं पहुचे हैं और कुछ अव्यवहारिक नजर आने लगे हैं। उत्तराखंड की सरकारें अभी तक यह नहीं समझ पायी हैं कि आपदा की घटनाओं के बाद राज्य सरकार को किस तरह से जनपक्षीय सरकार बनने की ओर बढ़ना चाहिए। धारचूला और मुनस्यारी दोनों तहसीलों में अभी तक सरकार के मंत्री और नौकरशाह दौरा कर लौट चुके हैं। आपदा पीड़ितों के जो सवाल हैं उनका हल न होना और उनको आपदा की आफत से राहत न मिलना सरकार के हर दावे को झुठला रहा है। मुनस्यारी के जिमीघाट से लेकर जौलजीवी तथा धारचूला के दारमा से जौलजीवी तक सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जिनके आवासीय भवन बेनाप जमीन पर बने थे और उनका घर-बार आपदा की भेंट चढ़ चुका है। सरकार के पुराने नियमों को देखें तो इन परिवारों को राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली राहत नहीं मिल सकती। अभी तक इस तरह के सैकड़ों परिवार राहत के लिये राज्य सरकार की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में एक घर में पिता सहित पुत्रों का अलग-अलग चूल्हा जलता है। राशन कार्ड और भाग दो रजिस्टर में भी नाम अलग-अलग हैं, लेकिन पिता के जीवत होने के कारण जमीन का मालिक मुखिया होने के कारण पिता है, इन स्थितियों में केवल पिता को ही मुआवजे का हकदार बनाया जा रहा है। गृह नुकसान के लिये मिलने वाली दो लाख रूपये की राशि में भी यही स्थिति है। चूल्हे के हिसाब से हकदारी का मामला यहां की सरकार की समझ में नहीं आ रहा है। अभी हाल में ही सरकार ने एक और अव्यवहारिक घोषणा कर डाली कि जिन परिवारों के आवासीय मकान टूट गये उन्हें रहने की व्यवस्था के लिये सरकार छह महीने तक दो हजार रूपये किराया देगी। उसके पीछे सरकार का षड्यंत्र भी है। सरकार चाहती है कि आपदा पीड़ितों को एक जगह पर न रहने दिया जाय ताकि वे पुनर्वास के सवाल पर राज्य सरकार को घेर न सकें। यह तो एक बात है लेकिन धारचूला, बलुवाकोट, मदकोट, जौलजीवी जैसे कस्बों की बात करें तो यहां किराये के लिये कमरे तक नहीं हैं। धारचूला में अचानक दो सौ से अधिक परिवारों के लिये किराये के कमरे कहां से पैदा हो जायेंगे। इस बात को देहरादून में बैठी सरकार नहीं समझ पा रही है। घट्टाबगड़ में 55 दलितों के परिवार सड़क में आ गये हैं। इन परिवारों को किराये में घर कहां मिलेगा। क्योंकि घट्टाबगड़ जैसे गांव के आसपास के गांवों को देखें तो बंदरखेत, तोली गांव में एक दो घर ही ऐसे हैं जो एक दो कमरों को किराये पर मिल सकते हैं ऐसे में किराये का यह फरमान राज्य सरकार की हवाई सोच को दिखाता है। धारचूला तहसील में खेत, छिरकिला, तीजम, सुमदुम, धारचूला नगर, गोठी, नयाबस्ती सीपू, बलुवाकोट, घाटीबगड़, गो, जौलजीवी, घट्टाबगड़, लुमती, मोरी, बांसबगड़, छोरीबगड़, बंगापानी, उमरगड़ा, मदकोट, भदेली, तल्ला दुम्मर, दराती, सेविला, जिमीघाट जैसे कई स्थान हैं जहां गोरी गंगा, काली गांगा तथा धौलीगंगा से भू-कटाव हो रहा है। इन स्थानों को बसाया जाना जरूरी है। नहीं तो बेघरबार लोगों की संख्या हजारों में हो जायेगी। अभी सिंचाई विभाग ने धारचूला, बलुवाकोट, जौलजीवी और मदकोट के लिये सुरक्षा हेतु प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा हैं आज 26 दिन बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने इन कस्बों की सुरक्षा के लिये एक ढेला भी स्वीकृत नहीं किया है। विधायक और सांसदों के पास करोड़ों रूपये की निधियां हैं, लेकिन इन कस्बों को बचाने के लिये उन्होंने एक रूपये भी नहीं दिया है। बलुवाकोट में भू-कटाव को रोकने के लिये संबंधित विभाग ने 62 लाख रूपये का प्रस्ताव भेजा था। इसकी स्वीकृति नहीं मिलने से बलुवाकोट वासियों ने ‘बलुवाकोट बचाओ संघर्ष समिति’ बनाकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। धारचूला विधायक हरीश धामी और सांसद प्रदीप टम्टा पट्टी पटवारी की तरह इधर-उधर दौड़ लगाने में हैं। उनका न प्रशासनिक अधिकारियों में नियंत्रण है और न ही वह राज्य सरकार से कोई बजट ला पा रहे हैं। इससे इस क्षेत्र को बचाने और राहत कार्यों में तेजी लाने के प्रयास ठंडे बस्ते में हैं। अभी भी आपदा की दृष्टि से खतरनाक स्थानों में आपदा पीड़ित तम्बूओं में रह रहे हैं। मौसम विभाग एक दो दिन खतरे का बता रहा है लेकिन यहां तो लोगों का हर पल खतरे में बीत रहा है। आज तक किसी भी परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहंुचाने की जहमत नहीं उठायी। इस क्षेत्र के सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों को आज से खोलने जा रही है। लेकिन जिन विद्यालयों में आपदा पीड़ित रह रहे हैं उन्हें सरकार कहां रखेगी इसका विकल्प सरकार के पास नहीं है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी और आपदा मंत्री यशपाल आर्य जौलजीवी से आगे को बढ़े कि घट्टाबगड़ में आपदा पीड़ितों से मिलेंगे लेकिन पैदल चलने से बचने के लिये दोनों आधे रास्ते से लौट गये। यह हमारी सरकार और प्रशासन का चेहरा है। धारचूला से मुनस्यारी तक कई आईएएस और पीसीएस अधिकारी बिठाये गये हैं जो आपदा राहत कार्यों में हाथ बढ़ाने का दावा कर रहे है, लेकिन हकीकत यह है कि यह अधिकारीगण सड़कों में गाड़ी से दौड़ रहे हैं। किसी को भी किसी गांव में जाते अभी तक नहीं देखा गया है। धारचूला में तो हाल यह है कि सरकार की ओर से नियुक्त नोडल अधिकारी आईएएस दीपक रावत सुबह कुमांऊ मंडल विकास मंडल के आवास गृह से हैलीपैड जाते हैं और सायं हैलीपैड से लौटकर आवासगृह लौट आते हैं। उनसे मिलने के लिये उन्ही से अनुमति लेनी होती है जो कि आपदा पीडितों को मिल नहीं रही है। नोडल अधिकारी के रूप में तैनात दीपक रावत न जन प्रतिनिधियों की सुन रहे हैं और न ही आपदा पीड़ितों को राहत देने में कोई भूमिका निभा रहे हैं।

मकान गिरने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत
20 को केदारनाथ से गुप्तकाशी लाया गया

देहरादून, 10 जुलाई, । मौसम के साफ होने से राज्य के कुछ हिस्सों में भले ही राहत कार्यो में तेजी आयी हो लेकिन चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ और पाण्डुकेश्वर में भारी बारिश का कहर अभी भी जारी है। मंगलवार देर रात चमोली जिले के पोखरी विकासखंड के गांव भिकुना में पहाडी से आये मलवे से एक मकान जमीदोज हो गया, वहीं मकान के गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। वहीं मौसम साफ होने से हांलाकि केदारनाथ क्षेत्र में राहत के काम में तेजी आई है। डीआईजी गढवाल अमित सिन्हा के अनुसार बुधवार को चलाये गये अभियान में केदारवैली से 20 लोगों को रेस्क्यू से गुप्तकाशी लाया गया है। उन्होंने बताया कि अब गरुडचट्टी में बेस कैम्प बनाने की तैयारी चल रही है केदारवैली में 10 नये लोगों की टीम भेजी गयी है। उन्हांेने बताया कि यहंा एक परमानेंट चौकी बनायी जा रही है स्टाफ का ट्रांसफर होता रहेगा, लेकिन यहां बचाव और राहत कार्य लगातार जारी रहेगा। बीती 16 जून से उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा का कहर जारी है, जो कि अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनपद चमोली में पिछले 24 घण्टे से हो रही बारिश के कारण भिकुना गांव में बीती रात साढे तीन बजे पहाड से आये मलवे में भारी तबाही मचाई। गांव मे एक मकान में सो रहे सात लोग मलवे में दब गये वहीं कई अन्य मकान भी खतरे की जद में आ गये हैं। गांव के लोग रात में ही अपने घर छोडकर भाग खडे हुए, जिसकी वजह से मलवे में दबे सात लोगों को सुबह स्थानीय लोग ने पोखरी थाना पुलिस के सहयोग से बाहर निकाला लेकिन तब तक सात लोगों की मौत हो चुकी थी। मृतकों में एक महिला और बच्ची भी शामिल है। हादसे का शिकार हुए परिवार का मुखिया एक दीवार की सहारे छुप जाने के कारण बच गया परिवार के रिश्तेदारों को खबर दे दी गई है दोपहर एक बजे तक सभी शवों को बाहर निकाला जा चुका था। वहीं दूसरी ओर पाण्डुकेश्वर में अलकनंदा का जल स्तर एक बार फिर उफान पर है, अलकनंदा के तेज बहाव में जहां मंगलवार देर रात एक होटल बह गया वहीं कई भवन क्षतिग्रस्त हो गये हैं। वहीं मौसम विभाग द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद भी प्रशासन लापरवाह बना हुआ है, जिसे लेकर क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। आपदा की शिकार उर्गमघाटी में भारी तबाही के बाद अब भूस्खलन के कारण क्षेत्र के लोग परेशान है यहां 400 घरों में दरारें पड चुकी है, जिसके कारण लोग इन घरों को छोडकर खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने पर मजबूर है। इधर गुप्तकाशी और केदारनाथ अभी भी बंद पडा हुआ है भडासु और रामपुर में आये मलवे को नहीं हटाया जा सका है जिसके कारण स्थानीय लोगों को भारी दिक्कते हो रही है व पिछले तीन सप्ताह से गंगोत्री राजमार्ग बंद है जिसके कारण स्थानीय लोग भारी मुसीबतों में फंसे हुए हैं।

प्रदेश के अधिकतर प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त: ध्यानी

देहरादून, 10 जुलाई, । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश सुमन ध्यानी ने कहा कि भारी वर्षा के कारण प्रदेश के अधिकतर जनपदों के सैकड़ों प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त हो गये हैं। कई विद्यालय तो इतनी जर्जर स्थिति में है कि उनमे शिक्षण कार्य करवाना बच्चों की जान को खतरे में डालना है। जर्जर विद्यालयों की स्थिति को देखते हुए सरकार से भाजपा मांग करती है कि तुरन्त क्षतिग्रस्त भवनों के लिए धनराशि अवमुक्त कर जिलाधिकारियों को निर्गत की जाय। कुछ विद्यालय एसे हैं कि वे 70-80 वर्ष पुरानी इमारतों मे चल रहे हैं, जो कि कभी भी गिर सकते हैं। ध्यानी ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड की विषम परिस्थितियों के मध्यनजर केन्द्र से मांग करे कि आपदा के मानकों को उत्तराखण्ड के परिपेक्ष में और व्यापक व सरल किया जाय। सभी हाईस्कूल एवं इण्टर कालेजों के भवनों को आपदा राहत मद से धनराशि देने हेतु मानको की परिधि में लाया जाय इस सम्बन्ध में प्रदेश सरकार को तुरन्त केन्द्र से आग्रह करना चाहिए की वे प्रदेश की परिस्थितियों के मध्यनजर सभी हाईस्कूल और इण्टर कालेज चाहे वो सरकारी हों या संस्थागत उनको आपदा राहत राशि देने के मानकों में सम्मलित किया जाय। सरकार तुरन्त धनराशि जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्गत करे ताकि क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनो को कक्षायें चलाये जाने लायक बनाया जा सके सरकार को यह कार्य अति प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए जिससे की छात्रों का शैक्षणिक शत्र खराब न हो।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया

देहरादून, 10 जुलाई, । बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष हत्या के मामलें को अश्लील हरकतों में दर्ज किये जाने पर भड़के पीड़ित परिजनों ने प्रदर्शन कर एसएसपी को इस संबंध में एक शिकायती पत्र भी सौंपा। विधित रहे की 6 जुलाई को मोहकम पुर खुर्द निवासी ओमप्रकाश पु़त्र स्वर्गीय नन्कू की कुछ कथित युवको ने रंजिशन हत्या कर दी थी। इस मामले पर मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन के बाद अमर नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। लेकिन पुलिस ने इस आरोपी के विरूद्व हत्या का मामला न दर्ज करते हुए सिर्फ अश्लील हरकतों का मामला दर्ज किया। जब पुलिस की इस कारगुजारी की भनक जब पीड़ित पक्ष को लगी तो तो आक्रोशित हो उठे और उन्होने एसएसपी दफ्तर के समक्ष प्रदर्शन कर एसएसपी केवल खुराना को एक शिकायती पत्र सौंपा। इस दौरान कप्तान ने प्रदर्शनकारियों को मामले की छानबीन कर दोषी पुलिस कार्मियों के विरूद्व कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व ग्राम प्रधान उषा ने किया जबकि प्रदर्शन के दौरान राधा, राजेंद्र कुमार सतीश, धीरज, अनिता, रीना, सुनिता आदि शामिल रहे।

हैलीकॉप्टर का मजा लूट रहे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि
आपदा पीड़ितों का राशन मातली हवाई अड्डे पर पड़ा

देहरादून, 10 जुलाई, । आपदा पीड़ितो की मदद की बजाए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि क्षेत्र के भ्रमण के बहाने हैलीकॉप्टर का मजा लूटने से बाज नही आ रहे।  राशन पहुंचाने के काम पर लगे हेलीकॉप्टर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए हवाई सफर का साधन बनकर रह गए हैं। स्थिति यह है कि क्षेत्र पंचायत सदस्य से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक हवा में उड़ रहे है। इसके चलते गांवों तक पहुंचने वाला राशन मातली हवाई अड्डे पर ही धूप में सूख रहा है। मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को जनपद उत्तरकाशी के मातली हेलीपैड पर टकनौर की जिला पंचायत सदस्य अपने पति के साथ पहुंच गई। वहां तैनात अधिकारी हेलीकॉप्टर में राशन भरने ही वाले थे कि वह बोल पड़ी कि उन्हें क्षेत्र का भ्रमण करना है। हेलीकॉप्टर एक बार में चार क्विंटल तक ही राशन लेकर जाने में सक्षम है। ऐसे में जिला पंचायत सदस्य को लेकर जाने में आधा ही राशन आ सकता था। इसके बावजूद जिला पंचायत सदस्य ने फिर फरमान सुना दिया कि उनके पति को भी उनके साथ जाना है। अधिकारियों की ना नुकूर पर उन्होंने विधायक से फोन करवाकर अपनी और पति की हेलीकॉप्टर की यात्रा पक्की करवा ली। पायलटों को भी मन मसोसकर राशन छोड़ इस दंपती को भटवाड़ी उनके क्षेत्र भ्रमण के लिए छोड़ना पड़ा। ब्लॉक प्रमुख भी अपने पति के साथ इन दिनों में तीन से चार चक्कर हेलीकॉप्टर से भटवाड़ी के लिए लगा चुकी है। इसके चलते इतनी ही बार हेलीकॉप्टर को बिना राशन के उड़ान भरनी पड़ी। इसके अलावा विधायक, ऊंची पकड़ वाले ग्राम प्रधान, सत्तारुढ़ पार्टी के अध्यक्ष, सदस्यों के लिए भी हेलीकॉप्टर राशन छोड़ हवा में चक्कर काट चुका है।

राज्य में आई आपदा को लेकर प्रधानमंत्री से मिले राज्यपाल

देहरादून, 10 जुलाई, । उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा0 अज़ीज़ कुरैशी ने विगत सायं दिल्ली में प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह से मुलाकात करके उन्हें 16 व 17 जून केा राज्य में में विशेषरूप सेे केदारनाथ क्षेत्र में आए जल प्रलय से हिमालय की तलहटी पर बसे लाखों लोगो के जीवन में संकट उत्पन्न करने वाली भीषण आपदा के विषय में विस्तृत जानकारी दी। प्रधानमंत्री के साथ लगभग 30 मिनट की भेंटवार्ता के दौरान राज्यपाल ने उन्हें आपदा प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्विकास, भूगर्भ वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों की राय के मुताबिक किए जाने, सीमा सड़क संगठन (बी.आर.ओ.) द्वारा सड़कांे का शीघ्रतीशीघ्र निर्माण करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल विशेष आधुनिक तकनीक को अपनाये जाने का सुझाव देते हुए यह भी अनुरोध किया कि उत्तराखण्ड के पहाडों की संवेदनशीलता के अनुरूप आवश्यकतानुसार अन्य देशों के विशेषज्ञों की राय लेकर एक मॉडल के आधार प्रभावित आबादी को पुर्नवासित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना होगा। विचार-विमर्श के दौरान राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के समक्ष चारों धामों को नये सिरे से विकसित करने के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। राज्यपाल ने कहा कि करोड़ों लोगो की आस्था के प्रतीक चार धाम क्षेत्र का सुनियोजित विकास करने के लिए परम्परागत ज्ञान, जीवन पद्धति, श्रृद्धालुओं तथा साधु-संतों की अपेक्षा के अनुसार धार्मिक स्थलों/मदिंरो के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण को पूर्णतः प्रतिबंधित करते हुए वहाँ की जलवायु के अनुरूप वृक्षारोपण करके सघन वन विकसित करने होगें। इन धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रृद्धालुओं के रात्रि निवास व यात्रा मार्ग पर अन्य आवश्यक सुविधाओं के प्रंबंधन पर विचार-विमर्श करते हुए राज्यपाल ने कहा उत्तराखण्ड की भौगौलिक परिस्थितयों व परिस्थितिकी को केन्द्र में रखकर तथा वर्तमान हादसे से सबक लेते हुए सम्पूर्ण यात्रा मार्ग में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए सुरक्षित वैज्ञानिक तरीके अपनाने होगें जिससे भविष्य में तीर्थयात्रियों को अप्रिय स्थितियों का सामना न करना पडे़। वैष्णों देवी तथा तिरूपति की तर्ज पर यात्रियों तथा वाहनों का आवागमन भी नियंत्रित करना होगा। इस आपदा में वर्तमान में बुरी तरह प्रभावित रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी तथा पिथैारागढ़ जनपद में चल रहे राहत कार्यो पर वार्ता के दौरान राज्यपाल ने लगातार चल रहे खराब मौसम, सड़क-पुलों व सम्पर्क मार्ग के ध्वस्त होने से वाहनों की आवागमन बाधित होने के कारण राहत पहॅुचाने में आ रही बाधाओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया। दोनो ही महानुभावों के मध्य उत्तराखण्ड आपदा प्रभावित जनपदों में प्रभावित आबादी को तत्कालिक राहत पहुँचाने तथा भावी योजनाओं के लिए वैज्ञानिक ढंग से ठोस कार्ययोजना को अंजाम देने पर भी गहन मंत्रणा हुई। राज्यपाल दिल्ली प्रवास से आज सायंकाल वापस देहरादून लौट आयेगें। 

बरसात के कारण जल भराव से क्षेत्र निवासी परेशान  

हरिद्वार/देहरादून, 10 जुलाई, । बरसात के कारण सुभाषनगर क्षेत्र निवासियों का बुरा हाल हो चुका है। जगह-जगह जल भराव के कारण संक्रामक रोगांे के फैलने की आश्ंाका बनी हुई है। नालियों का व्यवस्थित ना होना लोगों के लिये दिक्कतें खड़ी कर रहा है। सुभाष नगर में जगह-जगह खाली प्लाटों में पानी भरने के कारण मकानों में सिलाब हो रही है। कितनी ही बार स्थानीय विधायक से भी शिकायत कर चुके हैं लेकिन समस्या का कोई भी समाधान नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगांे में रोष बना हुआ है। अब तक क्षेत्र को नगर निगम मंे भी नहीं शामिल किया गया है। जिससे क्षेत्र की समस्याओं का हल हो सके। स्थानीय निवासी पीएस शर्मा, कृपाल सिंह, संजय दिनेश आदि ने बताया सुभाष नगर में जल भरने की समस्या विगत कई वर्षो से बनी हुई है। जगह-जगह जल भराव से लोगों को परेशानियां उठानी पड़ती है। बहुत से घरों में सिलाब आने के कारण दिवारें खराब हो चुकी है। नालियां बहुत ज्यादा चौड़ी होने के कारण गारा कीचड़ बाहर फैला रहता है। बरसात में स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। व्यापारी वर्ग भी बरसात के जल भराव से निजात पाने के लिये स्थानीय प्रधान से कई बार गुहार लगा चुका है। विधायक को भी समस्या से अवगत करा चुके हैं। लेकिन समस्या का कोई भी समाधान नहीं हो पाता। स्थानीय लोगों का कहना है पानी की समस्या भी बनी रहती है। पूरे सुभाष नगर में पानी की एक टंकी होने के कारण समय-समय पर पानी दिया जाता है। जिन कारणों से कई घरों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती हैैं। जबकि इस क्षेत्र की जनसंख्या भी तीव्र गति से बढ़ रही है। लेकिन संसाधन न होने के कारण परेशानियां और बढ़ती जा रही है। रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने कहा समस्या से हम परिचित हैं। जल्द ही समस्याओं का समाधान किया जायेगा। इससे पूर्व भी इस क्षेत्र को नगर निगम में शामिल करने की मांग उठाई थी लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं के चलते यह कार्य भी अधर में लटका हुआ है।

तीन दिन के अन्दर राहत राशि उपलब्ध कराई जाय: जिलाधिकारी

देहरादून, 10 जुलाई, । विगत दिनो जनपद में दैवी आपदा से हुई जान माल व मकानों व पशुओं की हुई क्षति तथा इस आपदा में मारे गये लोगो के परिजनों को दी जाने वाली राहत राशि वितरण के सम्बन्ध में जिलाधिकारी बी.वी.आर.सी. पुरूषोतम की अध्यक्षता में कैम्प कार्यालय देहरादून में सभी उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आहुत कर अब तक पीडित परिवारों को वितरित की गई राहत राशि के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गई। जिला प्रशासन द्धारा अब तक जनपद के पीडित परिवारों को 1 करोड 63 लाख 98 हजार तीन सौ रूपये की सहायता राहत राशि वितरित की गई है, तथा 83 लाख 75 हजार 900 सौ रूपये की आर्थिक सहायता राशि पीडित परिवारों में वितरित की जानी  बाकी है जिसे जिलाधिकारी ने तीन दिन के अन्दर सभी उप जिलाधिकारियों को वितरित करने के निर्देश दिये गये है। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिये है कि इस दैवी आपदा में जिन लोगों की मृत्यु हो गई है तथा जिनके मकान क्षति ग्रस्त होे गये है उन्हे यदि अब तक राहत राशि मुहैया नही कराई गई तो उन्हे तीन दिन के अन्दर राहत राशि उपलब्ध कराई जाय। तथा उन्होने सी आर.ए. को भी निर्देश दिये है कि उप जिलाधिकारियों की मंाग के अनुरूप उन्हे तत्काल धनराशि उपलब्ध कराई जाय जिससे वे पीडित परिवारों को तत्काल सहायता राशि मुहैया करा सकें। बैठक में जिलाधिकारी द्धारा जनपद देहरादून में दैवी आपदा से मारे गये लोगों के परिजनों की दी जाने वाली सहायता राशि के सम्बन्ध मेें तहसीलवार जानकारी चाही गई जिसमें तहसीदार सदर देहरादून ने अवगत कराया कि तहसील देहरादून के अन्तर्गत 5 व्यक्तियों की मौत हुई है। जिसमें अब तक दो लोगों के परिजनों को 5 लाख की दर से 10 लाख रू. दिये गये है। तथा ऋशिकेश में 5 लोगों की दैवी आपदा में मुत्यु हुई है जिनके परिजनों को आज धनराशि वितरित की जा रही है। विकासनगर में 4 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है जिनके 3 परिजनों को 15 लाख रूपये वितरित किये गये है। कालसी में 4 लोगों की मृत्यु हुई है जिनके परिजनों को 20 लाख रूपये वितरित किये गये है। तथा चकराता में 1 की मृत्यु हुई है जिनके परिजनों को 5 लाख रू. की धनराशि वितरित की गई है। बैठक में जिलाधिकारी द्धारा इस दैवी आपदा में घायल हुई व्यक्तियों के बारे भी जानकारी ली गई जिसमें तहसील कालसी में एक व्यक्ति घायल हुआ है जिसे 15 हजार की राहत राशि मुहैया कराई गई है। जिलाधिकारी द्धारा इस प्राकृतिक दैवी आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुए पक्के मकानों की जानकारी लेते हुए उन्हे अवगत कराया गया कि देहरादून तहसील केे अन्तर्गत एक पक्का मकान क्षतिग्रस्त हुआ है जिसे 2 लाख रूपये की सहायता राशि दी गई है विकासनगर में एक मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुआ है तथा पीडित परिवार को 2 लाख रूपये की सहायता प्रदान की गई है। कालसी में 26 मकान पूर्णत क्षतिग्रस्त हुए है तथा पीडित परिवारों को 50 लाख 35 हजार रूपये की सहायता राशि वितरित की गई है। तथा चकराता में 13 मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुए है जिसमें 5 परिवारों को 10 लाख रूपये की सहायता राशि मुहैया कराई गई है। जनपद देहरादून में आशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के सम्बन्ध में अवगत कराया गया कि तहसील सदर देहरादून के अन्तर्गत 26 पक्के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है अभी इसमें कोई सहायता राशि प्रदान नही की गई है। विकासनगर में 60 पक्के मकान आशिक क्षतिग्रसत हुए है जिसमें 1900 की दर से 60 पीडित परिवारों को 1 लाख 14 हजार रूपये की धनराशि वितरित की गई है। कालसी में 176 पक्के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है  जिसमें 175 पीडित परिवारों को 1900 रूपये एवं एक लाख की दर से 21 लाख 96 हजार 400 सौ रूपये राहत राशि वितरित की गई है। इसी प्रकार त्यूनी में 11 पक्के मकान आशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है जिन्हे 1900 रू.के हिसाब से 20 हजार 900 सौ रूपये सहायता राशि प्रदान की गई है। जिलाधिकारी द्धारा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए कच्चे मकानों की भी जानकारी ली गई जिसमें जिलाधिकारी को अवगत कराया गया है कि तहसील देहरादून के अन्तर्गत 74 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है जिसे पीडित परिवारों को 6000 के हिसाब से 74 परिवारों को 4 लाख 26 हजार रूपये की धनराशि वितरित की गई है। ऋषिकेश में 13 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है जिनमें 13 पीडित परिवारों को 78 हजार की सहायता राशि वितरित की गई है। विकासनगर में 275 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है जिसमें 175 परिवारों को 16 लाख 50 हजार रूपये की धनराशि वितरित की गई है। कालसी में 3 मकान आंशिक क्षतिग्रस्त हुए है जिन्हे 3 परिवारों का 18 हजार रूपये वितरित किये गये है। चकराता में 18 मकान आंशिक क्षतिग्रस्त हुए है जिनमें 6 परिवारों को 36 हजार रूपये वितरित किये गये है। त्यूनी में 16 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए है जिन्हे 16 पीडित परिवारों को 96 हजार रूपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई गयी है। जिलाधिकारी द्धारा इस प्राकृतिक दैवी आपदा से मारे गये बडे जानबारों के सम्बन्ध में भी जानकारी ली गई जिसमें जिलाधिकारी को अवगत कराया गया है कि विकासनगर में 5 बडे जानवर इस आपदा में मारे गये है जिन्हे 20 हजार प्रति जानबर से हिसाब से 3 लोगों को 60 हजार रूपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। कालसी में 3 जिसमें 1 व्यक्ति को 20 हजार रूपये सहायता राशि मुहैया की गई है। तथा चकराता तहसील के अन्तर्गत 49 बडे पशु मारे गये है जिसमें 10 व्यक्तियों को 2 लाख रूपये की सहायता राशि वितरित की गई है। त्यूनी में 23 बडे पशु इस आपदा के शिकार हुए है। अभी किसी पीडित परिवारों को सहायता राशि वितरित नही हो पाई है। इस प्राकृतिक दैवी आपदा में मारे गये छोटे जानवरों के सम्बन्ध में जिलाधिकारी द्धारा जानकारी ली गई। जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि विकासनगर में 7 छोटे जानवर  मारे गये है जिसे 3 हजार प्रति जानवर केे हिसाब से 7 लोगों को 21 हजार की सहायता राशि दी गई है। कालसी में 15 छोटे जानवर मारे गये जिन्हे 15 जानवरों के 45 हजार रूपये वितरित किये गये है। त्यूनी में 28 छोटे जानवर मारे गये है जिनमें 4 जानवरों के पीडित मालिको को 12 हजार रूपये की सहायता राशि मुहैया की गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन पशुओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नही उपलब्ध हुई है रिपोर्ट लेकर पीडित व्यक्तियों को सहायता राशि तीन दिन के अन्दर मुहैया करायें। बैठक में उप जिलाधिकारी सदर श्रीमती रंजना वर्मा, विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी हिमालय सिंह मारतोलिया, उप जिलाधिकारी चकराता मोहन सिंह बर्निया, उप जिलाधिकारी विकासनगर, तसीलदार सदर हरगिरी, जिला सूचना अधिकारी अजय मोहन सकलानी तथा सी आर ए आशिष वर्मा उपस्थित थे।

पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में 9वीं अन्तर्राज्यीय व अंतरईकाई समन्वय की बैठक संपन्न

देहरादून, 10 जुलाई, । 9वीं अन्तर्राज्यीय व अन्तरईकाई समन्वय बैठक का आयोजन सत्यव्रत, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड की अध्यक्षता में किया गया।  सत्यव्रत, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने अपने सम्बोधन में बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों का आभार प्रकट करते हुए आपसी समन्वय, विश्वास व तालमेल से कार्य किये जाने पर बल दिया गया। उन्होनें कहा कि विगत दिनों अतिवृष्टि के कारण राज्य में आयी आपदा के कारण राज्य पुलिस बल काफी संख्या में राहत व बचाव कार्य में लगा हुआ है इस कारण पड़ोसी राज्यों का समन्वय व सहयोग भी अतिआवश्यक हो गया है। कांवड यात्रा में आए कांवडिए इस दौरान चार धामो की यात्रा भी करते है परन्तु आपदा के कारण इस बार उन्हे पर्वतीय क्षेत्रों में जाने से कड़ाई से रोका जाएगा। इस हेतु समाचार पत्रों व चैनलों के माध्यम से नागरिकों को इस सम्बन्ध में जागरूक करने की कांवड मेला कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी अत्यन्त संवेदनशील है क्योकि इस दौरान भारी संख्या में कांवडियों का हरिद्वार ऋषिकेश की तरफ आवागमन रहता है अत्यन्त बड़ा रूप ले सकती है अतः कांवड मेला को शान्तिपूर्वक ढ़ग से सम्पादित कराना हमारे लिए एक बडी चुनौती है। अन्त में उन्होनें अरूण कुमार अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तरप्रदेश, से अनुरोध किया कि कांवड मेला प्रारम्भ होने से जनपद मेरठ में भी एक समन्वय बैठक आयोजित की जाए जिसमें सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं व तैयारीयों की पुनर्समीक्षा हो सके।कावड़ियों को जागरूक करने के उद्देश्य से यात्रा मार्गो व क्षेत्रों में पर्चे पैम्पलेट बटवानें व पोस्टर बैंनर लगवाने के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया। बैठक में अधिकारियों द्वारा आगामी कॉवड़ मेेला के परिपेक्ष्य में सुरक्षा की दृष्टि से अभिसूचना का आदान प्रदान, कावडियों द्वारा नहर की पटरी का प्रयोग किये जाने, डीजे का प्रयोग न करने देना। कॉवड़ मेेला में हॉकी, डन्डे, त्रिशुल आदि प्रतिबन्धित करने व यातायात नियमों का पालन कराये जाने आदि। उत्तराखण्ड तथा पडोसी राज्यों में वामपन्थी उग्रवाद व उनकी गतिविधियों के सन्दर्भ में सूचनाओं का आदान प्रदान। नेपाल व चीन सीमाओं के सन्दर्भ में सभी पुलिस संगठनों व सुरक्षा एजेन्सियों के मध्य सूचनाओं के आदान प्रदान, समन्वय, वैधानिक,अवैधानिक रास्तों व वाहनों की चैकिंग व सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण पुलों आदि की सुरक्षा।जालीमुद्रा के आवागमन व परिचालन को रोकने हेतु की जाने वाली कार्यवाहियॉ।अन्तर्राज्यीय अपराध व अपराधियों की रोकथाम व धरपकड हेतु आपसी समन्वय व सूचनाओं का आदान प्रदान। तिब्बत,नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से होने वाली तस्करी की रोकथाम। अफीम की खेती व मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम। निम्न प्रमुख बिन्दुओं पर प्रस्तुतिकरण दिये गये जिन पर गहन विचार विमर्श किया गया। बैठक अरूण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उ0प्र0, श्री बी0के0 सिंह, पुलिस महानिरीक्षक मेरठ जोन, राम सिंह मीना, पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड, जगमोहन, डीडी-आईबी, देहरादून, दीपक ज्योति घिल्ड़ियाल, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना उत्तराखण्ड, आई0एस0 नेगी, पुलिस महानिरीक्षक आईटीबीपी, एनएफ देहरादून, श्याम सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, एसएसबी, एनएफ रानीखेत अल्मोड़़ा, सुभाष यादव, डीआईजी टेलीकॉम, हरियाणा, जी0एन0 गोस्वामी, पुलिस उपमहानिरीक्षक, कुमायूॅ परिक्षेत्र, संजय गुंज्याल, पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध उत्तराखण्ड, पी0एस0 सैलाल, पुलिस उपमहानिरीक्षक अभिसूचना, उत्तराखण्ड, दिलजीत कुमार ठाकुर, पुलिस अधीक्षक सीआईडी, हिमाचल प्रदेश, पुष्पक ज्योति, पुलिस अधीक्षक अभिसूचना उत्तराखण्ड, केवल खुराना, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, श्रीमती विमला गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक पौड़ी गढ़वाल, राजीव स्वरूप, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार, सैन्थिल अबुदई कृष्ण राज एस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ उत्तराखण्ड, जन्मेजय प्रभाकर खण्डूडी, पुलिस अधीक्षक टिहरी, भीष्म सिंह, एडीशनल डिप्टी कमिश्नर, दिल्ली पुलिस, रफीक अहमद, आरपीएफ, विक्रमादित्य सचान, एसपी(आर) अभिसूचना बरेली उ0प्र0, डी0एस0कुवॅर, एसपी(आर) अभिसूचना, देहरादून, अमित श्रीवास्तव, एसपी(आर) हल्द्वानी उत्तराखण्ड, जी0सी0ध्यानी, अपर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना/सुरक्षा मुख्यालय उत्तराखण्ड आदि अधिकारियों द्वारा भाग लिया गया।

एम्स की गवर्निंग बॉडी का हुआ गठन 

ऋषिकेश/देहरादून, 10 जुलाई, । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की ऋषिकेश शाखा की गवर्निंग बाडी का गठन कर लिया गया है। गवर्निंग बाडी के पास एम्स संस्थान के संचालन के सभी अधिकार निहित होगें संस्थान की स्वायत्ता के लिए गठित इस कमेटी के तहत ही एम्स निदेशक भी कार्य करेंगे। केंद्र सरकार की ओर से एम्स की ऋषिकेश क्षेत्र के संचालन के लिए आवश्यक गवर्निंग बॉडी का गठन किया गया। इसके साथ ही एम्स विधिवत स्वायत्ताशासी संस्थान बन गया है। गवर्निंग बाडी को संस्थान के संचालन के साथ ही इससे जुड़े अन्य सभी अधिकार प्राप्त होंगे। सूत्रांे के अनुसार एम्स की गवर्निंग बॉडी मंे राज्य के मुख्य सचिव सुभाष कुमार उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डीएस चौहान, एनआईटी श्रीनगर के निदेशक प्रो. एचटी थोराट को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही गवर्निंग बाडी मंे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य सचिव स्वास्थ्य महानिदेशक फाइनेंस सेकेट्री भारत सरकार वैज्ञानिक तीन संसद सदस्य भी शामिल है। एम्स निदेशक डा. राजकुमार ने केंद्र सरकार द्वारा संस्थान की गवर्निंग बाडी के गठन किए जाने की पुष्टि की है।

जल पुलिस ने 31 व्यक्तियों को निकाला

हरिद्वार/देहरादून, 10 जुलाई, । दैवीय आपदा में गंगा का जलस्तर बढ़ने से लक्सर तहसील के ग्राम शिवपुरी के सामने तटबंध टूटने से गंगादासपुर सहित कई गावों मे जलभराव से जनजीवन अस्त व्यवस्त हो गया है । इन गांवों से जलपुलिस ने नाव द्वारा 31 व्यक्तियों को निकाला गया। तहसीलदार ने बताया कि गंगा नदी का जल स्तर बढ़ने से ग्राम गंगदासपुर, महाराजपुर खुर्द (मजरा बहादराबाद सहित) महाराजपुर कलां, हबीबपुर कुडी (मजरा पण्डितपुरी सहित), रायसी (मजरा नन्दपुर सहित) रघुनाथपुर उर्फ बालावाली (मजरा डुमनपुरी सहित) कलसिया में जलभराव हो गया ।  ग्राम गंगदासपुर व अन्य ग्रामों से 31 व्यक्तियों को जल पुलिस की सहायता से नाव द्वारा निकाला गया। डाक्टरों की टीम गांव में भेज दी गयी है। स्थिति पर लगातर नजर रखी जा रही है ।
बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा 8 ट्रक खाद्यान्न सामग्री उपरोक्त ग्रामों में वितरित करायी गयी है तथा 2 ट्रक खाद्यान्न सामग्री मा. जिला जज हरिद्वार के सौजन्य से कृषक इन्टर कालेज रायसी में वितरित करायी गयी।





(राजेन्द्र जोशी)

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