भारतीय इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश को अनेक बार गुलामी में रहना पड़ा लेकिन गुलामी से मुक्त होने में भी भारतीय वीर सपूतों ने अपने प्राणो की आहूतियाॅ देकर इस देश की अस्मित की रक्षा की है। भारतीय इतिहास में गद्दारों की कभी कमी नही रही है, व्यक्तिगत स्वार्थ व लालच के कारण भारतीय इतिहास को कलंक भी लगा है लेकिन देश के वीर सपूतों ने इस इतिहास के कलंक को मिटाने के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर देश की संस्कृति एवं संस्कारों को बचा कर रखा है । भारतीय आजादी के आन्दोलन की आधारशिला 9 अगस्त मानवीय चेतना जाग्रति करने का दिवस माना जाता है , इस दिवस का इतिहास इसलिए अमर हो गया है क्योकि इस दिवस को जो अंग्रेजों ने नर संहार किया वह देश की आजादी का सबसे बड़ा नर संहार माना जाता है इसके बाद देश में आग में घी का काम किया या जलती आग में तेल छिड़कने का कार्य 9 अगस्त 1942 को हुआ । इसी कारण भारत आजाद हो सका ।
मुगलों की गुलामी के बाद अंग्रेजो की गुलामी के विरूध्द मंगल पाण्डेय ने देश के अंदर सबसे पहिले बिगुल बजाई उसके बाद झाॅसी की रानी ने अंग्रेजों को डट कर मुकाबला किया इसके वाद देश के अंदर लाखों लोगों ने अंग्रेजों की नीतियाॅ के विरूध्द आवाज उठााई । देश के लाखो अमर शहीदों का नाम नही लिया जा सकता है लेकिन अंग्रेजो की नीतिओं के विरूध्द मुंशी प्रेम चन्द्र, पं0 दीन दयाल उपाध्याय, लाला लाजपतराय, बाल गंगा घर तिलक, राजाराम मोहन राय, गणेश शंकर विद्यार्थी, महात्मा गाॅधी, जबाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, मौलाना अव्दुल कलाम, जय प्रकाश नारायण चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद, सरोजिनी नायडू, सरदार बल्लभ भाई पटेल आदि ने देश में आन्दोलन शुरू किये । सर्व प्रथम 9 अगस्त 1925 को ब्रिटिश सरकार का तख्ता पलटने के लिए पहिला आन्दोलन काकोरी काॅड के नाम से आन्दोलन शुरू किया था, इस आन्दोलन की कमान विस्मिल ने संभाली ,इस आन्दोलन को हिन्दुस्तान प्रजातंत्र संघ के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने शुरू किया था । इसलिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को इसकी याद ताजा करते हुये देश में आन्दोलन शुरू किये गये , जिसका अंतिम रूप 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन को अतिम रूप दिया गया जिसकी कमान श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने संभाली , इस दिन हजारो आन्दोलनकारी गिरफतार कर लिये गये तथा 940 लोग देश के लिए शहीद हुए, तथा 1630 घायल हुये 18000 हजार से अधिक लोगों को अंग्रेजो ने नजरबंद किया तथा 60229 लोगों को गिरफतार किया गया था । इस आन्दोलन का इतिहास साक्षी है कि इसी समय से काॅग्रेस में गुटवाजी हेा गई थी ।
भारत छोड़ो आंदोलन सही मायने में एक जनांदोलन ही था जिसमें लाखो आम हिन्दूस्तानी शामिल थें, इस आंदोलन के बाद देश में भारत से अंग्रेजों को भागाने के लिए युवाओ को जाग्रत किया गया जिससे सम्पूर्ण भारत में अंगे्रजो के विरूध्द जगह जगह विरोध व आन्दोलन हुये । लाखों लोगों को गिरफतार किया गया तथा गोलीओ से भूना गया लेकिन जब देश की स्थिति नाजूक हो गई तो 16 अगस्त 1946 को देश से अंग्रेजों ने भागने की रणनीति तय की लेकिन हिन्दूस्तान के दो टुकड़े करने की नीति चली जो एक साल के अंदर ही देश को आजादी तो मिली लेकिन भारत को दो भागों में विभाजित कर हुये 15 अगस्त 1947 को भारत को आजाद किया । आज देश में आंतकवादी, अलगाववाद, जातिवाद, भृष्टाचार, जैसे संगीन अपराधों से देश का प्रत्येक नागरिक जूझ रहा है । भारतीय आजादी में वर्तमान में जो समस्याये सामने आ रही है इनके लिए फिर से एक आन्दोलन की आवश्यकता हो रही है । अब भारतीय नागरिको को पाकिस्तान, चीन से जितना खतरा है उतना ही खतरा देश के अंदर पनप रहे आंतकवाद, अलगाववाद जातिवाद, भृष्टाचार, आर्थिक अपराधों से खतरा है । इसी कारण देश की संस्कृति एवं संस्कार समाप्त हो रहे है, लोगों का एक दूसरे से विश्वास समाप्त हो रहा है ।
आने वाला समय देश के लिए घातक है । देश के प्रत्येक नागरिक को जागरूक होकर अपनी सुरक्षा के साथ साथ देश की सुरक्षा एवं अस्मिता की रक्षा के लिए पुनः एक आंदोलन की आवश्यकता है । आज प्रत्येक भारतवासी का कर्तव्य व फर्ज है कि देश के अंदर जो भी आजादी के सपूत जीवित हैं या जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हमारे बीच है , कम से कम 9 अगस्त जो क्राॅति दिवस के रूप में इतिहास में दर्ज हे इस दिवस को विजय दिवस के रूपमें मनाया जावे तथा आजाद देश के आजाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कम से कम एक एक पुष्पमाला व श्रीफल देकर उनका सम्मान किया जावे, । स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों को समाज में सम्मानित कर उनके अमृत बचनों को स्मृरण किया जावे ।
--संतोष गंगेले--
अध्यक्ष गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश

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