अमेरिका के वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए गए एक प्रयोग के बाद बताया कि कम खुराक में दी गई मधुमेह की दवा में बुढ़ापारोधी प्रभाव हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मेटफॉरमिन दवा में कैलोरी प्रतिबंध के प्रभाव हो सकते हैं। बीबीसी के अनुसार, "बहुत कम कैलोरी वाला आहार लेने से स्वस्थ उम्र को बढ़ावा मिलता है।" बाल्टिमोर, मेरीलैंड, अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग के राफेल डी काबो ने बताया कि प्रयोगशाला में देखा गया कि कैलोरी प्रतिबंध से चूहों के जीवनकाल में बढ़ोत्तरी हुई है। 'नेचर कम्यूनिकेशंस' पत्रिका में शोधकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन में मनुष्य पर पड़ने वाले प्रभाव अस्पष्ट हैं।
मेटफॉरमिन का प्रयोग मुख्य रूप से 40 से अधिक की उम्र के लोगों को होने वाले टाइप-2 मधुमेह के उपचार में व्यापक रूप से होता है। इसके अलावा इसका प्रयोग मेटाबोलिक सिंड्रोम के उपचार में भी होता है जो कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे का संयोजित रूप है। पूर्व अध्ययनों में देखा गया कि मेटफॉरमिन कीड़ों जैसे साधारण जीवों का जीवनकाल बढ़ा सकती है, लेकिन मक्ख्यिों और स्तनधारियों के अध्ययनों में इसका उल्टा प्रभाव आया।
वैज्ञानिकों ने दो विभिन्न तरह की खुराकों में से एक खुराक मध्यम आयु के नर चूहे को दी और पाया कि न्यूनतम खुराकों से उसके जीवनकाल मे पांच प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई। इसके साथ ही बढ़ती उम्र में होने वाले रोग भी देरी से शुरू हुए। लेकिन मेटफॉरमिन की उच्च खुराक विषाक्त थी और इससे चूहे का जीवनकाल घट गया। डी काबो ने बताया कि आगे के अध्ययनों में यह पता लगाने की जरूरत थी कि मेटफॉरमिन का मनुष्य के स्वास्थ्य और जीवनकाल पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।

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