उत्तराखंड की विस्तृत खबर (06 अगस्त) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 6 अगस्त 2013

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (06 अगस्त)

शिक्षा एवं पेयजल मंत्री ने की कार्यों की समीक्षा बैठक

प्रदेश के शिक्षा एवं पेयजल मंत्री, मंत्रीप्रसाद नैथानी ने आज विधानसभा स्थित सभा कक्ष में संस्कृत शिक्षा निदेशालय संस्कृत विश्व विद्यालय एवं संस्कृत अकादमी के कार्यों की समीक्षा बैठक ली। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य संस्कृत की उद्गम धारा है। संस्कृत में ही वेद एवं उपनिषद लिखे गये हैं। लेकिन आज संस्कृत अन्य भाषाओं की अपेक्षा पिछड गया है। इसको आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रदेश सरकार शत्त प्रयासरत है। उन्होने कहा कि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड में संस्कृत विद्वानों का एक विश्वस्तरीय सम्मेलन आयोजित करने के सम्बन्ध में संस्कृत शिक्षा निदेशालय, संस्कृत अकादमी एवं संस्कृत विश्व विद्यालयों को निर्देश दिये गये हैं।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को सुदृढ आधार के लिए आवश्यक है कि संस्कृत शिक्षा से जुडे विभाग ठोस कार्य योजना बना कर अमल में लायें। उन्होने कहा कि संस्कृत शिक्षा निदेशालय के लिए रायपुर में 31 बीगा भूमि आवंटित होने के बावजूद अभी तक इस भूमि की तारबाढ़ नही की गई है। साथ ही इस भूमि पर अवैध अतिक्रमण को हटाया जाय। संस्कृत विद्यालय, संस्कृत अकादमी एवं संस्कृत शिक्षा निदेशालय के पदों को उचित प्रक्रिया के तहत भरे जायें। संस्कृत विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर एवं कैम्पस के निर्माण के लिए धन आवंटन प्रस्ताव भेजे जाय। उन्होने प्रमुख सचिव संस्कृत शिक्षा को निर्देश दिये की संस्कृत से जुडे विभागों की प्रत्येक माह समीक्षा करें ताकि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए गति मिल सके। शिक्षा मत्री ने कहा कि संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को भी उसी प्रकार छात्रवृत्ति एवं अन्य सुविधायें मिले, इसके लिए संस्कृत शिक्षा निदेशक तुलनात्मक चार्ट बना कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। साथ ही प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में अध्यापकों की समुचित व्यवस्था की जाय।

इस अवसर पर संस्कृत अकादमी की और से प्रकाशित संस्कृत दैनन्दिनी व आन्वीक्षिकी का विमोचन प्रदेश के शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी एवं खादी ग्रामोद्योग सेवा एवं श्रम मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल ने किया।  इस अवसर पर प्रमुख सचिव एस राजू, महानिदेशक शिक्षा पीएस जंगपांगी, संस्कृत शिक्षा निदेशक सीएस ग्वाल, डाॅ़ महावीर अग्रवाल वाईस चांसलर संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रोफे. मोहन चन्द्र बलोदी, डाॅ. रश्मी बडोनी, डाॅ.बीपी मैठानी, पूर्व निदेशक संस्कृत शिक्षा सीपी सेमवाल, उपाध्यक्ष संस्कृत अकादमी सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

‘‘रोल बैक‘‘ करती बहुगुणा सरकार!, जितने कदम चले आगे उतना ही किया ‘‘रोल बैक‘‘

देहरादून, 6 अगस्त। अपने ही निर्णयों से ‘‘रोल बैक‘‘ करना बहुगुणा सरकार की आदत में शुमार है। मुख्यमंत्री बहुगुणा द्वारा अब तक लगभग एक दर्जन से ज्यादा मामलों पर ‘‘रोल बैक‘‘ किया गया है। यह ‘‘रोल बैक‘‘ राजनैतिक कारणों से किया गया अथवा जानकारी के अभाव में, लेकिन सरकार की इस ‘‘रोल बैक‘‘ की आदत से यह साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार पहले तो घोषणा कर देती है और बाद में उस से पीछे हट जाती है। प्रदेश में 17 महीने पुरानी बहुगुणा सरकार ने अभी तक कभी पूर्ववर्ती सरकारों के निर्णय, तो कभी अपने ही निर्णयों पर ‘‘रोल बैक‘‘ किया है। सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे ‘‘रोल बैक‘‘ से सरकार की इच्छा शक्ति पर सवालिया निशान स्वतः ही लग जाते हैं। विजय बहुगुणा द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के तुरंत बाद सबसे पहले उनके द्वारा भाजपा शासनकाल के दौरान बनाए गए भू-अध्यादेश को समाप्त कर राज्य में भूमाफियाओं के लिए दरवाजे खोल दिए, वहीं प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में लोकायुक्त गठन पर अभी तक किसी भी तरह की दिलचस्पी न दिखाया जाना और खण्डूडी सरकार के दौरान स्थानांतरण एक्ट को पलटने को पिछली सरकारों के निर्णय से ‘‘रोल बैक‘‘ करना ही कहा जाएगा। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की गन्ना चीनी मिलों को पीपीपी मोड में देने के बाद ‘‘रोल बैक‘‘ करना, केदारनाथ में आई आपदा के दौरान देश के सामने यह कहना कि 15 जुलाई तक सबको मुआवजा दे दिया जाएगा इस निर्णय पर भी प्रदेश सरकार ने ‘‘रोल बैक‘‘ किया। इतना ही नहीं पहले प्रदेश सरकार ने आपदा के बाद यह कहा था कि एक महीने बाद केदारनाथ, रामबाडा, सौनप्रयाग आदि क्षेत्रों से लापता लोगों को मृत मान लिया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार अब अपनी इस घोषणा से भी ‘‘रोल बैक‘‘ कर गई है। वहीं सरकार द्वारा कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण के बाद एक्स कैडट व्यवस्था को खत्म किया जाना भी प्रदेश सरकार का ‘‘रोल बैक‘‘ ही रहा। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली में मासूम के साथ बलात्कार के बाद राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा करना और फिर उस घोषणा से ‘‘रोल बैक‘‘ करना, वहीं केंद्र द्वारा घरेलू उपयोग के लिए प्रतिवर्ष छहः गैस सिलेंडरों को रियायती दामों पर देने की घोषणा के बाद के बाद मुख्यमंत्री द्वारा तीन अतिरिक्त गैस सिलेंडर दिए जाने की घोषणा से ‘‘रोल बैक‘‘ करना सहित प्रदेश में एफडीआई लागू करने की घोषणा करने के बाद यह कहकर ‘‘रोल बैक‘‘ करना कि राज्य में उस स्तर के कोई शहर नहीं है, जहां एफडीआई लागू किया जा सके। वहीं भाटी आयोग सहित कई अन्य मामलों सहित अब ताजे पुर्नविकास और पुर्ननिर्माण के लिए बनाए जाने वाले प्राधिकरण के मामले पर भी राज्य सरकार ने ‘‘रोल बैक‘‘ किया है। कुल मिलाकर इन 17 महीनों में कांग्रेस की सरकार ने जितने कदम आगे बढाए हैं, उतने ही कदम ‘‘रोल बैक‘‘ भी किए हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में काबिज सरकार कोई भी घोषणा बिना सोचे-समझे कर देती है, यही कारण है कि उसे अपने हर निर्णय के बाद ‘‘रोल बैक‘‘ करना पडा है।

उत्तराखण्ड में लगातार भारी बारिश जारी, नदियां खतरे के निशान से ऊपर

देहरादून, 6 अगस्त। उत्तराखंड में भारी बारिश ने एक बार फिर आपदा जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। राज्य की तमाम नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। भू-स्खलन और जमीन धंसने की घटनाओं के साथ-साथ एक पुल टूटने से 500 से ज्यादा गांवों का संपर्क दूसरे हिस्सों से टूट गया है। भारी बारिश की आशंका को देखते हुए तमाम जिले 48 घंटे के लिए अलर्ट पर हैं। उत्तराखंड के हर हिस्से में जबरदस्त बारिश हो रही है। इस बारिश ने जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है। कहीं भूस्खलन हो रहा है तो कहीं जमीन धंस रही है। इसका असर सड़कों पर पडा है। राज्य की सभी नदियां उफान पर हैं। मौसम विभाग का दावा है कि अगले 48 घंटे में हालात जस के तस रहेंगे। आपदा प्रबंधन विभाग ने हर जनपद के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। देहरादून में दो दिनों के लिए स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। आपदा प्रबंधक निदेशक पीयूष रोतेला के मुताबिक मौसम विभाग के मुताबिक 48 घंटे में भारी बारिश होगी। मौसम विभाग की चेतावनी पर राज्य सरकार गंभीर है। पिछली तबाही से सबक लेते हुए कैबिनेट ने आपात बैठक बुलाकर स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी एसडीआरएफ के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फोर्स में 6 कंपनी होगी। इन्हें किसी भी आपदा से निपटने की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं टिहरी बांध में जलस्तर बडने से पानी इस सीमा को छूने के लिए तैयार है। इससे बचने के लिए जैसे ही बांध से पानी छोडा जाना शुरू हुआ। उत्तरकाशी में चिन्याली सोड के पास एक पुल डूब गया। इस पूल के डूबने से आसपास के करीब 50 गांवों का सूबे से संपर्क टूट गया है। टिहरी डैम से पानी छोड जाने से हरिद्वार और ऋषिकेश के ज्यादातर घाट डूबने लगे हैं। दर्जनों गांवों में पानी भर चुका है। डरे लोग पानी भरने की वजह से घर-बार छोडकर ऊंचे स्थानों पर चले गए हैं। टिहरी डैम की तरह कालागढ डैम, कोसी बैराज, रामनगर बैराज समेत सभी बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोडा जा रहा है। जो मैदानी इलाकों में कहर बन कर टूट रहा है।

चीन के मुद्दे पर नहीं कर रही केंद्र सरकार कोई ठोस पहलरू खण्डूडी

देहरादून, 6 अगस्त,  उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी एवीएसएम द्वारा मीडिया में आ रही रिर्पोट के अनुसार लद्दाख के उत्तरी क्षेत्र में ट्रेड जंक्शन इलाके के 14 किमी0 उपर वास्तविक नियत्रण रेखा से लगी अपनी दो चैकियों के लिए जा रहे भारतीय सेना के गश्ती दल को चीन की सेना द्वारा रोके जाने एवं यह चीनी क्षेत्र है का बैनर दिखाने पर चिंता प्रकट की है, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले भी अप्रैल माह 2013 में चीन के सैनिक लद्दाख क्षेत्र की दीपसांग वैली में लाईन आफ कन्ट्रोल से 19 किमी0 अन्दर भारतीय सीमा में घुसकर अपना टेन्ट लगा चुके हैं। किसी भी देश की सीमा के अंदर लाईन आफ कन्ट्रोल से 19 किमी0 दूसरे देश की सेना का अंदर आकर टेन्ट लगाना बहुत गम्भीर बात है। चीनी सैनिक वर्ष 2008 में ही 270 बार भारत की सीमा में घुसपैठ कर चुके है। वर्ष 2008 में ही 2285 बार चीनी की सेना द्वारा भारत की  सीमा पर आक्रमक रूख अपनाया जा चुका है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद से सम्बन्धित 15 वें दौर की बातचीत हो चुकी है परन्तु नतीजा कुछ नहीं निकला। चीन ने भारत का अक्साई चिन प्लेटु जो कि भारत के पश्चिम हिमालय में स्थित है और जिसका क्षेत्रफल 38000 वर्ग किमी0 है दबा रखा है। इतना सब बातो को देखने के बावजूद भी यू0पी0ए0 की केन्द्र सरकार इस विषय में कोई गम्भीर पहल करते हुए नहीं दिखाई दे रही है। क्या यू0पी0ए0 की केन्द्र सरकार 1962 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का इतिहास दोहराने की तैयारी कर रही है। जिसके कारण भारत को 32 दिन युद्ध लडना पडा एवं बडी संख्या मेें भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद भी भारत को मुॅह की खानी पडी थी और विश्वभर में शर्मिन्दा होना पडा था।

उधर प्रभावित एक-एक दाने को मोहताज, इधर सरकार का शाही भोज

देहरादून, 6 अगस्त, । समूचे देश को उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा में हजारों श्रद्धालु व गांव के बाशिंदों के मारे जाने का दर्द है, लेकिन उत्तराखण्ड में आई आपदा में जिस तरह से विश्व बैंक व एडीबी अफसरों के सम्मान में शासन ने बड शाही भोज का आयोजन किया वह साबित कर रहा है कि उत्तराखण्ड के शासन तंत्र में इस आपदा में मारे गये लोगों के प्रति कितनी संवेदनशील है। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने शासनतंत्र द्वारा दिये गये शाही भोज को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस आपदा में देश के हजारों श्रद्धालु व पहाडों के सैकडों बाशिंदे हमेशा के लिए मौत के काल में चले गये वहां का सरकारी तंत्र अगर विश्व बैंक व एडीबी अफसरों को दावत दे रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सरकार आपदा से कितनी संवेदनशील है। उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा को 50 दिन का समय हो गया लेकिन सरकार आपदा पीडितों का दर्द नहीं हर पाई। सैकडों गांव में बच्चे-बूढ खाने के एक-एक दाने को तरस रहे हैं। वहीं इस दैवीय आपदा में शासन ने बीते रोज विश्व बैंक व एडीबी की टीम के लोगों को शीशे में उतारने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी। इन संस्थाओं से मदद लेने के लिए आतुर उत्तराखण्ड शासन की ओर से बीते रोज आईटीबीपी के टाइगर मेस में एक भव्य शाही भोज का आयोजन किया गया। हैरानी वाली बात तो यह है कि इस शाही भोजन में भाग लेने के लिए अधिकारियों को दोपहर में बंद लिफाफे में रात्रि आठ बजे भोज के लिए आमंत्रित किया गया था। भोज का कोई कारण भी नहीं बताया गया। लेकिन इस भोज को विश्व बैंक व एडीबी अफसरों की टीम को खुश करने के लिए दिया गया था। बता दें कि आपदा के बाद 31 जुलाई को विश्व बैंक व एडीबी की टीम ने देहरादून में डेरा डाल रखा था इस टीम को शाही भोज दिये जाने पर भाजपा नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने गहरी नाराजगी दिखाई है और ऐसे भोज के आयोजन की उन्होंने जमकर निंदा की। उनका कहना था इस समय उत्तराखण्ड में आई आपदा से प्रदेश के सैकडों बाशिंदे मर गये और लगभग 500 गांव पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं ऐसे में शासन तंत्र द्वारा शाही भोज का आयोजन करना आपदा पीडितों के जख्मों पर नमक छिडकने जैसा है। उनका कहना है कि शासन में किस बात की यह दावत दी है क्या जिस संस्था के लिए यह शाही दावत दी गई वह देश की नहीं है? उन्होंने कहा कि आपदा के समय दी गई इस दावत का वह खुलकर विरोध करते हैं उन्होंने कहा इन संस्थाओं के अधिकारियों में इतनी संवेदना होनी चाहिए थी कि वह खुद ही ऐसे मौके पर दावत लेने से इन्कार कर देते। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी संस्थाएं आपदा के समय में भी सरकार को ट्टण देने के लिए शाही दावत ले रही हैं तो उनमें संवेदनशीलता कहंा रह गयी? गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में 16 जून को आई दैवीय आपदा से पूरा देश हिल गया। चारधाम यात्रा में आये हजारों श्रद्धालु जलप्रलय में समा गये और पहाड के सैकडों बाशिंदे हमेशा के लिए मौत के काल में चले गये। इन गांवोें में रहने वाले हजारों बाशिंदों के सामने आज भी रोजी रोटी व सिर छुपाने की जगह का संकट बना हुआ है। सरकार लगातार दावे करती आ रही है कि वह आपदा ग्रस्त इलाकों में रह रहे बाशिंदों को खाद्यान्न व हर सामान मुहैया करा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी सरकार का तंत्र सैकडों गांवों में आर्थिक मदद पहंुचाने में फेल साबित हुआ है। देश के कौने-कौने से आई राहत सामग्री गोदामों में सडकर खराब हो गई। लेकिन सरकार ने इतनी जहमत नहीं उठाई कि आखिरकार इस सामग्री को किसी तरह पीडितों तक पहंुचाया जाए। केदारधाम व रामबाडा में हजारों लाशें मलबे के नीचे सड गल गई और सरकार ने इतनी जहमत नहीं उठाई की इन शवों को मलवो से बाहर निकालने के लिए वह दम भरती। देश के कई राज्यों से चारधाम यात्रा में आये हजारों श्रद्धालु हमेशा के लिए मौत की नींद सो गये और उनके परिजनों मंे उत्तराखण्ड सरकार के प्रति इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि उसने मलबे के नीचे दबे शवों को बाहर निकालने के लिए कोई पहल नहीं की। अपनों को खो चुके लोगों के आंसू लगातार बह रहे हैं लेकिन सरकार ने इतना दर्द नहीं दिखाया कि जिन लोगों के शव केदारघाटी में मिले उनके परिजनों को इसकी सूचना देकर उन्हें अपनों का अन्तिम संस्कार वहीं करने के लिए बुला लिया जाए। सरकार ने आई आपदा के बाद भले ही अपना सब कुछ खो चुके बाशिंदों की आखों से आंसू पौछने के लिए कोई काम न किया हो लेकिन उसने देश-विदेश से आर्थिक मदद मांगने के लिए अपने हाथ जरूर पसारे थे। जिससे सरकार की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल खडे हो रहे हैं।


(मनोज इष्टवाल)


शिक्षा मंत्री को 17 महीने बाद आई स्कूलों की सुध

देहरादून, 6 अगस्त, । आखिरकार प्रदेश के शिक्षा मंत्री को 17 महीने बाद राज्य के स्कूलों के भवनों की याद आ ही गई। वह भी तक जब राज्य आपदा से कराह रहा है। प्रदेश में आपदा से पहले कई विद्यालयों की स्थिति इतनी बद से बदतर थी कि इन भवनों में बच्चों को पढ़ने में भी डर लगता था, क्योंकि कहीं भवन कि चाहर दीवारी तो थी, लेकिन छत नहीं। वर्षा में बच्चे किस तरह शिक्षा ग्रहण करते होंगे यह तो शिक्षा महकमा ही जाने लेकिन आपदा के बाद मंदाकिनी सहित अलकनंदा घाटी के कई स्कूल जमींदोज हो गए। मंगलवार को प्रदेश भर में हो रही लगातार बरसात को देखते हुए प्रदेश के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लेते हुए निदेशक शिक्षा विभाग को निर्देश देते हुए कहा है कि 15 दिनों के अंतर्गत उन्हें सम्पूर्ण प्रदेश में वर्षा से क्षतिग्रस्त हुए बेसिक व माध्यमिक स्कूलों का ब्यौरा उपलब्ध करायें। साथ ही क्षतिग्रस्त स्कूलों में पठान पाठन प्रभावित न हो इसके लिए विभाग आवश्यक कदम उठाते हुए विद्यार्थियों कि व्यवस्था निकट पंचायत घर या अन्य निकटवर्ती विद्यालय भवन में कराये। विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा है कि विभाग सभी स्कूलों का वास्तविक आंकलन कर उनकी सूची उपलब्ध कराये ताकि इस संबंध में भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जा सके. उन्होंने जानकारी देते हुए कहा है कि रमसा के माध्यम से पूरे प्रदेश में लगभग 759 भवनों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से लगभग 367 का निर्माण हो चूका है जबकि 137 भवनों का कार्य निर्माणाधीन, व 255 विद्यालयों पर अभी कार्य प्रारंभ किया जाना बाकी है. उन्होंने 255 विद्यालयों पर कार्य शुरू न किये जाने पर नाराजगी जताते हुए विभागीय अधिकारियों को उस पर तत्काल कार्यवाही करने के लिए अपर निदेशक गढ़वाल एवंज अपर निदेशक कुमाऊ मंडल को निर्देश जारी किये हैं. उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि संबधित प्रकरण पर कार्यदायी संस्थाओं के साथ बैठक कर त्वरित कार्यवाही करें। वहीँ दूसरी और अपर सचिव शिक्षा व परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियासन राधिका झा ने जानकारी देते हुए बताया है कि 173 विद्यालय पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हैं जिनके लिए 24 करोड़ की धनराशी व 612 विद्यालय आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं जिनके लिए 12.5 करोड़ कि धनराशि का प्रस्ताव पारित किया जा चूका है. उन्होंने बताया कि बच्चों की पढाई प्रभावित न हो इसके लिए एनजीओ सेव टू चाइल्ड से वार्ता हुई है उन्होंने जिला चमोली रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के 15 विद्यालयों में टेंट की व्यवस्था की है. बैठक में अपर सचिव शिक्षा राधिका झा के अलावा निदेशक माध्यमिक शिक्षा सी एस ग्वाल के अलावा केविभागीय अधिकारी व कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के लिए चेक प्रदान किया

देहरादून, 6 अगस्त, । मंगलवार को सचिवालय में हिमाचल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के अध्यक्ष सतीश गोयल ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से भेंट कर 1 लाख रूपये धनराशि का चेक मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के लिए प्रदान किया। यह धनराशि मैसर्स एसएसआईपीएल फाउंडेशन दिल्ली की ओर से दी गई है। गोयल ने हिमाचल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री की ओर से केदारघाटी में आपदा प्रभावित एक गांव को गोद लेने का भी प्रस्ताव दिया। देहरादून के दून ब्लोसम स्कूल की निदेशक श्रीमती मीनाक्षी दीक्षित ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर 49 हजार 111 रूपए धनराशि का चेक मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के लिए प्रदान किया। यह धनराशि स्कूल स्टाफ द्वारा एक दिन के वेतन से एकत्र कर प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

क्षति की गणना संबंधी बैठक संपन्न

रूद्रप्रयाग/देहरादून, 6 अगस्त, । अपर जिलाधिकारी राघव लंघर की अध्यक्षता में उनके कक्ष में मानसून अवधि में आपदा से क्षतिग्रस्त ढाबांे, होटलों एवं अन्य दुकानों के प्रभावितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने एवं संपत्तियों की जांच/क्षति की गणना संबंधित बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा गठित चारों समितियों के सदस्य एवं तृतीय समिति के अध्यक्ष एसडीएम डा. ललित नारायण मिश्र उपस्थित थे। अपर जिलाधिकारी राघव लंघर ने ढाबों, होटल व अन्य दुकानों के वास्तविक मूल्यांकन हेतु प्रभावितों से श्रम विभाग, उद्योग विभाग तथा सराय एक्ट वाणिज्य कर रजिस्ट्रशन एवं बैंक ऋण में से कोई भी अभिलेख संबंधित उपजिलाधिकारी के यहां जमा कराने की अपील की। उन्होनें कहा कि अभिलेख से दुकान के मूल्यांकन में आसानी होंगी। उन्हांेने आपदा से प्रभावित निजी व्यवसायियों से अपने पास उपलब्ध कोई एक अभिलेख संबंधित उपजिलाधिकारियों, पटवारियों, जांच समितियों के सदस्यों अथवा प्रभारी अधिकारी जिला कार्यालय में जमा कराने की अपेक्षा की। प्रभावित व्यवसायी द्वारा नगरपालिका/नगर पंचायत/जिला पंचायत, श्रम विभाग, सराय एक्ट, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, वाणिज्य कर, आयकर रिटर्न, बैंक ऋण, पर्यटन या वीर चन्द्र गढ़वाली योजना, उद्योग केन्द्र में पंजीकरण में से कोई भी एक अभिलेख सम्बन्धित जांच समिति/पटवारी को जमा करने पर संबंधित व्यवसायी के दावे का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा सकेगा। उन्होंने समिति के सदस्यों से कहा कि यह भी उल्लेख करें कि प्रभावित दुकान बीमा कंपनी में बीमित है, कि नहीं। श्री लंघर ने कहा कि जिन व्यवसायियों की दुकाने दैवीय आपदा में पूर्णतः समाप्त हो गयी या नदी के तेज बहाव में बह गई हैं, उनका मूल्यांकन लोनिवि द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर समितियों द्वारा तैयार किया जाए। उन्होंने मूल्यांकन कार्य में चारों समितियों से तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि ढाबों, होटलों और अन्य दुकानों के प्रभावित मालिकों को आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध करायी जा सकें। उन्होंने जांच समितियेां के सदस्यों से अपनी सुस्पष्ट जांच आख्या एक पखवाड़े में जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी दिलीप जावलकर ने जारी आदेश में प्रथम जांच समिति गुप्तकाशी से केदारनाथ धाम तक हुई क्षति के आंकलन हेतु उपजिलाधिकारी ऊखीमठ को अध्यक्ष, अधिशासी अभियंता लो.नि.वि., ऊखीमठ एवं अधिशासी अभियंता सिंचाईखण्ड रूद्रप्रयाग को सदस्य नामित किया हैं। द्वितीय जांच समिति में गुप्तकाशी से सौड़ी पुल तक हुई क्षति के आंकलन हेतु उपजिलाधिकारी जखोली को अध्यक्ष, अधिशासी अभियंता लोनिवि, रूद्रप्रयाग  एवं अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, रूद्रप्रयाग को सदस्य नामित किया गया हैं। तृतीय जांच समिति में सौड़ी पुल से तहसील रूद्रप्रयाग के समस्त क्षेत्र में हुई क्षति के आंकलन हेतु उपजिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को अध्यक्ष, अधिशासी अभियंता, (सिंचाई खण्ड) लो.नि.वि. रूद्रप्रयाग एवं अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा रूद्रप्रयाग को सदस्य नामित किया गया हैं, इसी प्रकार चतुर्थ जांच समिति में तहसील जखोली के समस्त क्षेत्र में हुई क्षति के आंकलन हेतु उपजिलाधिकारी जखोली को अध्यक्ष, अधिशासी अभियंता लो.नि.वि. रूद्रप्रयाग, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान एवं अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा रूद्रप्रयाग को सदस्य नामित किया गया हैं।

अतिरिक्त 108 आपातकालीन सेवा तैनात

देहरादून, 6 अगस्त, । देहरादून शहर से प्रतिदिन प्राप्त होने वाली आपातकालीन मामलों की संख्या को ध्यान में रखते हुये जीवीके ईएमआरआई 108 आपातकालीन सेवा द्वारा देहरादून के आईएसबीटी क्षेत्र में एक अतिरिक्त 108 एम्बुलेंस तैनात करने का निर्णय लिया है। देहरादून में 108 आपातकालीन सेवा के 06 एम्बुलेंस वाहन आम जनता को निशुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। जो डोईवाला, रिस्पनापुल, कोरोनेशन अस्पताल, चन्दर नगर रायपुर तथा प्रेमनगर से अपनी सेवाओं का संचालन कर रही हैं। जीवीके ईएमआरआई 108 आपातकालीन सेवा के स्टेट हैड मनीष टिंकू ने बताया कि देहरादून में 1 अतिरिक्त एम्बुलेंस की तैनाती होने के परिणामस्वरुप आपातकालीन स्थिति के दौरान अधिक से अधिक मामलों में 108 आपातकालीन सेवा द्वारा अपनी सेवाएं प्रदान की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि देहरादून से प्रतिदिन आने वाली आपातकालीन कॉल्स की संख्या को देखते हुये यहॉ पर 06 एम्बुलेंस वाहनों से सेवाओं को संचालित करने में कठिनाई हो रही थी। अनेक बार ऐसी भी स्थितियां उत्पन्न हो जाती थी कि जब 108 सेवा की एम्बुलेंस वाहन किसी अन्य आपातकालीन मामले में व्यस्त होने के कारण दूसरे आपातकालीन मामले में अपनी सेवा नही दे पाती थी, जिसके परिणामस्वरुप आईएसबीटी में एक अतिरिक्त एम्बुलेंस वाहन लगाने का निर्णय लिया गया ताकि और अधिक आपातकालीन मामलों में आम जनता को तत्काल सेवाएं प्रदान की जा सके।

स्थाई निवास प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग 

देहरादून, 6 अगस्त, । राज्य बनने की तिथि से स्थाई निवास प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग समाजवादी पार्टी ने राज्यपाल से की है। आज सपा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रोसत्यनारायण सचान ने कहा कि सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण इतने वर्षों बाद भी सरकारी सेवाओं व आरक्षित सीटों पर निकाय व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ने के लिए स्थाई एवं जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाये जा रहे हैं। इन तेरह वर्षों में आरक्षित वर्गों के सैंकड़ों युवाओं की आवेदन करने की आयु भी निकल गयी है। आवेदकों से अब भी प्रदेश में 1985 से रहने का रिकार्ड मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में अब कई जातियों तथा अन्य पिछड़े वर्ग में शामिल हो जाने के पफलस्वरूप ओबीसी की जनसंख्या 30 प्रतिशत से अधिक हो गयी है। उन्होंने मांग की है कि राज्य बनने की तिथि से सभी को उत्तराखण्ड का स्थाई निवासी मानते हुए प्रमाण पत्र निर्गत किये जायें। शासनादेश के अनुरूप स्थाई निवासी मानते हुए प्रमाण पत्र निर्गत किये जायें। अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत किया जाये। आरक्षण अधिनियम 1994 के प्राविधानों का कड़ाई से अनुपालन किया जाये। सभी पट्टा धारकों को मालिकाना हक दिया जाये।

मनरेगा कर्मचारियों ने दिया धरना

देहरादून, 6 अगस्त, । अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को मनरेगा कर्मचारी संगठन ने परेड ग्राउण्ड में धरना दिया। परेड ग्राउण्ड में धरने पर बैठे मनरेगा कर्मचारियों द्वारा मांग की जा रही है कि उन्हें संविदा कर्मचारी घोषित किया जाये। मनरेगा कर्मियों को यात्रा भत्ते का भुगतान मानदेय के साथ ही किया जाये। उनके लिए गणित व वाणिज्य की अनिवार्यता समाप्त की जाये। मनरेगा से हटाये कर्मियों को बहाल किया जाये। उन्होंने मांग की है कि उन्हें राजकीय अवकाश भी दिये जायें। विभिन्न जिलों में कर्मचारियों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है। इस व्यवस्था को समाप्त कर मानदेय समान रूप से दिया जाये। भविष्य निधि व बीमा योजना का लाभ दिया जाये। धरने पर द्वारिका प्रसाद, भानु प्रकाश, दिग्पाल सिंह, जयप्रकाश तिवारी, सुधीर नेगी तथा राकेश आदि शामिल थे।

उधर प्रभावित एक-एक दाने को मोहताज, इधर सरकार का शाही भोज

देहरादून, 6 अगस्त, । समूचे देश को उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा में हजारों श्रद्धालु व गांव के बाशिंदों के मारे जाने का दर्द है, लेकिन उत्तराखण्ड में आई आपदा में जिस तरह से विश्व बैंक व एडीबी अफसरों के सम्मान में शासन ने बड़े शाही भोज का आयोजन किया वह साबित कर रहा है कि उत्तराखण्ड के शासन तंत्र में इस आपदा में मारे गये लोगों के प्रति कितनी संवेदनशील है। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने शासनतंत्र द्वारा दिये गये शाही भोज को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस आपदा में देश के हजारों श्रद्धालु व पहाड़ों के सैकड़ों बाशिंदे हमेशा के लिए मौत के काल में चले गये वहां का सरकारी तंत्र अगर विश्व बैंक व एडीबी अफसरों को दावत दे रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सरकार आपदा से कितनी संवेदनशील है। उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा को 50 दिन का समय हो गया लेकिन सरकार आपदा पीड़ितों का दर्द नहीं हर पाई। सैकड़ों गांव में बच्चे-बूढ़े खाने के एक-एक दाने को तरस रहे हैं। वहीं इस दैवीय आपदा में शासन ने बीते रोज विश्व बैंक व एडीबी की टीम के लोगों को शीशे में उतारने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी। इन संस्थाओं से मदद लेने के लिए आतुर उत्तराखण्ड शासन की ओर से बीते रोज आईटीबीपी के टाइगर मेस में एक भव्य शाही भोज का आयोजन किया गया। हैरानी वाली बात तो यह है कि इस शाही भोजन में भाग लेने के लिए अधिकारियों को दोपहर में बंद लिफाफे में रात्रि आठ बजे भोज के लिए आमंत्रित किया गया था। भोज का कोई कारण भी नहीं बताया गया। लेकिन इस भोज को विश्व बैंक व एडीबी अफसरों की टीम को खुश करने के लिए दिया गया था। बता दें कि आपदा के बाद 31 जुलाई को विश्व बैंक व एडीबी की टीम ने देहरादून में डेरा डाल रखा था इस टीम को शाही भोज दिये जाने पर भाजपा नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने गहरी नाराजगी दिखाई है और ऐसे भोज के आयोजन की उन्होंने जमकर निंदा की। उनका कहना था इस समय उत्तराखण्ड में आई आपदा से प्रदेश के सैकड़ों बाशिंदे मर गये और लगभग 500 गांव पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं ऐसे में शासन तंत्र द्वारा शाही भोज का आयोजन करना आपदा पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उनका कहना है कि शासन में किस बात की यह दावत दी है क्या जिस संस्था के लिए यह शाही दावत दी गई वह देश की नहीं है? उन्होंने कहा कि आपदा के समय दी गई इस दावत का वह खुलकर विरोध करते हैं उन्होंने कहा इन संस्थाओं के अधिकारियों में इतनी संवेदना होनी चाहिए थी कि वह खुद ही ऐसे मौके पर दावत लेने से इन्कार कर देते। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी संस्थाएं आपदा के समय में भी सरकार को ट्टण देने के लिए शाही दावत ले रही हैं तो उनमें संवेदनशीलता कहंा रह गयी? गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में 16 जून को आई दैवीय आपदा से पूरा देश हिल गया। चारधाम यात्रा में आये हजारों श्रद्धालु जलप्रलय में समा गये और पहाड़ के सैकड़ों बाशिंदे हमेशा के लिए मौत के काल में चले गये। इन गांवोें में रहने वाले हजारों बाशिंदों के सामने आज भी रोजी रोटी व सिर छुपाने की जगह का संकट बना हुआ है। सरकार लगातार दावे करती आ रही है कि वह आपदा ग्रस्त इलाकों में रह रहे बाशिंदों को खाद्यान्न व हर सामान मुहैया करा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी सरकार का तंत्र सैकड़ों गांवों में आर्थिक मदद पहंुचाने में फेल साबित हुआ है। देश के कौने-कौने से आई राहत सामग्री गोदामों में सड़कर खराब हो गई। लेकिन सरकार ने इतनी जहमत नहीं उठाई कि आखिरकार इस सामग्री को किसी तरह पीड़ितों तक पहंुचाया जाए। केदारधाम व रामबाड़ा में हजारों लाशें मलबे के नीचे सड़ गल गई और सरकार ने इतनी जहमत नहीं उठाई की इन शवों को मलवो से बाहर निकालने के लिए वह दम भरती। देश के कई राज्यों से चारधाम यात्रा में आये हजारों श्रद्धालु हमेशा के लिए मौत की नींद सो गये और उनके परिजनों मंे उत्तराखण्ड सरकार के प्रति इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि उसने मलबे के नीचे दबे शवों को बाहर निकालने के लिए कोई पहल नहीं की। अपनों को खो चुके लोगों के आंसू लगातार बह रहे हैं लेकिन सरकार ने इतना दर्द नहीं दिखाया कि जिन लोगों के शव केदारघाटी में मिले उनके परिजनों को इसकी सूचना देकर उन्हें अपनों का अन्तिम संस्कार वहीं करने के लिए बुला लिया जाए। सरकार ने आई आपदा के बाद भले ही अपना सब कुछ खो चुके बाशिंदों की आखों से आंसू पौछने के लिए कोई काम न किया हो लेकिन उसने देश-विदेश से आर्थिक मदद मांगने के लिए अपने हाथ जरूर पसारे थे। जिससे सरकार की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

सैक्स रैकेट का मुखिया दबोचा

देहरादून, 6 अगस्त, । एक सप्ताह पूर्व कोतवाली क्षेत्र में पकडे गए सैक्स रैकेट के एक और आरोपी को पुलिस ने मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने त्यागी रोड पर कार्रवाई करते हुए इस गिरोह का खुलासा किया था। इससे पूर्व पुलिस गिरोह की सरगना सहित चार लोगों को जेल भेज चुकी है। वहीं ईसी रोड पर दंपत्ति के साथ मारपीट करने वाले दो युवकों केा भी आज कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस ने जेल भेज दिया है। लगभग एक सप्ताह पूर्व मुखबिर की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने त्यागी रोड पर स्थित एक होटल में पुलिस ने छापा मारा था। यहां पुलिस ने दो युवतियों सहित दो युवकों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों के साथ गिरोह की सरगना को भी पुलिस ने धर दबोचा था जबकि सरगना का साथी मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने सरगना से पूछताछ की तो पता लगा कि इन लोगों के तार मसूरी के होटलों तक से जुडे हुए थे। इधर मंगलवार को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गिरोह के एक अन्य सदस्य राशिद निवासी सहारनपुर को भी गिरफ्तार कर लिया है। डालनवाला पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार राशिद को आज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। वहीं मसूरी घूमने आए दो कांवड़ियांे को पुलिस ने आज जेल भेज दिया है। इन कांवड़ियांे ने कल डोईवाला निवासी विशाल थापा एवं उनकी पत्नी मोनिका से मारपीट की थी। दंपत्ति से उलझ रहे इन कांवड़ियांे की लोगों ने भी धुनाई कर दी थी जबकि अपने बचाव में विशाल थापा को अपने लाईसेंसी रिवाल्वर से फायर करना पड़ा था। जिस वक्त इन कांवड़ियांे ने इस घटना को अंजाम दिया था उस समय यह दोनों शराब के नशे में धुत्त थे। सोमवार को पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और मंगलवार को कोर्ट मंे पेश करने के बाद दोनों को जेल भेज दिया।

अनियंत्रित ट्रक ने तीन को कुचला

देहरादून, 6 अगस्त, । बाईक लेकर पैदल चल रहे तीन युवकों को अनियंत्रित ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। एक ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया जबकि बाकी दोनों की हालत गंभीर बताई जा रही है। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया जबकि पुलिस ने ट्रक के नंबर के आधर पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। रायवाला थाना क्षेत्र छिद्दरवाला के निकट काली मंदिर के पास दो युवक अपनी खराब बाईक को पैदल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आते ट्रक संख्या यूके 8सी 2329 ने बाईक ले जा रहे युवकों अंकित, किशन एवं हैप्पी को टक्कर मार दी। बुरी तरह से घायल तीनेां युवकों केा स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहंुचाया जहां अंकित ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया जबकि किशन एवं हैप्पी की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियांे का कहना है कि ट्रक चालक बेहद तेज गति में था और उसने पैदल चल रहे तीनों युवकों पर वाहन चढ़ा दिया। दुर्घटना के बाद ट्रक मौके से वाहन लेकर फरार हो गया। पुलिस के अनुसार चालक की तलाश की जा रही है।

एसडीएम का नहीं कुछ पता नहीं चला

देहरादून, 6 अगस्त, । लगातार सरकारी सिस्टम उत्तराखण्ड में तैनात लापता अधिकारियों को खोजने में फेल नजर आ रहा है। पूर्व में लापता हुए हरिद्वार के एसपी सिटी का वर्षो बाद भी कोई सुराग नहीं लग पाया है। वहीं अल्मोड़ा के एसडीएम को मंदाकिनी नदी में बहे 6 दिन का समय हो गया। लेकिन आज तक सरकारी सिस्टम एसडीएम को खोज पाने में सफल नहीं हो पाया जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार अपने लापता अधिकारियों को खोजने में किस तरह से गंभीर है। एसडीएम का परिवार रो बिलख रहा है। लेकिन उनको साहस बंधाने वाला कोई आगे नहीं आ रहा है। वहीं सरकार ने आज तक इस मामले में जांच बैठाने का दम नहीं भरा कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद किन अधिकारियों ने एसडीएम को दुबारा केदारघाटी में तैनात करने के लिए भेजा था। भाजपा नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि 6 दिन बाद भी अगर सरकार अपने अधिकारी को नहीं खोज पा रही है तो आम आदमी को आपदा के समय खोजने के लिए वह कितनी गंभीर होगी इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा के एसडीएम अजय अरोड़ा को केदारघाटी में आई दैवीय आपदा के चलते सरकार ने केदारघाटी भेजा था। 15 दिन तक केदारघाटी में राहत व बचाव कार्य में लगे एसडीएम अजय अरोड़ा को तत्कालीन राहत आयुक्त सचिन कुर्वे ने गुप्तकाशी से रिलीव कर दिया था। एसडीएम का स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्होंने शासन में अपना मेडिकल भेजा लेकिन वहां तैनात कुछ अधिकारियों ने एसडीएम को दुबारा केदारघाटी में तैनात होने की हुंकार भरी और उन्हें वहां न जाने पर निलंबित करने का भी अल्टीमेटम दिया था। शासन के चंद अधिकारियों की हिटलरशाही के चलते आखिरकार एसडीएम को केदारघाटी जाना पड़ा और मंदाकिनी नदी के उपर बनाये गये अस्थाई पुल से वह संदिग्ध परिस्थितियों में पैर फिसलने से मंदाकिनी नदी में बह गये। सरकारी सिस्टम लगातार दावे करता रहा कि हेलीकॉप्टर व पुलिस की टुकड़ियां एसडीएम को नदी के किनारे खोजने के मिशन में लगी हुई हैं। सरकारी सिस्टम यह भी दावा कर रहा है कि कई जगह जाल लगाकर एसडीएम को खोजा जा रहा है, लेकिन सरकारी सिस्टम के इन दावों में कोई गंभीरता देखने को नहीं मिल रही है। कितनी हैरानी वाली बात है कि सरकार के शासन तंत्र में तैनात एक एसडीएम केदारघाटी में राहत व बचाव के काम करने के दौरान बह गया लेकिन सरकार में इतना जोश देखने को नहीं मिला कि वह अपने एसडीएम को खोजने  के लिए सारी ताकत झेंाक दें। सरकार सिर्फ हवाई दावे करने मंे ही लगी हुई है और आज तक किसी भी मंत्री ने सरकारी सिस्टम के साथ मिलकर एसडीएम को खोजने के लिए एक इंच भी साहस नहीं दिखाया। जिससे यह मामला आने वाले समय में काफी पंेचिदा हो सकता है। एसडीएम का परिवार आज भी रो बिलख रहा है। उसे आज भी एसडीएम अजय अरोड़ा के आने की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन यह साफ है कि एसडीएम मंदाकिनी नदी के तेज बहाव में जीवित नहीं हो सकते। ऐसे में अगर एसडीएम का शव सरकारी सिस्टम बरामद नहीं कर पाया तो आने वाले समय में सरकार के लिए एसडीएम का लापता होना उसके लिए एक बड़ा सिरदर्द हो सकता हैं क्योंकि सवाल यह उठ रहे हैं कि जब एसडीएम का स्वास्थ्य खराब था और उन्होंने अपना मेडिकल शासन में भेजा था तो वो कौन अधिकारी थे जिन्होंने एसडीएम का मेडिकल मानने से इंकार करते हुए उन्हें जबरन केदारघाटी भेजने का हुक्म जारी किया था। कितनी आश्चर्य की बात है कि सरकार ने अपने एसडीएम के लापता होने के 6 दिन बाद भी इस मामले में जांच बैठाने का दम नहीं भरा कि आखिरकार किन अधिकारियों ने एसडीएम को स्वास्थ्य खराब हो जाने के बावजूद भी केदारघाटी भेजने का हुक्म जारी किया था। यह भी संभावना है कि अगर जल्द एसडीएम का कुछ पता न चला तो अजय अरोड़ा का परिवार सरकार के खिलाफ न्यायालय की शरण में जा सकता है।

भारी बरसात से राजधानी पानी-पानी, सड़कें बनी तालाब

देहरादून, 6 अगस्त, । मंगलवार को भी राजधानी दून में में मूसलाधार बारिश के तीखे तेवर देखने को मिले। बारिश के कारण कई जगह लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण नदियां उफान पर रही और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन को मजबूर हुए, यही नहीं बारिश के कारण घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस गया और लोगों का कीमती सामान खराब हो गया। वहीं कलैक्ट्रेट कार्यालय में पानी घुस गया और छते भी टपकने लगी, यही हाल डीएसओ कार्यालय का रहा, अनेक सरकारी कार्यालयों में छतों से पानी टप टप टपकता दिखाई दिया। बरसात से जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों में दशहत भर दी, जिस समय बारिश आरंभ हुई उस समय लोग अपने आफिसों के लिए प्रस्थान की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बारिश के कारण उन्हें आफिस पहुंचने में देरी हुई। बारिश के कारण कई स्थानों पर पानी जमा हो गया, जिसके कारण वाहन बमुश्किल आगे बढ़ते दिखाई दिए। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों ने सुरक्षा की दृष्टि से घर पर रहना ही मुनासिब समझा। नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ता देख वह अपना सामान समेटते भी दिखाई दिए। बारिश के कारण कई घरों व कार्यालयों में छतों से पानी टपकने लगा। लोग घरों के ऊपर तिरपाल डालते नजर आए। धर्मपुर, कारगी, पटेलनगर, राजपुर रोड, चकराता रोड, कौलागढ़, प्रेमनगर, रायपुर, नेहरूग्राम, सहारनपुर चौक, कांवली रोड आदि स्थानों पर बारिश के कारण लोगों के घरों में पानी घुस गया। शहर की सड़कें पानी में डूब गईं और मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दून मे हो रही भारी बारिश के कारण बरसाती नदियां उफान पर हैं, ऐसे में इनके किनारे रहने वाले लोगों के आशियानों पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को सर्तकता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। दून की बिंदाल, रिस्पना और टौंस नदियों में बारिश के कारण जलप्रवाह बह रहा है। ऐसे में लोगों के बहने की आशंका प्रबल हो गईं हैं। पूर्व में भी इन नदियों में पानी की अत्यधिक मात्र के कारण लोगों को हटाया जाता रहा है। नदियों से होने वाले कटाव से कुछ दूरी पर स्थिति घरों को भी खतरा पैदा हो गया है। सुरक्षा के लिए बनाए गए पुश्ते पानी की तीव्रता को नहीं झेल पा रहे हैं और पूर्व में ढह चुके हैं, जिसके चलते हालात भयावह हो चले हैं। बरसात ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया, मूसलाधर बरसात ने सभी को सकते में डाल दिया, दीपनगर, क्लेमेनटाउन, परेड ग्राउंड तिब्बती मार्केट, सर्वे चौक, प्रिंस चौक, त्यागी रोड, सहारनपुर रोड, बुद्धा चौक, चुक्खूवाला, इंदिरा कालोनी, चन्दरनगर, चन्दर रोड, रायपुर रोड, जीएमएस रोड, निरंजनपुर, एस्ले हॉल, नेशविला रोड, कांवली रोड, रेसकोर्स, डालनवाला, चन्द्र रोड, रायपुर रोड, राजपुर रोड, जाखन, इन्दर रोड, प्रीतम रोड, कर्जन रोड, डीएल रोड सहित अन्य स्थानों पर जल भराव होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पडा। सडकों, गलियों आदि स्थानों पर पानी की निकाली न होने पर जल भराव की स्थिति रही और इससे कई स्थानों पर जाम लगा रहा, लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पडा।


(राजेन्द्र जोशी)

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