बंद कमरे में हुई सत्तारूढ़ विधायकों व मंत्रियों की बैठक
- हंगामे के बीच कई विधायकों ने मुख्यमंत्री पर कसे तंज
देहरादून, 19 अगस्त। जिन विधायकों की बदौलत मुख्यमंत्री की कुर्सी विजय बहुगुणा को मिली सोमवार को 17 महीने बाद वे उनसे पहली बार रूबरू हुए और उनकी समस्याओं को भी उन्होंने सुना। कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री को गरियाया तो कुछ विधायकों ने सरकार पर आपदा के दो महीने गुजर जाने के बाद भी नकारेपन का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री सबकी बातों को ध्यान से सुन रहे थे, क्योंकि उन्हें पता था कि यदि इस वक्त वे कुछ बोले तो आपे से बाहर जो चुके विधायक कहीं हंगामा न खड़ा कर दें और इसकी गूंज दिल्ली तक न पहुंच जाए। हालांकि यह बैठक दिल्ली में बैठे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के इशारे पर हुई, क्योंकि प्रदेश के विधायक पिछले कई महीनों से विधानमंडल दल की बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे और मुख्यमंत्री उनकी बातों को अनसुना कर रहे थे। यही कारण है कि मुख्यमंत्री से नाराज विधायकों की आवाज जब दस जनपथ तक पहुंची तो मुख्यमंत्री को विधानमण्डल दल की बैठक बुलाने की मजबूरी आ पड़ी। वैसे भी प्रदेश के विधायकों का एक गुट मुख्यमंत्री के कार्यकलापों से खुश नहीं है और वह गाहे-बगाहे मुख्यमंत्री के नाक में दम किए हुए हैं। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा बुलायी गई विधानमंडल की बैठक का उददेश्य प्रत्यक्ष रुप में आपदा राहत कार्यो की स्थिति की समीक्षा करना है लेकिन इस बैठक के पीछे आपदाकाल में सामने आयी अपनों की नाराजगी को दूर करना भी इस बैठक के परोक्ष कारणों में निहित है। सोनिया गांधी के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर बुलायी गयी इस बैठक के जरिए अपने मंत्री और विधायकों को यह समझाना चाहते है कि किसी के भी क्षेत्र की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जायेगा। यही नहीं सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल और एकजुटता का प्रयास भी इस बैठक का अहम उददेश्य है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा सोमवार को कैंट रोड स्थित कैंप कार्यालय में विधानमंडल की बैठक बुलायी गयी जिसमें सभी मंत्रियों और विधायकों के साथ-साथ सरकार के सहयोगी दलों के नेताओं ने भी भाग लिया। इस बैठक को बुलाने की लम्बे समय से मांग की जा रही थी। हालांकि इस बैठक में केंद्रीय प्रभारी अंबिका सोनी नहीं आ सकीं और उनकी जगह सहप्रभारी संजय कपूर उपस्थित रहे। यहां यह उल्लेखनीय है कि आपदा राहत कार्यो को लेकर विपक्ष ही नहीं कांग्रेस के कई विधायक और मंत्री मुख्यमंत्राी को अपनी नाराजगी जता चुके हैं। केदारनाथ विधायक शैला रानी, हरीश धामी एंव मनोज तिवारी आदिउनके कई सहयोगी मुख्यमंत्री की कार्यशैली और व्यवहार पर उनके भिड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा नहीं चाहते कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के राज्य के दौरे पर आने के समय उनकी ही पार्टी के विधायक या मंत्री उनके सामने इस तरह की किसी समस्या को रखे जिससे मुख्यमंत्री की मुश्किलें और अधिक बढ़ जायें। अपने सहयोगियों की नाराजगी पर हालांकि मुख्यमंत्री बड़े नरम लहजें में यह कहते रहे है कि जब किसी भी क्षेत्र के लोगों को परेशानियां होती है तो जनप्रतिनिधियों का नाराज होना स्वाभाविक है लेकिन यह जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार और अपने ही मुख्यमंत्री से नाराज है और उनके कामों से असंतुष्ट यह बात कम से कम हाई कमान तक तो नहीं जानी चाहिए। आज की बैठक में मुख्यमंत्री का सबसे पहला काम यही रहा कि जिन विधायकों और मंत्रियों ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाया गया। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हंें न सिर्फ गंभीरता से सुना गया बल्कि उन समस्या के समाधान के लिए भी गंभीर प्रयास करने की बात कही गयी। अधिकांश विधायक और मंत्रियों ने इस बैठक में उन लोगों के पुर्नवास का मुददा उठाया।
प्रदेश में आपदा के दो माह बाद भी 453 मार्ग खुल नहीं पाए
- प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को कना पड़ रहा दिक्कतों का सामना
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। राज्य में आपदा के दो माह बीत जाने के बाद भी कई मार्ग यातायात के लिए अवरुद्ध पड़े हैं। मार्गों के अवरुद्ध पड़े होने के कारण आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को अपने जरूरी कार्यों के लिए बाजार जाने के लिए कई किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। आपदा से क्षतिग्रस्त 2,283 मार्गों में से 1,830 मार्ग अस्थाई रूप से यातायात खुल पाए हैं, 453 मार्ग अभी खुल नहीं पाए हैं। आपदा परिचालन केन्द्र देहरादून से प्राप्त सूचना के अनुसार लोनिवि, प्रांतीय खण्ड, देहरादून लम्बीधार किमाडी मोटर मार्ग बन्द है। लोनिवि, निर्माण खण्ड, देहरादून कार्यालय वाली सडक बन्द है। लोनिवि ऋषिकेश से सम्बन्धित 3 सडकें बन्द हैं। सूर्यधार सनगाव मोटर मार्ग बन्द है। तंगोली बडेरना सम्पर्क मार्ग बन्द है। इठारना सम्पर्क मार्ग बन्द है। लोनिवि सहिया से सम्बन्धित 17 मार्ग बन्द है। लक्स्यार लुधेरा क्यारी कच्टा मोटर मार्ग बन्द है। पंजिटिलानी मंजरा सरऊ मोटर मार्ग बन्द है। समर जैन मोटर मार्ग बन्द है। कोरवा क्वारना मोटर मार्ग बन्द है। चकराता, मसूरी, त्यूनी, नई टिहरी, कीर्तीनगर मोटरमार्ग बन्द है। रानी गांव सम्पर्क मार्ग बन्द है। सकनी पंजिया मोटर मार्ग बन्द है। लेल्टा पाटा मन्डोली मोटर मार्ग बन्द है। कोटी डिमउ लेल्टा मोटर मार्ग बन्द है। पंजिटिलाीनी चन्देऊ सुपेऊ केराऊ मोटर मार्ग बन्द है। हरिपुर इच्छाडी मोटर मार्ग बन्द है। बिजऊ क्वेटा खतार मोटर मार्ग बन्द है। कोटी डिमऊ डाण्डा मोटर मार्ग बन्द है। कालसी बैराटखाई मोटर मार्ग बन्द है। दौंदा सम्पर्क मार्ग बन्द है। गौराघटी मान्थात मोटर मार्ग बन्द सकनी ककाडी मोटर मार्ग बन्द है। ऋषिकेश-केदारनाथ राजमार्ग कुण्ड तक तथा उखीमठ-गोपेश्वर मार्ग यातायात के लिए खुले हैं। रुद्रप्रयाग जनपद में 19 मार्ग अवरूद्ध हैं, जिसके अंतर्गत मयाली-गुप्तकाशी मार्ग पांजणा में मलबा आने से अवरूद्व हैं। कर्णप्रयाग-रानीखेत-काठगोदाम, कर्णप्रयाग-पोखरी, गोपेश्वर-ऊखीमठ तथा सिमली-नारायणबगड़ मार्ग यातायात के लिए खुले हैं। ऋषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग पातालगंगा एवं पागलनाला में, गोपेश्वर-पोखरी मार्ग हाफला में, नारायणबगड-थराली तथा नन्दप्रयाग-घाट, के साथ ही चमोली जनपद में 63 मार्ग मलबा आने से अवरूद्व हैं। बागेश्वर-अल्मोड़ा, कपकोट-बागेश्वर-शामा तथा कपकोट-पिण्डर मोटर मार्ग यातायात के लिए खुले हैं। चिन्यालीसौड़-सुवाखोली-मसूरी-देहरादून, उत्तरकाशी- धोहतरी, डामटा-देहरादून तथा धरासू-बड़कोट मार्ग यातायात के लिए खुले हैं। ऋषिकेश-गंगोत्री राजमार्ग नालूपानी एवं गंगोरी में तथा ऋषिकेश-यमुनोत्री राजमार्ग राणाचट्टी एवं सिलाई बैंड में मलवा आने से अवरूद्ध हैं। घाट-पिथौरागढ़-ओगला-जौलजीवी-बलुवाकोट-धारचूला राजमार्ग के साथ ही धारचूला-तवाघाट-पांगला राजमार्ग एलागाड़ तक, जौलजीवी-मदकोट मार्ग बंगापानी तक, मुनस्यारी-मदकोट, तेजम-सामा (कपकोट), पिथौरागढ़- झूलाघाट तथा बेरीनाग-राईआगर-सेराघाट मार्ग यातायात के लिए खुले हैं। थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग हरड़िया तथा रातीगाड़ में तथा तवाघाट-सोबला मार्ग मलवा आने से अवरूद्ध हैं, जबकि कंजोती-नारायण आश्रम मार्ग कन्ज्योती में पुल टूटने के कारण अवरूद्व है। खैरना-अल्मोड़ा राजमार्ग, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़, बागेश्वर- अल्मोड़ा तथा चौखुटिया-बछुवाबाण मार्ग यातायात के लिए खोल दिए गए हैं। जनपद में 9 मार्ग अवरूद्व हैं। रामनगर-बुवाखाल राजमार्ग के साथ ही कालागड़- कोटद्वार, पौड़ी-श्रीनगर, पौड़ी-देवप्रयाग, पौड़ी- दुगड्डा-नजीबाबाद तथा पौड़ी-सतपुली मोटर मार्ग यातायात के लिए खोल दिए गए हैं। ऋषिकेश-टिहरी, चम्बा-ऋषिकेश, चम्बा-मसूरी, चम्बा-उत्तरकाशी, घनसाली-टिपरी-देवप्रयाग, घनसाली-टिपरी-नई टिहरी तथा छाम-कण्डीसौड़ मार्ग यातायात के लिए खोल दिए गए हैं। भवाली-अल्मोड़ा राजमार्ग, हल्द्धानी-अल्मोड़ा राजमार्ग तथा भुजान-बेतालघाट-गर्जिया मार्ग खुल गए हैं। जनपद में 5 ग्रामीण मोटर मार्ग अवरूद्व है। टिहरी जनपद में 5 ग्रामीण मोटर मार्ग अवरूद्व है।
निगम की जमीन को बिल्डर को बेचा, मेयर ने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखकर की जांच की मांग
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। उत्तराखण्ड सरकार दावे कर रही है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उनके कब्जे से जमीनों को मुक्त कराया जाएगा। लेकिन राजपुर के डायवर्जन में लीज़ पर दी गई निगम की जमीन को एक व्यक्ति ने बिल्डर को बेच डाला। जिसने मंत्री की शह पर वहां फ्लैट बनाने का खेल शुरू कर रखा है। देहराूदन नगर निगम के मेयर विनोद चमोली को को इस कब्जे में निगम के अधिकारी व कई विभागों के अधिकारियों के कोकस के शामिल होने की आशंका है। जिसके चलते उन्होंने सोमवार को मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जमीन कब्जाने वाले पूरे कोकस की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। आशंका यहां तक है कि बिल्डर को प्रदेश के एक मंत्री का आर्शीवाद मिला हुआ है। जिसकी शह पर निगम की जमीन पर कब्जा कर उसमे अवैध रूप से फ्लैट बनाने का खेल खेला जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम ने वर्ष 2002 में मसूरी डायवर्जन पर एक बड़ी जमीन को लीज़ पर दिया था। लीज़ पर दी गई जमीन पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया। लेकिन चर्चा रही कि लीज़ पर जमीन लेने वाले व्यक्ति ने नगर निगम की बेशकिमती जमीन को एक बड़े बिल्डर को बेच डाला। बताया जा रहा है कि इस जमीन के साथ बिल्डर द्वारा फ्लैट बनाने के लिए जमीन खरीदी गई और उसने प्रदेश के एक बलवान मंत्री की शह पर नगर निगम द्वारा लीज़ पर दी गई जमीन पर भी अवैध रूप से फ्लैट बनाने का काम शुरू कर रखा है। जिसको लेकर यह सवाल उठ रहे है कि आखिरकार सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे पर सरकार क्यों मौन धारण किए हुए है? राजधानी के मेयर विनोद चमोली को नगर निगम द्वारा लीज़ पर दी गई जमीन को बिल्डर के हाथों बेचे जाने के मामले में कुछ बड़े अधिकारियों के कोकस के शामिल होने की बू आ रही है। चर्चा है कि मेयर को आशंका है कि इस खेल में निगम, एमडीडीए व कुछ अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हो सकते है। नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से फ्लैट बनाए जाने से नाराज निगम के मेयर विनोद चमोली ने सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उनसे इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। जिससे की वो लोग बेनकाब हो सके जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से फ्रलैट बनाने के खेल में लगे हुए है। मेयर के पत्र से यह बात तो साफ हो गई कि राजधानी मेें भूमाफियाओं का एक बड़ा नेटवर्क आज भी धड़ल्ले से सरकारी जमीनों पर कब्जे कर रहा है।
मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा देहरादून का बिन्हार क्षेत्र
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। देहरादून जनपद का बिन्हार क्षेत्र आजादी के कई वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बिन्हार क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं जिस कारण बिन्हार के गांव उजड़ते जा रहे हैं। लगभग 70 किमी क्षेत्रफल में फैले बिन्हार क्षेत्र में अभी एक स्वास्थ्य उपकेंद्र तक नहीं है। लोगों को छोटी सी बीमारी के इलाज के लिए भी विकासनगर, सहसपुर या देहरादून जाना पड़ता है, जिस कारण लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बिन्हार विकासनगर ब्लॉक का अत्यंत पिछड़ा इलाका है। यह बिन्हार क्षेत्र अंतर्गत बावनधार, मदर्सू, भलेर, पष्टा, पपडिय़ान, मटोगी, कोल, हथियारी, स्वाण, समेट, नया खील, किनार खील, अंगरी गांव, निमरोड़ा, जाखन, कांडोई, भदोगी, मोलावाला, पिपलसार, नटीखेत, निमाइला, क्यारी, देवीथला, जाड़ी समेत ढाई दर्जन से अधिक गांव आते हैं। इस पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। पलायन के चलते बिन्हार क्षेत्र की आबादी आठ हजार के करीब रह गई है। स्वास्थ्य सुविधा न होने से लोगों को इलाज के लिए सीएचसी विकासनगर, सीएचसी सहसपुर या फिर देहरादून जाना पड़ता है। दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में समय पर उपचार न मिलने पर कई बार तो मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। अस्पताल दूर होने के कारण मरीजों को आने-जाने में काफी समय लग जाता है जिस कारण समय की बर्बादी तो होती ही है साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। क्षेत्र के कई गांव अभी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं जिस कारण लोगों को कई किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। सामान पीठ पर या खच्चरों में ढोना पड़ता है। इन गांवों में सिंचाई साधनों का अभाव बना हुआ है, खेती पूर्ण रूप से इंद्रदेव की कृपा पर निर्भर है। पेयजल योजनाओं के अभाव में लोगों को प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। क्षेत्र में हाईस्कूल अब खुल सका है, इसमें भी बच्चों को जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जा रहा है। इंटर कालेज पूरे क्षेत्र में अभी भी नहीं है। क्षेत्र की जनता लगातार उपस्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग कर रही है लेकिन सरकार ने इस ओर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया। जनप्रतिनिधि भी इस ओर उदासीन बने हुए हैं। जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी से लोगों में रोष व्याप्त है।
शिक्षा आचार्यों व अनुदेशकों ने उग्र आंदोलन को चेताया
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। बेरोजगार शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक संगठन का स्नातक योग्यताधारी शिक्षा आचार्यों एवं अनुदेशकों को शिक्षामित्र के रूप में समायोजित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना जारी है। शिक्षा आचार्यों का कहना है कि सरकार उनके धैर्य की परीक्षा न ले। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक संगठन द्वारा शिक्षामित्र के रूप में समायोजित करने की मांग को लेकर लैंसडाउन चौक स्थित पुराना रायपुर बस स्टैंड पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा वर्ष 2008 में ईजीएस एवं एआईई सेेंटरों को बंद कर दिया गया था। ईजीएस एवं एआईई सेेंटरों को बंद किए जाने से इनमें कार्यरत 1745 शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक बेरोजगार हो गए थे। सरकार ने 18 जुलाई 2010 को शासनादेश जारी कर प्रथम चरण में स्नातक योग्यताधारी 1,107 शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों को शिक्षामित्र के रिक्त पदों पर वरिष्ठता के आधार पर आरक्षण के प्राविधानों के अनुरूप समायोजित कर दिया था लेकिन जो शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक रह गए थे उन्हें अभी तक समायोजित नहीं किया गया है। वर्ष 2011-12 तक स्नातक योग्यता हासिल करने वाले 1,745 शिक्षा आचार्यों एवं अनुदेशकों को शीघ्र शिक्षामित्र के रूप में समायोजित किया जाए। शिक्षामित्र के पदों पर समायोजित न किए जाने से ईजीएस एवं एआईई सेेंटरों को बंद किए जाने से बेरोजगार हुए शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों के समक्ष आजीविका का संकट पैदा हो गया है। संगठन का कहना है कि प्रदेश में शिक्षामित्रों के 1,797 पद रिक्त चल रहे हैं, लेकिन सरकार इन पदों पर शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों का समायोजन नहीं कर रही है, जबकि शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक समायोजन की मांग को लेकर आंदोलनरहत हैं। /
मांगों को लेकर मनरेगा कर्मियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) कर्मचारी संगठन का आठ सूत्री मांगों को लेकर धरना जारी है। संगठन का कहना है कि मनरेगा कर्मचारियों को समायोजित करते हुए संविदा कर्मचारी घोषित किया जाए व उनके मानदेय में बढ़ोत्तरी की जाए। इसके अलावा संगठन ने हटाए गए कर्मचारियों को बहाल किए जाने की भी मांग की। मनरेगा कर्मियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर लैंसडाउन चौक स्थित पुराने रायपुर बस स्टैंड पर धरना दिया जा रहा है। मनरेगा कर्मियों ने सरकार के इस आश्वासन के बाद कि इस मामले को कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा पर आमरण अनशन तो समाप्त कर दिया लेकिन धरना जीओ जारी होने तक जारी रहेगा। मनरेगा कर्मियों का कहना है कि ग्राम रोजगार सेवक का मानदेय 4,350 से बढ़ाकर 15000, तकनीकी सहायक का मानदेय 8,700 से बढ़ाकर 22000, डाडा इंट्री ऑपरेटर का मानदेय 7,250 से बढ़ाकर 18,000 और उप कार्यक्रम अधिकारी का मानदेय 12000 से बढ़ाकर 28,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। यात्रा भत्ता को निश्चित यात्रा भत्ता मानकर मानदेय के साथ भुगतान किया जाए। प्रदेश के विभिन्न जिलों में गणित और वाणिज्य विषय की अनिवार्यता के कारण बाहर हुए कर्मचारियों को बहाल किया जाए और वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों पर गणित और वाणिज्य विषय का प्रतिबंध समाप्त किया जाए। कार्यरत कर्मचारियों पर उम्र की बाध्यता समाप्त की जाए। विभिन्न जिलों में हटाए गए कर्मचारियों को बहाल किया जाए और भविष्य में यदि शासन किसी भी प्रकार की नई नियुक्तियां करता है तो कार्यरत कर्मचारियों को यथावत रखते हुए शेष रिक्तियों पर ही नई नियमावली लागू की जाए। मनरेगा कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह राजकीय अवकाशों का लाभ प्रदान किया जाए। विभिन्न जिलों में कार्यरत कर्मचारियों को एक पद पर अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है, जबकि शासनादेश-2009 के तहत सभी कर्मचारियों को प्रदेशभर में समान मानदेय दिए जाने की व्यवस्था है। धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद नौटियाल ने कहा कि कार्यरत कर्मचारियों को भविष्य निधि और बीमा योजनाओं का लाभ दिया जाए। यदि सरकार द्वारा उनकी मांगें न मानी गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। धरने में रमेश गड़िया, द्वारिका प्रसाद देवली, विमल राणा, विजेंद्र जगूड़ी, भानु प्रकाश उनियाल, राकेश बिष्ट, सुंदरमणि सेमवाल, मनोज पाल, कृष्ण कुमार बहुगुणा, रामस्वरूप, शूरवीर सिंह आदि शामिल हुए।
आपदा राहत राशि वितरित
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। प्रभारी अधिकारी आपदा कन्ट्रोल रूम हरिद्वार से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक आपदा प्रभावितों को 3 करोड़ 69 लाख 57 हजार 705 रू. की राहत राशि वितरित की गई है। उन्होंने कहा कि राहत राशि में अनुगृह अनुदान के अन्तर्गत 75 लाख 45 हजार, अहैतुक सहायता के अन्तर्गत 1 करोड़ 33 लाख 96 हजार रू., भवनों की क्षति पर 28 लाख 44 हजार 400 रू. वितरित किया गया। इसी प्रकार पशुपालन हेतु 2 लाख 6 हजार 200 रू. तथा कृषि के अन्तर्गत 1 करोड़ 29 लाख 66 हजार 105 रू. की राहत सहायता वितरित की गई। जनपद में कुल 47 मार्ग अवरूद्ध हुए थे जिनमें से अब तक 39 मार्गों को यातायात हेतु खोला जा चुका है तथा 8 अवरूद्ध मार्गों को खोलने की कार्यवाही की जा रही है।
धूमधाम से मनाई गई स्व. बड़ोनी की 15 वीं पुण्यतिथि
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। उत्तराखण्ड आंदोलन के प्रणेता स्व. इन्द्रमणि बड़ोनी की 15वीं पुण्यतिथि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संघर्ष समिति और आंदोलनकारी मंच के संयुक्त तत्वावधान में धूमधाम से मनाई गई। आंदोलनकारियों ने उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।हरिद्वार मार्ग स्थित शहीद स्मारक में आयोजित श्रद्धांजलि सभा मंे प्रदेश के विभीन्न जनपदों के आंदोलनकारियों ने प्रतिभाग किया। उन्होने स्व. बड़ोनी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर,उन्हे श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि जिन सपनों को लेकर बड़ोनी ने पृथक उत्तराखण्ड के लिए आवाज बुलंद की थी, वह कहीं नजर नहीं आ रहा। प्रदेश में चारों ओर अराजकता का माहौल है, भ्रष्टाचार चरम पर है। ऐसे में एक बार फिर से एक नए आंदोलन की आवश्यकता है। वक्ताओं ने प्रदेश में आई दैवी आपदा के बाद राहत बचाव कार्य को नाकाफी बताया। साथ ही प्रदेश सरकार को विफल करार दिया। कहा कि सरकार आपदा प्रभावितांे को राहत पहुंचाने मे दो माह बाद भी कामयाब नहीं हो पाई है। कई जगह प्रभावित आज भी मीलों पैदल चलकर राहत सामग्री ले जा रहे है। प्रभावितों के लिए कोई कार्य योजना नहीं बनाई गई है न ही अभी तक आपदा में मारे गए लोगों के आंकड़े ही जुटाए जा सके हैं। कार्यक्रम मंे राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की पूर्व अध्यक्ष उषा रावत मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी समिति अध्यक्ष वेदप्रकाश शर्मा रामलाल रतूडी हर्षपाल काला, जेपी पांडे, डा. अमर सिंह, मीरा रतूडी, चंद्रावती गौड, डीएस गुसाई, गंभीर मेवाड, विक्रम भंडारी, राजा भटट, द्वारिका भटट, मोहन बलोदी, वीरेंद्र शर्मा, महावीर सिंह नेगी, रकेश मियां, प्रेम सिंह, संजय शास्त्री, प्यारेलाल जुगरान आदि मोजूद थे।
राज्यपाल से मिले जनसंघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि व अन्य
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। उत्तराखण्ड के राज्यपाल डॉ0 अज़ीज़ कुरैशी से आज जन संघर्ष मोर्चा उत्तराखण्ड के छः सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में आये इस प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें प्रदेश की औद्योगिक इकाईयों में स्थानीय युवा बेरोजगारों को उप-जिलाधिकारी द्वारा प्रदत्त स्थाई निवास प्रमाण पत्र को आधार मानकर नियुक्तियां दिए जाने एवं नियुक्तियों में 70 प्रतिशत आरक्षण सम्बन्धी शासनादेश का सख्ती से अनुपालन कराये जाने के लिए सरकार को निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है। राज्यपाल से मुलाकातों के क्रम में दिल्ली से आये कांग्रेस सेवा दल के नवनीत कुमार कालरा व उनके सहयोगियों ने भी राज्यपाल से भेंट की।
राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का शुभारम्भ आज से
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। जिलाधिकारी देहरादून आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने अवगत कराया है कि उत्तराखण्ड राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का शुभारम्भ मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड विजय बहुंगुणा द्वारा दिनांक 20 अगस्त 2013 को 11 बजे नगर निगम टाउन हाल देहरादून में किया जायेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री उत्तराखण्ड शासन प्रीतम सिंह द्वारा की जायेगी।
खण्डूडी कुमाऊॅ एवं गढ़वाल मण्डल के आपदा ग्रस्त क्षंेत्रों के भ्रमण पर
देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। मेजर जनरल (से0नि0) भुवन चन्द्र खण्डूड़ी पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड 19.08.2013 से 23.08.2013 तक कुमाऊॅ एवं गढ़वाल मण्डल के आपदा ग्रस्त क्षंेत्रों के भ्रमण में रहेगें। वहां वे आपदाग्रस्त क्षेत्रों में लोगों की समस्याऐं सुनेगें एवं आपदाग्रस्त क्षेत्र में हो रहे राहत कार्यो के विषय में भी जानकारी लेगें। 24.08.2013 एवं 25.08.2013 को रामनगर में हो रही प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेगें। पूर्व मुख्यमंत्री 19.08.2013 रात्री को रेल से देहरादून से चलकर 20.08.13 की सुबह हलद्वानी पहॅचेगें। हलद्वानी से चलकर सितारगंज, नानकमत्ता, खटीमा होते हुए एन0एच0पी0सी0 गेस्ट हाउस बनबासा पहुॅचेगें। बनबासा में कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रीय जनता से भेंट करेगें। बनबासा से चलकर चम्पावत लोहाघाट रूककर कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रीय जनताओं से भेंट कर रात को पी0डब्लू0डी0 गेस्ट हाउस पिथौड़ागढ़ पहुॅचकर कार्यकर्ताओं से भेंट करेगें। 21.08.13 की सुबह पिथोड़ागढ से चलकर कनालीछिना , जैलजीवी इत्यादि स्थानों से होते हुए पी0डब्लू0डी0 गेस्ट हाउस धारचुला पहुॅचकर आपदा पीड़ितों से मिलकर उनके विषय में जानेगें एवं राहत कार्याे के विषय में जानकारी लेगें। धारचुला में ही उसी दिन 11.45 बजे पत्रकार वार्ता भी करेगंे। उसके बाद वरम, डीडीहाट, थल होते हुए कुमाउ मण्डल विकास निगम चौकड़ी पहॅुचेगें। 22.08.13 को सुबह चौकड़ी से चलकर बागेश्वर होते हुए कपकोट पहुॅचेगें। कपकोट में आपदा के सम्बन्ध में चर्चा करेगें एवं कार्यकर्तााओं से भेंट करेगें। कपकोट से चलकर बागेश्वर होते हुए बैजनाथ/ गरूड़/कुमाऊॅ होते हुए कार्यकर्ताओं से भेंट करेगें एवं आपदा के विषय में जानकारी लेते हुए एस0एस0बी0 गेस्ट हाउस ग्वालदम, चमोली पहुंचेगें। 23.08.2013 की प्रातः ग्वालदम से चलकर थराली, देवाल होते हुए वापस ग्वालदम पहुॅचेगें। ग्वालदम से चलकर कोसानी, रानीखेत, भवाली होते हुए नैनीताल पहुॅचेगें। 24.08.2013 को नैनीताल से चलकर रामनगर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेगेें। 25.08.2013 को भी रामनगर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेगेें ।
विस अध्यक्ष 20 अगस्त को कपकोट में
बागेश्वर/देहरादून, 19 अगस्त, (राजेन्द्र जोशी)। अध्यक्ष विधानसभा, उत्तराखण्ड, गोविन्द सिंह कुंजवाल अपने निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार 20 अगस्त को अल्मोड़ा से प्रातः 8 बजे प्रस्थान कर कार द्वारा वया ताकुला 11.30 बजे कपकोट पहुॅचेंगे। कपकोट पहुॅंचकर समाज सेवी व होटल व्यवसायी स्व० जगत सिंह बिष्ट के परिवारजनों को शोक संवेदना व्यक्त करेंगे। उसके पश्चात् 12ः30 बजे कपकोट से प्रस्थान कर 1.30 बजे बागेश्वर पहुॅंचेंगे। लो०नि०वि० गेस्ट हाउस बागेश्वर में अल्प विश्राम के बाद 2.30 बजे हल्द्वानी के लिए प्रस्थान करेंगे। यह जानकारी प्रभारी अधिकारी जिला कार्यालय से प्राप्त हुई है।

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