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समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को उस समय बड़ी राहत मिली, जब सीबीआई ने उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति से जुड़ा छह वर्ष पुराना मामला साक्ष्य के अभाव में बंद कर दिया।
सीबीआई ने शुक्रवार को इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी। गौरतलब है कि इस मामले के याचिकाकर्ता ऐडवोकेट विश्वनाथ चतुर्वेदी ने इसकी आशंका जुलाई में ही जाहिर कर दी थी। उन्होंने तब आरोप लगाया था कि यूपीए सरकार और समाजवादी पार्टी के बीच हुई डील के तहत संसद के मॉनसून सेशन के बाद मुलायम के खिलाफ केस बंद कर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि एजेंसी इस मामले में मुलायम सिंह यादव की तरफ से पेश किए तथ्यों से संतुष्ट है। यादव के चार्टर्ड अकाउंटेट ने 1993 से 2005 की बीच जुटाई गई संपत्ति के स्रोतों के बारे में जो प्रमाण दिए, उसे एजेंसी ने सही पाया है। सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि अब इस मामले में और जांच का कोई औचित्य नहीं है।
सीबीआई की इस क्लोजर रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी कहा कि उन्हें पता था ऐसा ही होगा। चतुर्वेदी ने कहा कि सीबीआई को यह केस बंद करने की वजह कोर्ट को बतानी होगी। गौरतलब है कि चतुर्वेदी ने 2005 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि मुलायम सिंह, उनके दोनों बेटों अखिलेश व प्रतीक यादव और बहू डिंपल यादव ने आय से ज्यादा संपत्ति जमा की है। उन्होंने इस बारे में दस्तावेज भी जमा कराए थे। इस पीआईएल की सुनवाई कर 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच का निर्देश दिया था। तब से सीबीआई की प्राथमिक जांच चल रही थी।
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