उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के कुछ दिनों बाद सरकार ने 23 सितंबर को राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक बुलायी है। बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि सांप्रदायिकता से मुकाबला किस तरह किया जाए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली 148 सदस्यीय राष्ट्रीय एकता परिषद सांप्रदायिकता, जातिवाद और क्षेत्रवाद की बढ़ती समस्या पर गहन चर्चा करेगी और इस पर भी बात की जाएगी कि इन समस्याओं से कैसे निपटा जाए।
केंद्रीय मंत्री, लोकसभा एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष, राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एनआईसी के सदस्य होते हैं। राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेता, राष्ट्रीय आयोगों के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार, सार्वजनिक जीवन की जानीमानी हस्तियों और कारोबारी घरानों तथा महिला संगठनों की प्रतिनिधियों को भी एनआईसी का सदस्य नियुक्त किया जाता है। एनआईसी का गठन 1960 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था । एनआईसी की पहली बैठक 1962 में हुई थी । इसकी आखिरी बैठक 10 सितंबर 2011 को हुई थी जिसमें सांप्रदायिक हिंसा और सांप्रदायिकता के मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
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