झारखंड में एक तरफ महिलाओं के प्रति अत्याचार के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं और दूसरी तरफ राज्य महिला आयोग में एक भी सदस्य नहीं है और न ही कोई अध्यक्ष है। आयोग की एक पूर्व सदस्य ने सोमवार को यह बात कही। झारखंड राज्य महिला आयोग (जेएससीडब्ल्यू) में चार सदस्य और एक अध्यक्ष को तीन साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है।
पिछली बार आयोग में दो सदस्य वास्वी किडो और अनुराधा चौधरी थे, जिनका कार्यकाल 22 अगस्त को समाप्त हो चुका है। वहीं अध्यक्ष हेमलता एस. मोहन का कार्यकाल छह सितंबर को पूरा हुआ है। पैनल के पूर्व सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद से पैनल में सदस्यों और अध्यक्ष के पद खाली हैं।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक इस साल राज्य में दुष्कर्म के कुल 799 मामले दर्ज हुए हैं और हर बार पीड़ितों को न्याय पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। किडो ने आईएएनएस को बताया, "हमें कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रही महिलाओं के फोन कॉल आते हैं। अब हम आयोग के सदस्य नहीं हैं, इसलिए हम अधिकारिक रूप से उनकी कोई मदद नहीं कर सकते हैं।" किडो ने राज्य सरकार से राज्य महिला आयोग में सदस्यों और अध्यक्ष की त्वरित नियुक्ति करने का आग्रह किया है।

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