अमेरिका के 'नेशनल बुक अवार्ड' की उपन्यास श्रेणी में नामित झुंपा लाहिड़ी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

अमेरिका के 'नेशनल बुक अवार्ड' की उपन्यास श्रेणी में नामित झुंपा लाहिड़ी

jhumpa lahiri
पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतवंशी लेखिका झुंपा लाहिड़ी को अमेरिका के 'नेशनल बुक अवार्ड' की उपन्यास श्रेणी में नामित किया गया है। इसके एक दिन पहले उन्हें उनके नए उपन्यास 'द लोलैंड' के लिए 'मैन बुकर' पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। 1960 के दशक में कोलकाता में रहने वाले दो भाईयों की कहानी पर आधारित लाहिड़ी के उपन्यास के अलावा लेखक टॉम ड्रुरी का 'पेसिफिक', एलिजाबेथ ग्रैवर्स का 'द एंड ऑफ द प्वाइंट' और रचेल कुशनर का 'द फ्लेमथ्रोअर्स' भी इस पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं। 

नेशनल बुक फाउंडेशन ने कहा कि यंग पीपुल्स के साहित्य, कविता, उपन्यास और गैर उपन्यास की श्रेणी में अंतिम दौर में पहुंचने वाले लेखक-लेखिकाओं के नाम की घोषणा 16 अक्टूबर को की जाएगी और विजेता का नाम 20 नवंबर को न्यूयार्क में घोषित होगा।  लंदन में जन्मी लाहिड़ी (46) न्यूयार्क के ब्रुकलिन में रहती हैं और उनका संबंध पश्चिम बंगाल से है। उन्होंने इससे पहले तीन पुस्तकें लिखी हैं और उनकी पहली पहली पुस्तक 'इंटरपेट्रर ऑफ मालादीज' कहानियों की श्रंखला थी जिसे पुलित्जर पुरस्कार और पीईएन/हेमिंग्वे अवार्ड प्राप्त हुआ था। 

उनके उपन्यास 'द नेमसेक ' को भी काफी चर्चा मिली थी और प्रसिद्ध फिल्मकार मीरा नायर ने इसी नाम से इस पर एक फिल्म भी बनाई थी। उनकी दूसरी पुस्तक 'अनअकस्टम्ड अर्थ' थी और उसे न्यूयार्क टाइम्स बुक रिव्यू में शीर्ष 10 पुस्तकों में स्थान दिया गया था। 

उनके हालिया उपन्यास की समीक्षा में न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा था, "लाहिड़ी ने भारतीय आप्रवासियों के अमेरिका में खुद को ढालने की कोशिश को ध्यानपूर्वक देखकर लिखी गई कहानियों से अपना नाम बनाया था। उनका नया उपन्यास 'द लोलैंड' इसके विपरीत आश्चर्यजनक रूप से पेश किया गया ओपरा है। यह निश्चित रूप से लाहिड़ी का सबसे महात्वकांक्षी कार्य है।"

कोई टिप्पणी नहीं: