हर घर बिजली तो सोलर लैंप का बंटवारा क्यों ? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

हर घर बिजली तो सोलर लैंप का बंटवारा क्यों ?

charan das mahant
छत्तीसगढ़ को 'पावर हब' के रूप में स्थापित करने की धुन में बिजली कंपनी के अध्यक्ष शिवराज सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को बताया कि प्रदेश के हर घर में बिजली पहुंच चुकी है। यही बात आडवाणी ने अपने संबोधन में भी दोहरा दी कि राज्य का हर घर बिजली से रौशन है, अब विपक्ष का सवाल है कि ऐसी स्थिति में भी राज्य में सोलर लैंप क्यों बांटे जा रहे हैं? केंद्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के पश्चिम विद्युत विस्तार 500 मेगावाट संयंत्र के लोकार्पण के अवसर पर आडवाणी के दिए गए बयान पर कहा कि प्रदेश का हर घर बिजली से रौशन नहीं है। 

उन्होंने कहा, "वास्तविक तौर पर छत्तीसगढ़ अभी भी बिजली संकट से जूझ रहा है। यदि केंद्र सरकार से 1000 मेगावाट से अधिक बिजली न मिले तो प्रदेश के कई हिस्से अंधकार में समा जाएंगे।" महंत ने कहा कि घर-घर की बात तो दूर, कई मजरा और टोला में बिजली नहीं पहुंच सकी है। यदि सही मायने में बिजली पहुंच गई है तो सोलर लैंप क्यों बांटे जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का कहना है कि यह उनकी 13वीं यूनिट है जबकि 10 यूनिट कांग्रेस शासनकाल में ही स्थापित की गई है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में दो यूनिट स्थापित की गई, उसमें भी एक यूनिट कांग्रेस शासनकाल की देन है।

केंद्रीय मंत्री का कहना है कि पश्चिम विस्तार परियोजना राज्य शासन की पहली इकाई है, लेकिन वह भी आधी-अधूरी। मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा तीन माह में 500 मेगावाट के दो और संयंत्रों के लोकार्पण और हर घर में बिजली की बात कही जा रही है, जबकि वह इन 10 वर्षो में मात्र एक ही यूनिट चालू करा सके हैं, वह भी आधी-अधूरी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि विद्युत उत्पादन कंपनी द्वारा पश्चिम विस्तार संयंत्र की कुल अनुमानित लागत 3,671 करोड़ रुपये होना बताया गया है, जबकि यह विस्तार परियोजना है जिसमें कई आधारभूत संरचनाएं जमीन, जल आदि पूर्व से ही उपलब्ध रहीं हैं। ऐसे में संयंत्र निर्माण की लागत स्वयं सवालों के घेरे में आ जाती है। 

उन्होंने कहा, "प्रति मेगावाट छह करोड़ की लागत आनी चाहिए जबकि इस संयंत्र की लागत 7.34 करोड़ प्रति मेगावाट आई है जिससे देश के सबसे महंगे संयंत्र निर्माण का तमगा रमन सिंह को मिला है।"  महंत ने कहा कि बड़े-बड़े संयंत्र बना देने से ही विकास की इबारत नहीं लिखी जा सकती, बल्कि जरूरत है कि इससे उत्पादित होने वाली बिजली सही मायनों में हर घर को रौशन करे जो कि कम से कम इस भाजपा सरकार के रहते शायद ही संभव है।

महंत ने संयंत्र निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा सातवीं 500 मेगावाट विस्तार इकाई का निर्माण कराया गया था। इसकी लागत 2,300 करोड़ रुपये आई थी। इसी तरह छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी द्वारा 500 मेगावाट की पश्चिम विस्तार इकाई का निर्माण 3671 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। 

इन दोनों संयंत्रों में भेल द्वारा ही बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर का निर्माण किया गया। सीएसईबी पश्चिम विस्तार में मात्र कूलिंग टावर ही अतिरिक्त निर्माण में शामिल हैं। एनटीपीसी की सातवीं और सीएसईबी की पांचवीं इकाई के निर्माण लागत में एक ही निर्माणकर्ता कंपनी द्वारा कार्य करने के बावजूद लागत में 1,371 करोड़ रुपये का अंतर भ्रष्टाचार होने का संदेह पैदा करती है।

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