झारखंड पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि वह इस बात को लेकर चिंतत है कि नक्सली रासायनिक हथियारों को इस्तेमाल करने की क्षमता हासिल कर रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) और राज्य पुलिस के प्रवक्ता एस.एन. प्रधान ने बताया, "सभी जिलों को सतर्क कर दिया गया है। नक्सलवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के दौरान सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।" उन्होंने कहा, "नक्सलवादियों ने मीथेन और नाइट्रोजन के मिश्रण को तरल रूप में इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण लिया है। इन रासायनिक हथियारों के तरल रूप को पेड़ पर टांग दिया जाता है या सुरक्षा अधिकारियों पर फेंक दिया जाता है, और उसमें आग लग जाती है।"
ऐसी खबर हैं कि नक्सली रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण लेने के लिए पेशेवर इंजीनियरों की मदद ले रहे हैं। नक्सलवादियों को किसी स्थान या मानव शरीर में बम लगाने के लिए कथित रूप से प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें सुरक्षाकर्मियों के संदेश का पता लगाने का भी प्रशिक्षण दिया गया है।
इस साल जनवरी महीने में लातेहार जिले में नक्सली हमले में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों के शव को विमान द्वारा पोस्टमार्टम के लिए रांची लाया गया था, जिस दौरान उनमें से एक शव से चिकित्सकों को बम मिला था और जिसे निष्क्रिय कर दिया गया था। राहत की बात यह थी कि शव लाए जाने के क्रम में बम नहीं फटा। झारखंड के 24 जिलों में से 18 जिलों में नक्सली सक्रिय हैं।

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