- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार की घटना के मामले में पटना उच्च न्यायालय के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस फैसले को अत्यन्त पीड़ादायक और आश्चर्यजनक कहा है।
आज यहां जारी अपने बयान में राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि लक्ष्मणपुर बाथे जघन्य नरसंहार की घटना, जिसमें मासूम बच्चे सहित 59 दलितों की निर्ममतापूर्वक सामूहिक हत्या हुई थी, के मामले में निचली अदालत ने कुल आरोपियों में से 19 को दोष मुक्त और 26 को दोषी पाया था। 26 दोषी आरोपियों में से 16 को फांसी तथा 10 को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी थी। निचली अदालत ने तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर इस नरसंहार की घटना को अत्यन्त जघन्य और गंभीर मानकर यह सजा सुनायी थी। लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने उन 26 आरोपियों की अपील पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को दोषरहित मानते हुए सजा से बरी कर दिया। यह हमारे न्याय प्रक्रिया पर संदेह पैदा करने वाला फैसला है।
पटना उच्च न्यायालय के फैसले की रौशनी में देखा जाय तो इस 59 निर्दोष दलितों की सामूहिक हत्या में कोई दोषी नहीं है। अब यह बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जवाब देना है कि इस मामले में सभी आरोपी निर्दोष हैं तो इस जघन्य नरसंहार का दोषी कौन है? इस फैसले को देखने से यही लगता है कि बिहार की नीतीश सरकार इस नरसंहार के दोषियों को बचाना चाहती है।
इस घटना के बारे में नीतीश सरकार की मंशा तो उसी दिन स्पष्ट हो गई थी जब सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले की जाँच कर रहा अमीरदास आयोग को भंग कर दिया था। अमीरदास आयोग को भंग करके सरकार ने इस मामले की निष्पक्ष जाँच होने से रोक दिया जबकि मुख्यमंत्री के इस कदम का चैतरफा विरोध हुआ था। सरकार की यह कार्रवाई इस जघन्य नरसंहार के दोषियों को बचाने के लिए की गयी थी। अब जब इस घटना के संबंध में पटना उच्च न्यायालय का फैसला आ गया है तो नीतीश सरकार की मंशा और ज्यादा स्पष्ट रूप से उजागर हो गई है।
लक्ष्मणपुर बाथे की घटना नरसंहार की कोई अकेली घटना नहीं है जब राज्य सरकार और न्यायपालिका नरसंहार के पीडि़तों को न्याय देने में विफल रही है। यह लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यन्त ही दुःखद और शर्मनाक बात है।
राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के पीडि़तों को राज्य सरकार और उसकी पुलिस से न्याय नहीं मिला। न्यायपालिका से न्याय मिलने की आशा उन पीडि़तों को थी। लेकिन न्यायपालिका से भी उन्हें न्याय नहीं मिला। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं बतावें कि इन पीडि़तों को न्याय कहां मिलेगा?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य सरकार से मांग करती है कि वह पटना उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अविलम्ब उच्चत्तम न्यायालय में अपील दायर करे ताकि पीडि़त परिवारों को न्याय मिल सके।

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