केंद्र सरकार ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश को विभाजित कर पृथक तेलंगाना राज्य गठित करने के फैसले से पीछे हटने से इनकार किया है। सरकार ने हालांकि इस बात की भी पुष्टि नहीं की है कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में वह इसके लिए विधेयक लाएगी या नहीं।
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने प्रत्येक माह होने वाले संवाददाता सम्मेलन में आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया। शिंद ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि तेलंगाना मुद्दे पर फैसले से पीछे हटने की कोई संभावना है।’
आंध्र विभाजन पर सीमांध्र में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के सवाल पर शिंदे ने कहा, ‘इस समय मैं कुछ भी नहीं कह सकता।’ उन्होंने बताया कि तेलंगाना पर गठित मंत्रियों का समूह (जीओएम) शुक्रवार को बैठक करेगा और विभिन्न पक्षों को सुनेगा। शिंदे ने कहा कि जीओएम अपनी रिपोर्ट मंत्रिमंडल को देगा और राज्य विधानसभा के विचार सुनने के बाद संसद में विधेयक पेश करेगा। राज्य विधानसभा द्वारा तेलंगाना गठित करने का प्रस्ताव खारिज कर दिए जाने पर उठे सवाल पर शिंदे ने कहा, ‘संविधान में इसके लिए उपाय दिया गया है।’ शिंदे ने हालांकि उस संवैधानिक प्रावधान का ब्योरा नहीं दिया।
गृह मंत्री शिंदे ने कहा कि राज्य को विभाजित करते समय किसी तरह की नाइंसाफी न हो इसे सुनिश्चित करने के लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। आंध्र प्रदेश के साथ न्याय किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि तेलंगाना पर गठित मंत्रियों का समूह (जीओएम) जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करेगा।
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