पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किए जाने से वह खुद को बेहद सम्मानित महसूस कर रही है। लड़कियों के लिए शिक्षा के अधिकार की वकालत करने वाली किशोरी छात्रा मलाला को तालिबानी कट्टरपंथियों ने गोली मार दी थी। इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। मलाला के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात उसे दुनियाभर से मिला सहयोग और समर्थन है। मलाला को उनकी बहादुरी और दृढ़निश्चयी होने के लिए भारत, पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनियाभर के राष्ट्रों की सराहना और सहयोग मिला। द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक, मलाला ने यह बात कनाडाई समाचार चैनल से एक साक्षात्कार में कही।
एक अमेरिकी समाचार चैनल को दिए गए विशेष साक्षात्कार में मलाला ने कहा कि उसे शिक्षा के महत्व का एहसास पहली बार तब हुआ, जब उसके स्कूल जाने पर पाबंदी लगाई गई। उसने कहा कि लोगों के शिक्षित होने से आतंकवादी डरते हैं। मलाला ने कहा, "मैं बराबरी में विश्वास करती हूं। पुरुष और महिलाओं में किसी तरह का फर्क नहीं है।"

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