समाजवादी पार्टी (सपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), जनता दल-युनाइटेड (जदयू) के नेताओं की गुरुवार को हुई बैठक के बाद तीसरे मोर्चे की कवायद ने जोर पकड़ लिया है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने संवाददाताओं से कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों का मुकाबला करने के लिए ऐसी ताकत की नितांत आवश्यकता है। सपा नेता रामगोपाल यादव के साथ येचुरी ने कहा, "देश को सांप्रदायिक ताकतों से बचाना जरूरी है।"
जून में जदयू ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन तोड़ लिया था। भाजपा ने जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना प्रचार अभियान प्रमुख नियुक्त किया, उसके बाद नाराज जदयू ने उससे किनारा कर लिया। इससे पहले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि 2014 के आम चुनाव के बाद देश में तसरे मोर्चे की सरकार बनेगी।
मुलायम सिंह यादव ने कहा था, "मैं आम चुनाव के बाद तीसरे मोर्चे के गठन के लिए प्रकाश करात और ए.बी. बर्धन सहित वामपंथी नेताओं के साथ संपर्क में हूं।" करात माकपा के महासचिव हैं और बर्धन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव रह चुके हैं। क्षेत्रीय पार्टियां वामपंथी पार्टियों के साथ 2014 के चुनाव के लिए गठबंधन बनाने का प्रयास कर रही हैं। इन पार्टियों का मानना है कि चुनाव में न तो भाजपा को और न ही कांग्रेस को सरकार बनाने लायक बहुमत मिलेगा।

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