राहुल गांधी द्वारा मैला ढोने वालों के प्रति चिंता जाहिर करने के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को उनके लिए कई घोषणाएं कीं. मैला ढोने के काम से मुक्त कराए गए लोगों को इंदिरा आवास योजना के तहत मकान तो दिए ही जाएंगे, साथ ही ऐसी महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों को सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज दिया जाएगा जिन्हें बरसों पहले की इस कुप्रथा से मुक्त कराया जा चुका है. ऐसे लोगों के लिए कई अन्य घोषणाएं भी की गयी हैं.
मैला ढोने वालों पर आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और सामाजिक न्याय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार हाल ही में बने उस कानून को सख्ती से अमल में लाएगी जिसमें सिर पर मैला ढोने पर पाबंदी लगायी गई है. उन्होंने बरसों पुरानी इस कुप्रथा से जूझ रहे लोगों के उत्थान के लिए कांग्रेस पार्टी और यूपीए सरकार की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया.
रमेश ने कहा, ‘‘मैला ढोने के काम से मुक्त कराई गई महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं-सहायता समूहों को तीन फीसदी की सलाना ब्याज दर पर हम कर्ज मुहैया कराएंगे’’ उन्होंने कहा कि यदि वे समय पर कर्ज वापस कर देते हैं तो तीन फीसदी ब्याज के तौर पर ली गई धनराशि उन्हें वापस कर दी जाएगी. रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों को सात फीसदी की सालाना ब्याज दर पर तीन लाख रूपए तक के कर्ज मुहैया कराने को केंद्रीय कैबिनेट मई में ही अपनी मंजूरी दे चुकी है. उन्होंने कहा कि अब ब्याज दर में और कमी करते हुए इसे तीन फीसदी सालाना किया जाएगा. सरकार की असल योजना पायलट परियोजना के तौर पर 150 जिलों में लागू की जा रही है जिसमें 82 नक्सल प्रभावित जिले भी हैं.
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