राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र के अभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को कहा कि राजनीतिक दलों के अंदर चुनाव कराना निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र के बाहर है। सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी(भाजपा), समाजवादी पार्टी(सपा) और बहुजन समाज पार्टी(बसपा) सहित विभिन्न राजनीतिक दलों में आतंरिक लोकतंत्र के अभाव के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा और न्यायमूर्ति डी. के. उपाध्याय की पीठ ने कहा कि राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की नियुक्ति यदि चुनाव की जगह ऊपर से कर दी जाती है तो उसे ज्यादा-से-ज्यादा इन दलों के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
न्यायालय ने कहा कि चाहे यह कितना भी उचित लगे कि दलों के अंदर आंतरिक लोकतंत्र हो और पदाधिकारियों की नियुक्ति चुनाव के माध्यम से हो, पर निर्वाचन आयोग के पास इस प्रकार के स्पष्ट विधिक अधिकार नहीं होने के कारण उच्च न्यायालय इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दे सकता।
याचिका में ठाकुर ने कहा था कि निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों का पंजीयन जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29ए के अधीन करता है। सभी दल अपने संविधान में राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला अध्यक्ष सहित कई पदों पर निर्वाचन के द्वारा चयन की बात करते हैं, जबकि इसके विपरीत व्यवहार में लगभग सभी पार्टी पदाधिकारी हाई कमांड द्वारा सीधे नियुक्त किए जाते हैं, जो धारा 29ए के अंतर्गत बने पार्टी संविधान का उल्लंघन है। ठाकुर ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह निर्वाचन आयोग को निर्देश दे कि राजनीतिक दल अपने संविधान का पूर्ण अनुपालन करें।
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