पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल द्वारा बच्ची से बलात्कार के मामलों में पांच मुजरिमों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने का निर्णय उच्चतम न्यायालय की न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है। न्यायालय ने आज इस निर्णय को निरस्त करने के लिये दायर जनहित याचिका पर केन्द्र सरकार से जवाब तलब किया।
प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ अत्यंत जघन्य अपराध के मामलों में मुजरिमों की मौत की सजा उम्र कैद में तब्दील करने के राष्ट्रपति के निर्णय पर विचार के लिये सहमत हो गयी है।याचिकाकर्ता पत्रकार पिंकी विरानी की दलील है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 35 मामलों में मौत की सजा माफ की जिनमें से पांच मामले बर्बर तरीके से बच्चाियों से बलात्कार से संबंधित थे और ऐसे मामले में उन्हें मुजरिमों को किसी तरह की राहत नहीं देनी चाहिए थी।
राष्ट्रपति के निर्णय पर सवाल उठाते हुये याचिका में कहा गया है कि यह हतप्रभ करने वाले मामले थे और इन मुजरिमों की माफी देने का निर्णय निरस्त करते हुये उन्हें प्राणांत होने तक फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफडे ने कहा, हमें सरकार को यह कहने की आवश्यकता है कि इस तरह से अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

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