उच्चतम न्यायालय ने आधार कार्ड को बैंकों में खाता खोलने और मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए पहचान एवं पते के लिए सबूत बनाने के लिए दायर एक नई याचिका का परीक्षण करने का आज फैसला किया।
न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने केंद्र और आरबीआई से जवाब मांगा और एनजीओ नागरिक चेतना मंच की ओर से दायर जनहित याचिका को अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। उसने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने को भी चुनौती दी थी।
एनजीओ की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि आरबीआई ने आधार कार्ड के जरिए बैंकों में खाता खोलने के लिए उसे अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) मानदंड बनाकर धन शोधन के खिलाफ सभी सुरक्षा मानकों को हटाकर आर्थिक अपराधों की जटिल समस्या का रास्ता खोल दिया है। साथ ही चुनाव आयोग ने मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए पहचान और पता के सबूत के तौर पर आधार कार्ड को मंजूरी देकर गैर नागरिकों को मतदान का अधिकार देकर भी जटिल समस्या खड़ी कर दी है क्योंकि आधार कार्ड निवासियों को जारी किया जाता है, न कि सिर्फ नागरिकों को। उसने कहा कि गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारत के महापंजीयक ने नागरिकों का एक रजिस्टर तैयार किया है। इसे निजी पक्षों द्वारा जुटाए गए निवासियों के अपुष्ट डाटाबेस और बायोमीट्रिक के आधार पर तैयार किया गया है। बायोमीट्रिक नागरिकता अधिनियम के तहत तैयार नियमों का हिस्सा नहीं हैं।
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