भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए मशहूर पटना के सुपर 30 संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार ने महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजम की 126 वीं जयंती के मौके पर कहा कि ऐसे दिवसों पर दीप जलाकर महान लोगों को याद करना और भूल जाना हमारी आदत हो गई है। आनंद ने कहा कि आज रामानुजम की 126वीं जयंती के अवसर पर सभी लोग इसे मनाने में जुट गए परंतु 125वीं जयंती पर किए गए वादों का क्या हुआ ? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 125वीं जयंती के मौके पर कहा था कि वर्ष 2013 को गणित वर्ष के रूप में मनाया जाएगा, लेकिन उसके लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि अमेरिकन मैथेमेटिकल सोसाइटी हमसे ज्यादा बेहतर तरीके से रामानुजम को याद करती है। उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सफलता अर्जित करने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए अन्वेषणात्मक कदम नहीं उठाया जा रहा है। आनंद ने इस मौके पर शिक्षा प्रणाली पर प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि रामानुजम के जन्म के 126 वर्ष गुजर गए परंतु कितना दुर्भाग्य है कि फिर कोई और रामानुजम नहीं हो पाया।
रामानुजम का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास अयंगर एक साड़ी की दुकान में मुंशी का काम किया करते थे और उनकी मां घरेलू महिला थीं। गरीब परिवार में जन्मे रामानुजम को कई बार शिक्षाग्रहण करने के दौरान ही पुरस्कारों से नवाजा गया। आनंद कहते हैं कि आज छात्रों का रूझान गणित की ओर कम हो रहा है, लोगों को आज गणित भी याद कराई जाती है, उसे सही तरीक से समझाया नहीं जाता।
आनंद का मानना है कि जब तक किसी छात्र को गणित की गहराई नहीं बताई जाएगी तब तक उसकी गणित में रुचि नहीं बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश को विशेष शिक्षण वाले विद्यालयों की जरूरत है। उन्होंने सरकार से कहा कि केवल गणित वर्ष घोषित करने से ही सपना साकार नहीं होगा। सरकार को दूसरे रामानुजम को बनाने के लिए प्रयास करने होंगे।

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