नगर पालिका अधिनियम का नही हो रहा सही उपयोग-
- छतरपुर जिला में अवैद्यानिक रूप से विकषित हो रही लगातार काॅलोनिया
छतरपुर - मध्य प्रदेष सरकार व्दारा म0प्र0भू0रा0सं0 1959 की उप धारा 172 के तहत कृषि भूमि से आवासीय करने केलिए भू-परिवर्तन (डायबर्सन) करने का कानून बना है, इसके तहत राजस्व ष्षुल्क निर्धारित किया गया है, व्यापारिक दृष्टि से उसका उपयोग करने पर अलग से राजस्व ष्षुल्क निर्धारित है यदि आप उपरोक्त भूमि को आवासीय स्वंय के हितों में निजि मकान के लिए भूमि का परिवर्तन कराना चाहते है तो म0प्र0भू0 रा0 सं0 की धारा 1959 की उप धारा 59(2) के तहत कार्यावाही कर अपने मकान की स्वीकृति ले सकते है , नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत सीमा क्षेत्र में यदि कोई व्यक्ति बिना सरकार के नक्षा पास कराये खेंती /कृषि भूमि से आवासीय प्लाट भू-खण्ड बनाकर कालौनियाॅ विकषित करता है तो नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 की अनेक उपधाराओं के तहत अवैद्यानिक कालौनियाॅ के बिरूध्द अपराधिक कार्यावाही कर सकती है, नगर पालिका/नगर पंचायत सीमा क्षेत्र में बिना अनुमति के भवन का निमार्ण करने पर 187 (3) के बिरूध्द कार्यावाही करती है, नगर पाािलका/नगर पंचायत क्षेत्र में मध्य प्रदेष षासन व्दारा आवादी घोषित भूमि पर यदि किसी भी व्यक्ति व्दारा कोई अवैद्य निमार्ण करता है तो उसके बिरूध्द नगर पालिका अधिनियम की धारा 223 के तहत कार्यावाही कर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत कर सकेगी । म0प्र0 नगर पालिका काॅलोनाईजर का रजिस्ट्रीकरण निर्वधन तथा ष्षर्ते नियम 1998 की धारा 292 (ख) के अंतर्गत एक दण्डनीय अपराध भी है जिसका सही उपयोग अभी तक नगर पालिकाये नही कर पा रही है । छतरपुर जिला के तत्तकाली जिला कलेक्टर श्री राजेष जैन के समय सर्व प्रथम राजनगर अनुविभागीय अधिकारी व्दारा मध्य प्रदेष भू0रा0सं0 1959 की उप धारा 172 के तहत राजनगर अनुभाग क्षेत्र में 24 भू-माफियों के बिरूध्द कार्यावाही करते हुये भूमि के खातों पर प्रबन्धंक अनुविभागीय अधिकारी दर्ज करने के आदेष दिए गये । उसके बाद नौगाॅव अनुविभागीय अधिकारी श्री हरवंष ष्षर्मा ने नौगाॅव में हो रही अवैद्यानिक कालौनियों को राकेने केलिए नौगाॅव तहसीलदार श्री राजेष ष्षुक्ला को पत्र लिखकर नाामान्तरण पंजी के रिकार्ड के अनुसार अवैद्यानिक कालौनियों की सूची बनाकर कार्यावाही करने के लिए आदेष दिया , लेकिन तत्तकालीन तहसीलदार एवं हल्का पटवारी नौगाॅव ने भू-माफियों से मिलकर कुछ ही व्यक्तियों के बिरूध्द कार्यावाही की जिसमें राम स्नेही बसोर की सर्वसे पहिले अवेद्य कालौनी घोषित हुई , राम स्नेही बसोर ने अपने बिरूध्द हई पक्षपात कार्यावाही की षिकायते मध्य प्रदेष सरकार को दी जिसमें जाॅच में 15 लोगों को नोटिस जारी किए गये जिसमें तत्काली अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने अनेक कालोनियों को अवैद्यानिक घोषित किया । अनेक भू-माफियों के प्रकरण लंबित ही चले आ रहे हे । छतरपुर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व व्दारा 32 लोगों के बिरूध्द कार्यावाही की गई । इस प्रकार छतरपुर जिला में अवैद्याकिनक कालौनियों की भरमार को देखते हुये , तत्कालीन जिला कलेक्टर श्री राजेष बहुगुणा ने राजस्व अधिनियमों एवं कानून के तहत छोटे -छोटे भू- खण्डों के बिक्रय पत्र रोकने केलिए अपने पत्र क्र0 7 /कलेक्टर/ 13 दिनांक 20 फरवरी 2013 के आदेष में छतरपुर जिला पंजीयक को आदेष दिया कि जिला के समस्त उप पंजीयक कार्यालय में बिना डायबर्सन भूमि के 0.020 आरे यानी 0.5 डे0 भूमि से कम के बिक्रय पत्र नगर पालिका/नगर पंचायत एवं उनसे लगे ग्रामों में बिक्रय पत्रों के पंजीयन पर रोक लगाई जावें । छतरपुर जिला के समस्त तहसीलदारों एव ंनायब तहसीलदारों को इस प्रकार के आदेष दिए जाना चाहिए की जब तक नियमानुसार नक्षा पास न हो ऐसे भू-खण्डों के नामान्तरण परिवर्तन राजस्व अभिलेख में न किए जाना चाहिए ।
छतरपुर जिला पंजीयक श्रीमती संध्या सिंह ने इस आदेष का तत्काल पालन कराते हुये 2 मार्च 2013 से जिला में छोटे भू-खण्डों के बिक्रय पत्रों पर रोक लगी , इस आदेष से भले ही पंजीयन एंव मुदांक विभाग को करोड़ों रू0 की राजस्व हानि हुई है लेकिन छतरपुर जिला में रातो रात लखपति से करोड़पति बनने वालों के सपने चूर हुए, कलेक्टरा श्री राजेष बहुगुणा जी के स्थानान्तरण के बाद छतरपुर जिला के भू-माफियों ने एक बार राजनैतिक दवाव बनाकर बर्तमान जिला कलेक्टर डा0 मसूद अख्तर से इस आदेष को हटाने का प्रयास किया, ऐसा न होने पर संभागीय आयुक्त कार्यालय से एक स्थगन आदेष पारित कराया । लेकिन किसी भी जिला कलेक्टर केक विभागीय आदेष के बिरूध्द संभागीय आयुक्त को कोई निर्णय लेने का आदेष न होने से यह आदेष अधर में लटक गया है ।
छतरपुर जिला के भू-माफियों ने एक संगठन व बैनर के सहारे जिला प्रषासन पर चुनाव के पहिले दवाव बनाया लेकिन उसमें असफल हो जाने के कारण चुप रहे । कानूनी सलाहकारों एवं छुट भैया दलालों ने भू-माफियों को एक नया रास्ता दिखाया कि छोटे छोटे टकड़ों का भूमि परिवर्तन करा कर प्लाट बैचे । इस छोटे छोटे टुकड़ों का भू-परिवर्तन जिस धारा में किया जाता है वह एक तरह से व्यक्तिगत आवासीय निमार्ण की स्वीकृति के लिए म0प्र0भू0 रा0 सं0 की धारा 1959 की उप धारा 59(2) के तहत कार्यावाही हेतू स्वीकृति है । यदि कोई पक्षकार इस भू-परिवर्तन का उपयोग प्लाट बनाकर बैचने में करता है तो वह दण्ड का भागीदार है, तथा उसका राजस्व अधिकारी नामान्तरण नही कर सकते है । अंधी कमाई के चक्कर में इन दिनों इसी प्रकार का मायाजाल चल रहा है साथ ही यह प्रयास किया जा रहा है कि बर्तमान जिला कलेक्टर के कारण छतरपुर जिला में अवैद्य कालौनिया विकाषित न हो पा रही है इसलिए राजनेताओं की ष्षरण में जाकर कलेक्टर का स्थानान्तरण करवाने की चर्चाए जोर पकड़ रही है लेकिन भू-माफियों को यह ज्ञान नही है कि म0प्र0भू0 रा0 सं0 की धारा 1959 की उप धारा 172 एवं 59(2) में जो होना है वह राजस्व अधिकारी को ही करना है उसका ज्ञान नही है । बर्तमान में भी अवैद्यानिक कालोनियों का कारोवार लगातार भू-माफियों व्दारा किया जा रहा है जिस पर तत्काल उच्च स्तरीय जाॅच होना चाहिए ।
आम आदमी की मेहनत की कमाई को लूटने बाले भू-माफियों को गरीव व अमीर का ध्यान नही है न ही सरकार के नियमों की चिंता है वह तो अपनी काली कमाई के चक्कर में जगह जगह आवासीय कालौनियों के प्लाटों की दुकान खोलकर करोड़ों रू0 की कमाई कर चुके है और कर रहे है यदि जिला प्रषासन व्दारा इनके बिरूध्द कानून के तहत कठोर कार्यावाही नही की जाती है तो जिला की जनता को यह ठग फर्जी नक्षा व विज्ञापन के माध्यम से गुमराह करते रहेगे ।

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